सेना मुख्यालय पर हमला मामले में इमरान के खिलाफ अभियोग तय, बुशरा के विरुद्ध जारी हुआ नया गिरफ्तारी वारंट
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Pakistan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए सत्ता और सेना से टकराव मोल लेना महंगा साबित होता जा रहा है. उधर इस्लामाबाद की एक अदालत ने गुरुवार को इमरान की पत्नी बुशरा बीबी के विरुद्ध नया गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ 14 नए मामले दर्ज किए हैं. इसके साथ ही इस्लामाबाद में इमरान के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या बढ़कर 76 हो गई है. दरअसल, इमरान ने जेल से संदेश जारी कर समर्थकों से देशभर में विरोध प्रदर्शन करने के लिए कहा था. इसके बाद 24 नवंबर को इस्लामाबाद के डी-चौक पर प्रदर्शन हुए. यह हिंसक हो गया और 7 लोगों की मौत हो गई. इनमें 4 प्रदर्शनकारी और 3 पुलिसकर्मी शामिल थे.
इमरान ने स्वयं को निर्दोष बताया
रावपिंडी स्थित अदियाला जेल में आतंकवादी कोर्ट (एटीसी) न्यायाधीश अमजद अली शाह की अदालत ने गुरुवार को इसी जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान और अलावा पूर्व गृह मंत्री शेख राशिद, पूर्व प्रांतीय कानून मंत्री राजा बहारत और विपक्ष के वर्तमान नेता उमर अयूब समेत पीटीआई के कुछ अन्य नेताओं के विरुद्ध जनरल मुख्यालय (जीएचक्यू) पर हमला मामले में अभियोग निर्धारित कर दिया. अपने विरुद्ध आरोप सुनाए जाने के बाद इमरान ने स्वयं को निर्दोष बताया.
14 साल की जेल की सजा सुनाई गई
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को भ्रष्टाचार के एक मामले में 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई है, जो उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की श्रृंखला में नवीनतम मामला है. क्रिकेट स्टार से राजनेता बने इस शख्स को अगस्त 2023 से हिरासत में रखा गया है और यह अब तक की सबसे लंबी वैध जेल की सजा है. उन पर 100 से अधिक मामलों में आरोप लगे हैं, जिनमें राज्य के रहस्यों को लीक करने से लेकर राज्य के उपहार बेचने तक के आरोप शामिल हैं और उन्होंने इन सभी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है.
देश में अतीत में भी बड़े वित्तीय घोटाले हुए
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस ताजा मामले को देश में अब तक का सबसे बड़ा मामला बताया है, हालांकि देश में अतीत में भी बड़े वित्तीय घोटाले हुए हैं, जिनमें से कुछ में पूर्व नेता भी शामिल थे. खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी पर अल-कादिर ट्रस्ट के माध्यम से एक रियल एस्टेट टाइकून से रिश्वत के रूप में जमीन का एक टुकड़ा प्राप्त करने का आरोप लगाया गया था, जिसे इस दंपति ने खान के कार्यकाल के दौरान स्थापित किया था.
जांचकर्ताओं ने बताया कि इसके बदले में, खान ने ब्रिटेन की राष्ट्रीय अपराध एजेंसी द्वारा वापस भेजे गए 190 मिलियन पाउंड (232 मिलियन डॉलर) का इस्तेमाल अरबपति के अदालती जुर्माने का भुगतान करने के लिए किया.
आध्यात्मिक शिक्षा केंद्र ट्रस्ट का दान निजी लाभ लिया
खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने तर्क दिया कि यह जमीन एक आध्यात्मिक शिक्षा केंद्र के लिए ट्रस्ट को दान में दी गई थी और इसका इस्तेमाल खान के निजी लाभ के लिए नहीं किया गया था. सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में, पीटीआई अध्यक्ष गोहर अली खान ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने “कोई गलती नहीं की है” और यह “राजनीतिक रूप से प्रेरित अनुचित मुकदमा” था. उन्होंने लिखा, “लेकिन इमरान खान हार नहीं मानेंगे, वह पीछे नहीं हटेंगे, वह टूटेंगे नहीं.”
न तो कोई समझौता करेंगे और न ही कोई राहत मांगेंगे
शुक्रवार का फैसला कई बार देरी के बाद आया है क्योंकि खान की पार्टी ने सरकार के साथ बातचीत की थी. शुक्रवार को दोषी ठहराए जाने के बाद, खान ने अदालत कक्ष में पत्रकारों से कहा कि वह “न तो कोई समझौता करेंगे और न ही कोई राहत मांगेंगे.” खान को 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई है, जो इस मामले में दी जा सकने वाली अधिकतम सजा है. उन पर 4,000 पाउंड से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है.
उनकी पत्नी को सात साल की जेल और 2,000 पाउंड से अधिक का जुर्माना लगाया गया है. बीबी, जो पिछले अक्टूबर से जमानत पर बाहर थीं, सजा सुनाए जाने के बाद अदालत में हिरासत में ले ली गईं.
2023 में भी खान को सुनाई जा चुकी है सजा
2023 में, खान को अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त उपहारों को बेचकर अर्जित धन की घोषणा न करने के लिए तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. पिछले साल, खान को राजकीय उपहारों की बिक्री के आरोप में 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, और राजकीय रहस्यों को लीक करने के आरोप में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, कुछ महीनों बाद इन दोनों सजाओं को निलंबित कर दिया गया था.
जेल में होने और सार्वजनिक पद संभालने पर प्रतिबंध लगने के बावजूद, खान का पाकिस्तान के राजनीतिक परिदृश्य पर अब भी गहरा प्रभाव है. पिछले साल के चुनाव में इमरान खान समर्थित उम्मीदवारों ने सभी पार्टियों में सबसे अधिक सीटें जीतीं.
