मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने फोटो को हटाने का लिया फैसला, बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी कि 20, 100, 500, और 1,000 टाका के नए नोटों की छपाई शुरू हो चुकी है. इन नोटों में जुलाई 2023 में हुए छात्र आंदोलन की झलक दिखाई जाएगी.
Source : MEDIA
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Bangladesh violence: बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. शेख हसीना की सत्ता के तख्तापलट के बाद देश में अशांति का माहौल बना हुआ है. ढाका में लोगों का हुजूम सड़कों पर उतर पड़ा और पीएम आवास समेत कई इमारतों में तोड़फोड़ हुई है. तस्वीरों में प्रधानमंत्री कार्यालय से लोगों को सामान उठाकर ले जाते हुए भी देखा गया है. जबकि प्रदर्शनकारी आवास में सोफ़ों पर बैठे और सेल्फ़ी लेते नज़र आए. इस बीच बांग्लादेश ने अपनी करेंसी नोटों से पूर्व राष्ट्रपति और देश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीरें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
टाका के नए नोटों की छपाई शुरू
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश (Bangladesh currency notes) के केंद्रीय बैंक ने जुलाई में हुए विद्रोह की विशेषताओं वाले नए नोट छापना शुरू कर दिया है, जो हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ छात्रों द्वारा किए गए आरक्षण विरोधी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था. बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी कि 20, 100, 500, और 1,000 टाका के नए नोटों की छपाई शुरू हो चुकी है. इन नोटों में जुलाई 2023 में हुए छात्र आंदोलन की झलक दिखाई जाएगी. यह वही आंदोलन था जिसने शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था. देश में तैयार किए जा रहे नए नोट में धार्मिक संरचनाओं, बंगाली परंपराओं, और आंदोलन के दौरान बनाए गए ग्रैफिटी को शामिल किया जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पर बांग्लादेश बैंक की कार्यकारी निदेशक हुशनारा शिखा ने कहा कि नए नोट अगले छह महीनों में बाजार में आ जाएंगे. बता दें कि बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय ने सितंबर में नए नोटों के लिए विस्तृत डिज़ाइन प्रस्ताव पेश किया था.
मुजीबुर्रहमान की प्रतिमाओं पर भी हमला
जुलाई के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुजीबुर्रहमान की प्रतिमाओं और छवियों को निशाना बनाया. उनकी मूर्तियों को तोड़ा गया, और उनकी छवि वाले अन्य सार्वजनिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचाया गया.
यूनुस ने क्यों लिया फैसला
यूनुस सरकार के इस फैसले पर आलोचकों का कहना है कि ये मुजीबुर्रहमान और उनके आंदोलन की उस विरासत को कमजोर करने की कोशिश है, जिससे देश को आजादी मिली. इसे मुजीब की बेटी शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लोग को भी कमजोर करने की कोशिश की तरह देखा जा रहा है. ये एक तरह से बांग्लादेशी लोगों के दिल-दिमाग से शेख हसीना के परिवार को दूर करने की कोशिश है.
यूनुस के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार के सत्ता में आने के बाद से मुजीबुर्रहमान के कई प्रतीकों को हटाया गया है. राष्ट्रपति भवन से उनकी तस्वीर हटा दी गई है. शेख मुजीब से जुड़ी छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं. विरोध प्रदर्शनों में उनकी मूर्तियों को गिराया गया है और दीवारों पर बनी उनकी तस्वीरों को बिगाड़ दिया गया है. इस कड़ी में अब नए नोटों से भी उनकी तस्वीर को हटाया जाएगा.
भारतीय साड़ी जलाकर बॉयकॉट की अपील
वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) लीडर रूहुल कबीर रिजवी ने अपनी पत्नी की भारतीय साड़ी जलाकर भारत के खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्होंने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से सभी भारतीय प्रोडेक्ट के बॉयकॉट की अपील की. रिजवी का यह प्रदर्शन अगरतला में ढाका कमीशन में हुई घुसपैठ के खिलाफ था.
रिजवी ने साड़ी के साथ साबुन, टूथपेस्ट से लेकर मिर्च और पपीता तक हर भारतीय प्रोडेक्ट का बॉयकॉट करने की अपील की. उन्होंने कहा- भले ही हम दिन में एक बार खाना खाएं, लेकिन हम मजबूती से खड़े होंगे और आत्मनिर्भर रहेंगे. रिजवी ने भारतीय मीडिया पर गलत खबरें फैलाने का भी आरोप लगाया.
मुजीब से जुड़ी कई निशानियों पर हमला
अगस्त 2024 को बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से लगातार शेख मुजीब की जुड़ी निशानियों पर हमला किया जा रहा है. ढाका में उनकी मूर्ति को तोड़ा गया और कई सार्वजनिक स्थानों पर लगी नेमप्लेट को भी हटाया गया. अंतरिम सरकार ने आजादी और संस्थापक से जुड़े दिनों की 8 सरकारी छुट्टियां भी कैंसिल कर दी थी.
शेख मुजीबुर्रहमान बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति
शेख मुजीबुर्रहमान बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति थे. वह 17 अप्रैल 1971 से लेकर 15 अगस्त 1975 तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे थे. उन्होंने बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी. 15 अगस्त 1975 को शेख मुजीबुर्रहमान की उनके घर पर ही हत्या कर दी गई थी.
