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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > रावण दहन कब है? जानें…
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रावण दहन कब है? जानें…

DB News
Last updated: 06/10/2026 10:14 PM
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6 Min Read
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विजय दशमी का पर्व रावण दहन के साथ हमें हमारे सामाजिक जीवन की बुराइयों का भी वध करने का संदेश देता है.

Source : DB News Update  

Contents
विजय दशमी का पर्व रावण दहन के साथ हमें हमारे सामाजिक जीवन की बुराइयों का भी वध करने का संदेश देता है.बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहराकब है दशहरा की तिथि?हर पंथ और धर्म में रावण दहन का जिक्रइन बुराईयों से जीतना जरूरीरावण से जीवन का क्या मिलती है सीख

By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Dussehra 2025: विजय दशमी का पर्व हमें बुराईयों पर विजय का प्रतीक माना गया है. ऐसी बुराईयां हमारे अंदर भी हैं, जिनका इस दशहरे पर नाश करना जरूरी है. हमारे सामाजिक जीवन में कई रावण रूपी राक्षस हैं, जिनसे हमें स्वयं लड़ने की जरूरत है. वह चाहे देश में फैले भ्रष्टाचार रूपी रावण का अस्तित्व हो या फिर राह चलते अन्याय का रास्ता अख्तियार करने वाले राक्षस हों, उन सबको हमें परास्त करना है. तभी धर्म और संस्कृति की स्थापना हो सकती है. श्रीरामचरित मानस से हमें अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों से निकलने की सीख मिलती है. जिन्हें हम आत्मसात करके अपने स्वभाव में परिवर्तन कर सकते हैं और खुद को बदल सकते हैं. आइए रावण दहन के अवसर पर हम उन सभी बुराइयों को जला दें और उत्साह के साथ रावण दहन का उत्सव मनाएं.

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा

पौराणिक मान्यता है कि विजय दशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. नौ दिन मां दुर्गा को समर्पित करने के बाद दशमी के दिन बुराई पर जीत के रूप में दशहरा मनाते हैं. जबलपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बतया कि विजयदशमी के दिन श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध करके अन्याय पर न्याय की स्थापना की थी. इसके अलावा इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था, इस कारण इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है.

कब है दशहरा की तिथि?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार विजयदशमी का पर्व हिंदू पंचांग मे आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 01 अक्टूबर को शाम 07:01 मिनट पर बतलाया गया है. वहीं, इस तिथि का समापन 02 अक्टूबर को शाम 07:10 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार दशहरा का त्योहार इस साल 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

हर पंथ और धर्म में रावण दहन का जिक्र

रावण दहन करने की परंपरा कोई हिंदू धर्म में नहीं है. बल्कि पंजाबी समाज भी रावण दहन का उत्सव बड़े ही उत्साह के साथ मनाता है. उदाहरण स्वरूप जबलपुर का पंजाबी समाज विगत 73 वर्षों से रावण-मेघनाथ के पुतले का दहन कर रहा है. यह पंजाबी दशहरा का रावण दहन देश भर मे चर्चित है. क्योंकि यहां का रावण सबसे ऊंचा और आकर्षक हर वर्ष बनाया जाता है और इस रावण दहन को देखने के लिए गांव-शहर का हर वर्ग देखने दशहरा मैदान में पहुंचता है. बच्चों में बड़ा ही उत्साह देखने को मिलता है. क्योंकि रावण दहन के दौरान की जाने वाली आतिशबाजी सभी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र होती है. पंजाबी दशहरे के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि रावण सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि तमाम बुराइयों का प्रतीक है, जिसका हर दशहरे पर वध किया जाना जरूरी है. 

इन बुराईयों से जीतना जरूरी

देश भर में सामाजिक बुराईयां हैं. जैसे बलात्कार , गंदगी, भ्रष्टाचार, प्रदूषण, अशिक्षा, गरीबी और अंधविश्वास जैसी बुराइयां घर-घर फैली हैं. इनका अंत होना बहुत जरूरी है. इन बुराइयों को खत्म करने के लिए युवा पीढ़ी को आगें आना होगा. तभी इन बुराईयों से जीत हासिल हो सकती है.

रावण से जीवन का क्या मिलती है सीख

मान्यता है कि रामायण में बतलाया गया है कि जब रावण अपने अंतिम समय में था, तो राम ने लक्ष्मण को अपने पास बुलाया. राम ने लक्ष्मण से कहा कि, रावण नीति, राजनीति और शक्ति का महान ज्ञाता है.

ऐसे समय में जब वह संसार से विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाकर जीवन की कुछ शिक्षा ले लो. राम की बात सुनकर जब लक्ष्मण जी रावण के पास गए, तो रावण ने उन्हें तीन बातें बताईं.

शुभस्य शीघ्रम 

रावण ने लक्ष्मण को शिक्षा दी कि शुभ कार्य करने में कभी देरी नहीं करनी चाहिए. जैसे ही किसी शुभ कार्य का चिंतन हो या मन में विचार आए उसे तुरंत कर डालना चाहिए. इसके अलावा अशुभ को जितना टाल सकते हो उसे टाल दो.

शत्रु छोटा नहीं

लक्ष्मण को रावण की दूसरी सीख यह थी कि, कभी भी अपने प्रतिद्वंद्वी या शत्रु को खुद से छोटा या कमतर नहीं समझना चाहिए. रावण ने स्वीकारा कि यह उसकी सबसे बड़ी भूल थी. रावण ने वानर और भालू सेना को कमतर आंका और अपना सब कुछ नष्ट कर बैठा.

रहस्य न बताओ

महाज्ञानी रावण ने लक्ष्मण को तीसरा ज्ञान यह दिया कि, अपने रहस्य कभी किसी को नहीं बताने चाहिए. रावण ने लक्ष्मण से कहा कि मेरे मृत्यु से जुड़ा रहस्य यदि में किसी को नहीं बताता तो आज मेरी मृत्यु नहीं होती. लेकिन मैंने यह रहस्य अपने भाई पर भरोसा करके बताया जिसके कारण आज में मृत्यु शैया पर पड़ा हूं.

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