पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाली साम्रगी का क्या करना चाहिए, जानें महत्व, ज्योतिषियों के मुताबिक बची हुई पूजन सामग्री का इस्तेमाल जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए किया जा सकता है.
Source : DB News Update
By : कर्मकाण्डी पंडित संजय तिवारी | Edited By- सुप्रिया
Astro Tips: हिंदू धर्म में पूजा पाठ (Puja-Path) का बहुत महत्व बताया गया है. पूजा के दौरान विभन्न प्रकार की चीजें भगवान या देवी -देवता को अर्पित की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा के बाद पूजा की साम्रगी का क्या करना चाहिए?
बहुत से लोग पूजा की साम्रगी को मंदिर में रख देते है. कई लोग इसे पेड़ के नीचे रख देते हैं तो कई लोग इसे जल या बहती नदी में प्रवाहित कर देते हैं. लेकिन ज्योतिषियों के मुताबिक बची हुई पूजन सामग्री का इस्तेमाल जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए किया जा सकता है.
जली हुई बाती का क्या करें?
पूजा के बाद जलती हुई बाती का क्या करें, इस बाती को भूल कर भी कूड़े में ना फेंके इस बाती में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) होती है. इसीलिए इस बाती को इक्कठा करें और कपूर और लौंग के साथ जलाकर पूरे घर में घूमाएं और इसकी राख को रख लें और जब भी कभी जरुरी काम या इम्तेहान के लिए जाएं तो भगवान का आशीर्वाद समझ इसे अपने माथे पर लगा लें.
रोली का क्या करें?
पूजा के दौरान अगर रोली (Roli) बच जाए तो इसे सुहागिन महिलाएं अपनी मांग भरने के लिए इस्तेमाल कर सकती है. ऐसा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
फूलों का क्या करें?
पूजा के दौरान बचे हुए फूल (Phool) को फेंके नहीं, इसका करना अशुभ माना जाता है.फूलों को इस साथ किसी गमले में डाल दें, इससे नए पौधे उग आएंगे. साथ ही फूलों का अनादर भी नहीं होगा.
अक्षत का क्या करें?
पूजा की थाली में बचे हुए चावल (Rice) या अक्षत को अपने घर में रोज में इस्तेमाल होने वाले चावल में मिला दें. ऐसा करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती साथ ही मां लक्ष्मी का आर्शीवाद प्राप्त होता है.
सुपारी का क्या करें?
पूजा पाठ में सुपारी (Supari) का भी बहुत महत्व होता है. पूजा के दौरान अक्सर पान के पत्ते पर सुपारी रखी जाती है. अगर पूजा में सुपारी बच जाएं तो इसे एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें. ऐसे करने से घर में कभी धन की कमी नहीं होती है.
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पूजन सामग्री को संभालने के सबसे उत्तम तरीके
फूल, पत्तियां और माला की खाद बनाएं. सूखे या बासी फूलों और पत्तियों को घर के किसी गमले या बगीचे में मिट्टी के नीचे दबा दें. कुछ समय में यह बेहतरीन जैविक खाद बन जाएगी.
पेड़ की जड़ के पास रख दें. यदि खाद नहीं बना सकते, तो इन्हें किसी पवित्र पेड़ (जैसे पीपल, बरगद या नीम) की जड़ के पास साफ स्थान पर रख दें.
हवन की राख या भस्म को पौधों में डाल दें. हवन की राख औषधीय और पोषक तत्वों से भरपूर होती है. इसे अपने घर के पौधों या तुलसी के गमले की मिट्टी में मिला दें. यह पौधों के लिए कीटनाशक और खाद का काम करती है.
यदि कलश पर रखा नारियल पानी वाला है, तो उसे फोड़कर प्रसाद के रूप में बांट दें. यदि सूखा नारियल है, तो उसे हलवा या खीर जैसी मिठाइयों में कद्दूकस करके इस्तेमाल कर लें.
माता की चुनरी को घर की महिलाएं या कन्याएं इस्तेमाल कर सकती हैं, या इसे तिजोरी में बरकत के लिए रखा जा सकता है. पुराना कलावा (मौली) हाथ से उतारकर किसी पेड़ की शाखा पर बांध दें.
बचे हुए अक्षत (चावल) और रोली को माथे पर तिलक लगाने के लिए आगे भी उपयोग करें.
अगरबत्ती या धूपबत्ती की राख को किसी गमले की मिट्टी में डाल दें.
यदि भगवान के वस्त्र पुराने हो गए हैं, तो उन्हें साफ करके पानी में प्रवाहित कर सकते हैं या मिट्टी में सम्मानपूर्वक दबा सकते हैं.
यदि कोई कागज की तस्वीर या मिट्टी की मूर्ति खंडित हो गई है, तो उसे किसी पवित्र नदी या तालाब में विसर्जित करें.
पानी का स्रोत न होने पर साफ जमीन में गड्ढा खोदकर भू-विसर्जन (मिट्टी में दबाना) सबसे सही विकल्प है.
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