मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव बोले, ‘विश्व में सर्वाधिक घड़ियाल चंबल नदी में. ड़ियालों और गंगा डॉल्फिनों का निवास स्थान, पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है. घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन यहां पाए जाते हैं.
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By : DB News Update | Edited By: Prince Awasthi
MP News: मध्य प्रदेश बाघ, तेंदुआ और घड़ियाल जैसे प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला प्रदेश है. चीता पुनर्स्थापन करने वाला मध्यप्रदेश एक मात्र प्रदेश है. मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में ही नहीं पूरे विश्व में सर्वाधिक घड़ियाल चंबल नदी में पाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि विश्व में लगभग तीन हजार घड़ियाल हैं, तो इनमें से 85 प्रतिशत चंबल नदी में हैं. मध्य प्रदेश को “टाइगर स्टेट” कहा जाता है और 2022 की आधिकारिक बाघ गणना में यहां देश में सबसे ज्यादा अनुमानित बाघ पाए गए थे. हालांकि बाघों की संख्या स्थायी नहीं होती और नई अखिल भारतीय गणना के साथ राज्यवार आंकड़े बदल सकते हैं. इसलिए “सबसे ज्यादा बाघों वाला राज्य” जैसे दावे के साथ गणना का वर्ष बताना ज्यादा सटीक तरीका है.
4 जनवरी से वन्य-जीव पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन्य जीव पर्यटन की दिशा में मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. शनिवार 4 जनवरी से वन्य-जीव पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा. सीएम चंबल अभयारण्य का भ्रमण कर चंबल नदी के घड़ियाल अभयारण्य की व्यवस्थाओं का अवलोकन कर पर्यटन सुविधाओं का जायजा लेंगे.
वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है चंबल
चंबल में घड़ियाल अभयारण्य वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है और इसका मुख्यालय मुरैना में है. घड़ियालों और गंगा डॉल्फिनों का निवास स्थान, पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है. घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन यहां पाए जाते हैं. अन्य जानवर जो (दुर्लभ) श्रेणी में हैं, उनमें मगरमच्छ, चिकने-लेपित ऊदबिलाव, धारीदार लकड़बग्घा और भारतीय भेड़िये हैं, जो संरक्षण सूची की अनुसूची-1 में शामिल हैं.
तेंदुओं के वर्गीकरण और संरक्षण चुनौतियां
बाघ रेंज वाले राज्यों और विविध परिदृश्यों को शामिल करते हुए, व्यापक सर्वेक्षण में तेंदुए की बहुतायत का आकलन करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मजबूत वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया. इस दौरान कैमरा ट्रैपिंग, आवास विश्लेषण और जनसंख्या के संयोजन की एक सावधानीपूर्वक प्रक्रिया के माध्यम से, तेंदुओं के वर्गीकरण और संरक्षण चुनौतियों में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि का पता चला.
विविध वन क्षेत्र मौजूद हैं बाघ
मध्य प्रदेश में बाघों के लिए बड़े और विविध वन क्षेत्र मौजूद हैं. कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना जैसे टाइगर रिजर्व राज्य की पहचान बन चुके हैं. NTCA के अनुसार मध्य प्रदेश में वर्तमान में पांच टाइगर रिजर्व हैं, जबकि राज्य में कई राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य भी हैं. इन संरक्षित क्षेत्रों में जंगल, घासभूमि, जलस्रोत और बाघों के प्राकृतिक शिकार के लिए उपयुक्त परिस्थितियां मिलती हैं.
NTCA की आधिकारिक रिपोर्ट में 785 बाघों का अनुमान दर्ज
मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या पिछले कुछ दशकों में काफी बदली है. NTCA की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 2006 में 300, 2010 में 257, 2014 में 308, 2018 में 526 और 2022 में 785 बाघों का अनुमान दर्ज किया गया था. हालांकि इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह समझना जरूरी है कि बाघों की गणना की तकनीक और सर्वेक्षण की पद्धतियां समय के साथ विकसित हुई हैं. 2022 का आंकड़ा देशव्यापी कैमरा ट्रैप और वैज्ञानिक आकलन पर आधारित था.
बाघों का क्षेत्र संरक्षित इलाकों से बाहर
राज्य में बाघों का फैलाव केवल टाइगर रिजर्व तक सीमित नहीं है. 2022 की NTCA रिपोर्ट में बताया गया कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ ऐसे वन क्षेत्रों में भी बाघों की मौजूदगी बढ़ी, जहां 2018 में बाघ नहीं पाए गए थे. इसका मतलब यह है कि बाघों का क्षेत्र संरक्षित इलाकों से बाहर आसपास के जंगलों और वन क्षेत्रों तक भी फैल रहा है. हालांकि इस विस्तार के साथ इंसान-बाघ संघर्ष जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है.
“Tiger State” के रूप में एमपी बना चुका है पहचान
मध्य प्रदेश की पहचान सिर्फ बाघों की संख्या तक सीमित नहीं है. यहां बाघों के अलावा तेंदुआ, जंगली कुत्ता, भालू, गौर, सांभर, चीतल और कई अन्य वन्यजीव भी पाए जाते हैं. बड़े वन क्षेत्र और संरक्षित इलाकों का नेटवर्क मध्य भारत के वन्यजीव परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है. NTCA के एक आधिकारिक प्रकाशन में भी मध्य प्रदेश को “Tiger State” के रूप में उल्लेखित किया गया है.
