स्मार्ट सिटी के अधिकारी न तो खुद चला रहे और न ही एजेंसी की तलाश कर पा रहे जो प्रोजेक्ट 2 साल पहले बनकर तैयार, उसे ननि को हैण्डओवर भी नहीं कर रहे.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Smart City Jabalpur. स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने केन्द्र सरकार से मिली अनुदान राशि की जमकर बंदरबाँट की है. ज्यादातर प्रोजेक्ट जनता के लिए हितकर साबित नहीं हो रहे हैं. जहाँ देखो वहीं इसके उदाहरण देखने मिल रहे हैं. करीब 2 साल पहले शक्तिनगर जेडीए गार्डन में स्मार्ट सिटी के द्वारा मिनी स्पोर्ट्स सेंटर का निर्माण कराया गया है. उस पर करीब 5.59 करोड़ खर्च किए गए हैं. इसके अलावा खेल से संबंधित अन्य इक्यूपमेंट लगवाए गए हैं, लेकिन यह मिनी स्पोर्ट्स सेंटर क्षेत्रीय खिलाड़ियों के काम नहीं आ रहा है.
स्वीमिंग पूल में काई जम गई है. अंडर ग्राउंड खेल परिसर में धूल जमी है. करीब 2 साल से बंद पड़े स्टेडियम में खेल से संबंधित एक भी गतिविधि देखने को नहीं मिल रही है. स्मार्ट सिटी के अधिकारी अपनी मस्ती में मदमस्त हैं, उन्हें जनता की गाढ़ी कमाई की परवाह ही नहीं है. बरबाद हो रहे प्रोजेक्ट की तरफ बिल्कुल ध्यान ही नहीं दे रहे हैं.
2 साल बाद भी नगर निगम को नहीं कर पाए हैण्डओवर
शक्तिनगर में बने मिनी स्पोर्ट्स सेंटर को बने 2 साल से ज्यादा हो गए। अभी तक स्मार्ट सिटी के अधिकारी मिनी स्टेडियम को नगर निगम को हैण्डओवर करने की कार्रवाई नहीं कर पाए, जबकि स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि जो भी प्रोजेक्ट कम्प्लीट हो चुके हों, उन्हें जल्दी से जल्दी नगर निगम के हवाले कर दिया जाए, जिससे नगर निगम की आमदनी बढ़ाई जा सके, लेकिन स्मार्ट सिटी के अधिकारी अपनी जेब भरने के चक्कर में मिनी स्पोर्ट्स सेंटर को हैण्डओवर नहीं कर रहे हैं.
बरबाद हो रहा खेल का इन्फ्रॉस्ट्रक्चर
जनता की गाढ़ी कमाई से स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने शक्तिनगर मिनी स्पोर्ट्स सेंटर में खेल का स्ट्रक्चर तैयार कराया है. उसका सदुपयोग प्रतिभावान खिलाड़ी नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण खेल मैदान, स्वीमिंग पूल सहित खेलने के अन्य स्थान बरबादी की कगार पर पहुँच चुके हैं. इस बात की चिंता स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को बिल्कुल भी नहीं है, तभी तो दो साल बाद भी इस खेल मैदान में खेल गतिविधियों का संचालन न तो स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार करा रहे हैं और न ही किसी एजेंसी के माध्यम से खेल गतिविधियाँ करवाने का प्रयास कर रहे हैं.
स्वीमिंग पूल की सुविधा भी भूले
भंवरताल गार्डन परिसर में एक स्वीमिंग पूल की सुविधा थी. शक्तिनगर में स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स परिसर में स्वीमिंग पूल बनाया गया,, जिससे क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सके. यहां अत्याधुनिक बैडमिंटन कोर्ट और बॉस्केट बॉल कोर्ट भी बनाया गया. लेकिन क्षेत्रीय लोगों को इसका लाभ होता नहीं दिख रहा है. वहीं जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने एलएनवाय स्कूल में 3.2 करोड़ रुपये की लागत से मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया गया. यहां भी जबलपुर शहर के खिलाड़ियों के लिए बास्केटबॉल कोर्ट, बैटमिंटन कोर्ट, जिमनेशियम हॉल और एक मल्टीपर्पस हॉल बनाया गया. लेकिन इन सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
इसके अलावा, एडमिनिस्ट्रेशन रूम और शौचालय की सुविधा भी इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में होगी।
जबलपुर शहर की खेल प्रतिभाओ के लिए स्मार्ट सिटी जबलपुर लगातार प्रयासरत है.
मिशन से भटक गया है जबलपुर स्मार्ट सिटी
जबलपुर स्मार्ट सिटी अपने खुद के मिशन से भटक गया है. दरअसल नागरिकों को स्वच्छ, टिकाऊ और नागरिक-अनुकूल पर्यावरण के साथ उच्च गुणवत्ता वाला जीवन देना. पर्याप्त पानी और बिजली की आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कुशल सार्वजनिक परिवहन और किफायती आवास उपलब्ध कराना. शहरी सेवाओं को बेहतर और कुशल बनाने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) और स्मार्ट समाधानों को लागू करना. स्थानीय क्षेत्रों के विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करके आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना. जैसे उद्देश्य केन्द्र सरकार ने रखे थे और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तैयार करते हुए एक निर्धारित राशि सभी चिन्हित स्मार्ट सिटी शहरों को जारी कर दी गई थी. लेकिन जबलपुर स्मार्ट सिटी अपने उद्देश्य से भटक गया और अनाप-शनाप तरीके से प्रोजेक्टों पर पैसे बर्बाद कर दिए.
संचालन के लिए नहीं मिल पा रही एजेंसी
स्मार्ट सिटी जबलपुर के अधिकारियों ने मिनी स्पोर्ट्स सेंटर संचालित करने के लिए एजेंसी तय करने का कई बार टेंडर निकाल चुके हैं, लेकिन स्मार्ट सिटी को एजेंसी नहीं मिल पा रही है. क्योंकि सारे प्रोजेक्ट फ्लॉप साबित हो रहे हैं.
