हिंदू धर्म (Hindu Dharma) में बेटी-बहुओं को घर की लक्ष्मी (Lakshmi Ji) कहा जाता है. आखिर ऐसा क्यों कहते हैं और इसका कारण क्या है. क्या आपने इस बारे में कभी सोचा है.
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By : DB News Update | Edited By- Supriya
Ghar ki Lakshmi : हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी (Maa Laxmi) को धन-वैभव की देवी कहा जाता है. मान्यता है कि जहां लक्ष्मी का वास होता है, वहां कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता और भौतिक सुख-सुविधाओं की कमी नहीं रहती. हिंदू धर्म में स्त्रियों (Stree) को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है. इसलिए जब भी घर पर कन्या का जन्म होता है तो लोग कहते हैं- मुबारक हो..लक्ष्मी आई है.
यही कारण है कि लोग मां लक्ष्मी की पूजा केवल घर पर ही नहीं बल्कि अपने कार्यक्षेत्र (Work Place) पर भी करते हैं, जिससे उनके नौकरी-व्यवसाय में भी आर्थिक तरक्की होती रहे. जीवन के प्रत्येक क्षण स्त्री साथ देती है. मुसीबत से लड़ने में सहायक सिद्ध होती है. इसी कारण हिंदू परंपराओं में स्त्री को रत्न कहा गया है. स्त्री को साेना, चांदी, हीरा के समान रक्षा और सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी पुरुषों की होती है. सनातन धर्म हमें अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की देखभाल करने का जिम्मा उठाना पड़ता है. लेकिन स्त्री को विशेष रूप से हर क्षण छाया की भांति उसके आसपास रहकर सुरक्षा प्रदान करना होता है, जिससे स्त्री के मन में सुरक्षा का भाव बना रहे.
बहुएं भी लक्ष्मी का रूप
इसके साथ ही घर की बहुओं को भी लक्ष्मी का रूप माना गया है. इसलिए घर की देखरेख की जिम्मेदारी बहुओं को दी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर क्यों स्त्रियों को लक्ष्मी कहा जाता है. मां दुर्गा (Maa Durga), मां पार्वती, देवी सरस्वती या अन्य देवी क्यों नहीं. क्या इसका संबंध धन से जुड़ा हुआ है.
स्त्रियों को क्यों कहा जाता है लक्ष्मी
मां लक्ष्मी केवल धन की देवी ही नहीं है. बल्कि उनके पास अपार शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का भंडार है. लक्ष्मी जी को ब्रह्मांड की ऊर्जा माना गया है. इसलिए हिंदू धर्म में स्त्रियों को लक्ष्मी समान कहने के पीछे का अर्थ यह है कि, जिस तरह मां लक्ष्मी में सकारात्मकता है उसी तरह बेटी के जन्म होने या नई बहु के आने पर घर पर भी सकारात्मक ऊर्जा आती है. इसलिए सनातन धर्म (Sanatan Dharm) में स्त्रियों को दैवीय महत्व दिया गया है.
बेटी का जन्म एक सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है
हिंदू धर्म ग्रंथों और गरुण पुराण के अनुसार, बेटी का जन्म केवल एक सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह घर में कोमल और पवित्र ऊर्जा का संकेत है. ऐसा माना जाता है कि बेटी के आने से घर का माहौल अधिक शांत, स्नेही और खुशहाल बनता है. गरुड़ पुराण यह भी सिखाता है कि बेटी का जन्म एक विशेष आशीर्वाद होने के साथ-साथ माता-पिता के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, जिसमें उसे समानता का अधिकार, अच्छी शिक्षा और स्वतंत्रता देना शामिल है.
नई बहू का आगमन से आंगन में आती हैं खुशियां
नई बहू को घर की ‘गृहलक्ष्मी’ कहा जाता है, जिनके आने से परिवार की वंश-वेल आगे बढ़ती है और घर में रौनक आती है. नए सदस्य के जुड़ने से घर के रिश्तों में नया उत्साह, आपसी सहयोग और उत्सव का माहौल बनता है, जिससे घर की ऊर्जा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है. इसी कारण बहू के आते ही घर में खुशियां मनाई जाती हैं. परिवार के सदस्य के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाती है.
शुक्रवार के दिन ही मां लक्ष्मी की पूजा क्यों?
वैसे तो नियमित रूप से मां लक्ष्मी पूजा हर घर पर की जाती है. लेकिन शास्त्रों में सभी देवी-देवताओं के लिए विशेष वार समर्पित है. देवियों की पूजा के लिए शुक्रवार का दिन समर्पित है. इसलिए शुक्रवार के दिन मां संतोषी, मां दुर्गा, वैभव, महालक्ष्मी समेत शुक्र ग्रह की पूजा का भी विधान है. यही कारण है कि शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी और उनके स्वरूपों की पूजा के लिए शुभ माना गया है और इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा-व्रत का विधान है.
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