बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. ऐसे में आइए जानें कि बसंत पंचमी पर क्यों की जाती है मां सरस्वती की पूजा?
Source : DB News Update
By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Basant Panchami 2027: माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार है मनाया जाता है. यह वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है. इस दिन ज्ञान, कला व बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है. इस दिन श्रद्धालु पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और सरस्वती जी का पूजन करते हैं. उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं और इस दिन पतंग बाजी का लोग आनंद लेते हैं. यह पर्व प्रकृति के नवीनीकरण का प्रतीक है, जिसे एक नई शुरुआत का उत्सव भी कहा जाता है. बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है.यह दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और विद्या के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, देवी सरस्वती को बुद्धि, वाणी और शिक्षा की अधिष्ठात्री देवी माना गया है.
ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है, प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु अर्थात ये परम चेतना हैं. मां सरस्वती हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं.
कब है बसंत पंचमी?
साल 2027 में बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) 11 फरवरी 2027, गुरुवार को मनाई जाएगी है. यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाएगा. इस साल, पंचमी तिथि 11 फरवरी 2027 को सुबह 03:04 बजे से शुरू होगी और 12 फरवरी 2027 को सुबह 03:18 बजे तक समाप्त हो जाएगी.
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह से लेकर दोपहर के मध्य तक है. पूजा का शुभ समय सुबह 07:03 एएम से दोपहर 12:36 पीएम तक यानि कुल 5 घंटे 32 मिनट तक है. मध्याह्न क्षण दोपहर 12:36 पीएम तक है.
पूजन करने का क्यों है विधान
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि यह दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी सरस्वती के जन्मदिन से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही देवी सरस्वती का जन्म हुआ था. इस शुभ अवसर पर उनकी पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
ऐसी है पौराणिक मान्यता
- पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि सृष्टि की रचना के बाद, ब्रह्माजी ने देखा कि मनुष्य गूंगे हैं और उनके पास ज्ञान का अभाव है, तब उन्होंने सरस्वती देवी का आह्वान किया. देवी ने अपनी वीणा बजाकर संसार में वाणी और ज्ञान का संचार किया.
- मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी माना जाता है. इसीलिए इस दिन छात्र और शिक्षक सरस्वती पूजा करते हैं और उनसे ज्ञान और विद्या की प्रार्थना करते हैं.
- बसंत पंचमी का दिन शुभ कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन कोई नया काम शुरू करने, विवाह करने या किसी भी प्रकार के नए काम को आरंभ करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है.
परंपराएं और उनका महत्व
पीला रंग वसंत ऋतु में खिलने वाली सरसों की फसलों और नई शुरुआत का प्रतीक है, जिसे पहनकर भक्त सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करते हैं. मां सरस्वती को विशेष रूप से पीले गेंदे के फूल या पीले वस्त्र और भोग में बूंदी के लड्डू या केसरिया भात अर्पित किया जाता है. विद्यार्थी और कला से जुड़े लोग इस दिन अपनी किताबों, पेन और वाद्यों की पूजा करते हैं ताकि उन्हें ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिले.
मां सरस्वती के विशेष मंत्र
पूजा के समय बुद्धि, विद्या और एकाग्रता बढ़ाने के लिए छात्र और कला प्रेमी इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं.
सरस्वती मूल मंत्र –
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”(नियमित रूप से या पूजा के दौरान 108 बार इस मंत्र का जाप करने से स्मरण शक्ति तेज होती है।)
विद्या प्राप्ति के लिए मंत्र-
“सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने।”
“विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तुते॥”
(अर्थ: हे महाभाग्यवती ज्ञानरूपा कमल के समान विशाल नेत्रों वाली ज्ञानदात्री सरस्वती, मुझे विद्या दो, मैं आपको प्रणाम करता हूँ।)
सरस्वती वंदना श्लोक:
“या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।”
“या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥”
“या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।”
“सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥”
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