रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं. उनके साथ 7 मंत्री शामिल होंगे. मोदी–पुतिन की दो महत्वपूर्ण बैठकें होंगी और 25 से ज्यादा समझौते संभव हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आ रहे हैं, जो 23वें इंडिया-रूस समिट में शामिल होंगे. वे आज शाम को दिल्ली में लैंड करेंगे. उनकी सुरक्षा को देखते हुए एंटी ड्रोन सिस्टम, जैमर और स्नाइपर कवर के बीच सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. सुरक्षा चाक-चौबंद है. सुरक्षा व्यवस्था में शामिल सभी एजेंसियों को इस दौरे के दौरान लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. पुतिन के आगमन से लेकर उनके जाने तक, हर गतिविधि पर कई सुरक्षा एजेंसियां नजर रखेंगी.
कल होगी पीएम मोदी से शिखर वार्ता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ (4-5 दिसंबर) को रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव सहित कुल सात (07) कैबिनेट मंत्री भारत के दौरे पर आ रहे हैं. पुतिन के प्रतिनिधिमंडल में रूस के हथियारों के निर्यात को संचालित करने वाली रोसोबोरोनएक्सपोर्ट कंपनी के अधिकारियों सहित रशियन सेंट्रल बैंक के गवर्नर भी शामिल हैं. पुतिन और रक्षा मंत्री के अलावा रूस के कृषि मंत्री, वित्त मंत्री और आर्थिक विकास मंत्री भी भारत के दौरे पर आ रहे हैं. इस शिखरवार्ता में पीएम मोदी के साथ भारत और रूस के बीच 10 इंटरगर्वमेंटल और 15 कार्मिशियल समझौते होने की संभावना है.
रूसी डेलिगेशन में और कौन लोग ?
रूसी डेलिगेशन में कस्टम विभाग के अधिकारी, रूस के वित्तीय निगरानी संस्थान के प्रतिनिधि, सैन्य-तकनीकी सहयोग विभाग के प्रमुख दिमित्री शुगायेव और रोस्कोस्मोस, रोसाटॉम और वीईबी आरएफ जैसी बड़ी सरकारी कंपनियों के प्रमुख भी हैं.
बिजनेस जगत से स्बेरबैंक के प्रमुख, बेसिक एलिमेंट कंपनी, रुशाल, वीटीबी बैंक, उर्वरक उत्पादक संघ, रोसखिम, ट्रांसमाशहोल्डिंग और कई अन्य बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी भारत आएंगे.
किस-किस क्षेत्र में समझौते होंगे?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस दौरे में इन क्षेत्रों में एग्रीमेंट होने तय हैं. व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, मीडिया, मजदूरी और कामगारों पर सहयोग. रूस में कामगारों की जरूरत बढ़ रही है. इसलिए भारत और रूस लेबर मोबिलिटी एग्रीमेंट करेंगे, जिससे भारतीय कामगारों को रूस में सुरक्षित और बेहतर अवसर मिल सकें. भारत-रूस व्यापार में भारत के घाटे को कम करने पर भी बातचीत होगी. रक्षा और ऊर्जा पर खास फोकस रहेगा.
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि S-400 मिसाइल सिस्टम और Su-57 लड़ाकू विमान चर्चा के प्रमुख मुद्दे होंगे. दोनों देश साथ मिलकर तेल व्यापार को और सरल और सुरक्षित बनाना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि भारत-रूस व्यापार 63 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और लक्ष्य है कि यह 2030 तक 100 अरब डॉलर हो जाए.
चुनिंदा व्यक्ति शामिल हो सकते हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच दो अहम मुलाकात होनी है. एक क्लोज डोर बैठक है, जिसमें मोदी और रूसी राष्ट्रपति के अलावा बेहद चुनिंदा व्यक्ति शामिल हो सकते हैं. दूसरी बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे. साथ ही मोदी और पुतिन, इंडिया-रशिया बिजनेस फोरम के सम्मेलन में भी शिरकत करेंगे. इस बीच पुतिन, रूस के सरकारी न्यूज़ चैनल आरटी (पूर्व में रशिया टुडे) के इंडिया चैनल, आरटी-इंडिया की लॉन्चिंग में भी शामिल होंगे.
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार (9 दिसंबर 2025) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव इंडिया-रशिया इंटर गवर्नमेंटल कमीशन ऑन मिलिट्री एंड मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन मिनिस्ट्रियल मीटिंग में हिस्सा लेंगे. इस मीटिंग से पहले, आंद्रे बेलौसोव को दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में भारत की सेना के तीनों अंग (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) की एक साझा टुकड़ी गार्ड ऑफ ऑनर देगी.
नेशनल वॉर मेमोरियल का दौरा
रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव नेशनल वॉर मेमोरियल भी जाएंगे और भारत के वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. खास बात है कि पुतिन और बेलौसोव का दिल्ली दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब बुधवार (4 दिसंबर को) भारतीय नौसेना अपना 54वां स्थापना दिवस मना रही है. 1971 की जंग में पाकिस्तान के कराची में हमला करने की याद में हर वर्ष 4 दिसंबर को नेवी डे मनाया जाता है. उल्लेखनीय है कि 1971 की जंग में जब अमेरिका ने भारत के विरुद्ध अपना सातवां जंगी बेड़ा बंगाल की खाड़ी में भेजने की साजिश रची थी, तब रूस ने अपना जंगी बेड़ा हिंद महासागर में तैनात कर दिया था. रूसी नौसेना के भारत की मदद के लिए आने पर अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध से अपना हाथ खींच लिया था. युद्ध में भारत की निर्णायक विजय हुई थी और पाकिस्तान के दो फाड़ हो गए थे.
