X Latest News: ब्राजील में कानूनी प्रतिनिधि की नियुक्ति में विफल रहने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में टि्वटर) को सस्पेंड कर दिया गया है
Source : MEDIA
By : DB News Update| Edited By: Supriya
Brazilian Judge Suspends X: टेस्ला और स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क को तब बड़ा झटका लगा, जब उनके मालिकाना हक वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को ब्राजील में सस्पेंड कर दिया गया. लंबे विवाद के बाद एक्स के खिलाफ यह फैसला ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के जज अलेक्जेंड्रे डी मोरेस ने दिया, जिस पर एलन मस्क बुरी तरह भड़के हैं.
आगबबूला हैं एलन मस्क
एलन मस्क इतना आगबबूला हो उठे कि उन्होंने एक्स को सस्पेंड किए जाने का आदेश देने वाले जज को तानाशाह तक कह दिया. एलन मस्क ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा, “दुनिया भर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़े पैमाने पर हमला किया जा रहा है. अलेक्जेंड्रे डी मोरेस एक तानाशाह हैं, जो जज की भूमिका निभा रहे हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र का आधार होती है. ब्राजील के जज को जनता ने नहीं चुना, वो राजनीतिक दबाव की वजह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बर्बाद कर रहे हैं.”
X सस्पेंड किए जाने की वजह क्या है?
दरअसल, जज अलेक्जेंड्रे डी मोरेस ने बीते बुधवार (28 अगस्त) को एलन मस्क से ब्राजील में X के कानूनी प्रतिनिधि (Legal Representative) का नाम बताने को कहा था, जिसे लेकर एलन मस्क को चेतावनी भी दी गई थी कि अगर वो कानूनी प्रतिनिधि का नाम बताने में विफल रहते हैं तो अगले 24 घंटे में बड़ा फैसला लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को सस्पेंड कर दिया जाएगा.
स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे हैं- मस्क
एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर आरोप लगाया है कि भारत में कुछ बड़े कारोबारी और ‘ऑलिगार्च’ (सत्ता और पूंजी रखने वाले लोग) अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे हैं. एलन मस्क ने ताजा पोस्ट में उद्योगपति मुकेश अंबानी को प्रधानमंत्री कहकर हमला बोला है.
तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद का पलटवार
इस सब के बीच तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद सायोनी घोष ने पलटवार करते हुए एलन मस्क को करारा जवाब दिया है. सायोनी घोष ने लिखा है कि भारत के लोग ही भारत के असली मालिक हैं और हम, इस महान देश के लोग, किसी भी ‘चाचा चौधरी’ या ऐरे-गैरे कोजो हजोरों मील दूर बैठकर हमें यह बताए कि देश कैसे चलाना है. ऐसा करने की इजाज़त नहीं देंगे.
सायोनी घोष ने लिखा है कि सुनिए एलन मस्क, आप अपना बिज़नेस नेटवर्क बढ़ाना चाहते हैं, तो ठीक है, लेकिन हममें से किसी को भी नीचा दिखाने की कोशिश करके हद पार न करें. भारत और भारतीय अपनी मेहनत से आगे बढ़े हैं और आने वाली पीढ़ियों तक आपके बिना भी काम चला सकते हैं. और जहां तक हमारे अंदरूनी मामलों की बात है, तो मिस्टर, बस दूर रहिए! P.S. आज महालया है (इसके बारे में गूगल पर देख लें)। संक्षेप में कहें तो, देवी दुर्गा ने अभी-अभी नाश्ते में कुछ राक्षसों का काम तमाम किया है! सायोनी घोष ने जय हिंद और भारत माता की जय के साथ अपनी बात खत्म की है.
सरकार की ओर से आने वाली सेंसरशिप को नहीं छुपाया जाएगा- मस्क
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के मालिक एलन मस्क ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐलान किया है कि अब सरकार की ओर से आने वाली किसी भी सेंसरशिप को छुपाया नहीं जाएगा. एक्स अब सरकारी टेकडाउन रिक्वेस्ट और कंटेंट हटाने की मांगों को सीधे यूजर को बताएगा करेगा. अब अगर कोई सरकारी विभाग एक्स से किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट को बैन करने की मांग की तो प्लेटफॉर्म उस कार्रवाई को साफ तौर पर बताएगा. यूजर्स को यह भी बताया जाएगा कि किस सरकारी एजेंसी ने कार्रवाई की मांग की. इसके पीछे कौन सा कानूनी आधार या वजह बताई गई है.
एलन मस्क ने ऐलान किया है कि अगर किसी सरकार या सरकारी एजेंसी के कहने पर कोई कंटेंट हटाया जाता है या किसी अकाउंट पर रोक लगाई जाती है, तो एक्स इस बात की जानकारी उस यूजर्स को देगा. किसी पोस्ट की रीच कम हुई या उसे हटाया गया, तो यूजर्स के लिए इसे आसानी से समझ पाएगा. आसान होगा कि फैसला एक्स ने अपनी नीति के तहत लिया है या फिर किसी सरकार के दबाव या कानूनी आदेश के बाद कार्रवाई हुई है.
सरकार और फ्री स्पीच की बहस
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकारों के आदेशों का पालन करने और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन बनाने का दबाव है. एक्स को यूरोपीय संघ, भारत, तुर्की समेत कई देशों में अलग-अलग डिजिटल कानूनों का पालन करना पड़ता है. सरकारों की ओर से आने वाले कंटेंट हटाने के आदेशों की गिनती भी काफी ज्यादा है.
एक्स आमतौर पर स्थानीय कानूनों का पालन करता है. ऐसा नहीं करने पर कंपनी को भारी जुर्माने या किसी देश में प्लेटफॉर्म पर बैन जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
अब सरकार की मांग छिपी नहीं रहेगी?
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर साफ दिख सकता है. पहले किसी पोस्ट को किसी खास देश में ब्लॉक किए जाने पर यूजर को हमेशा यह साफ तौर पर पता नहीं चलता था कि इसके पीछे सरकारी आदेश है या एक्स की अपनी मॉडरेशन नीति.
अब एक्स इसे ज्यादा खुला बनाने की कोशिश कर रहा है. समर्थकों का कहना है कि इससे लोगों को पता चलेगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रोकने के पीछे असल में कौन है. हालांकि आलोचकों का सवाल है कि सिर्फ सरकारी आदेश पर लेबल लगा देना काफी है या एक्स को ऐसे आदेशों का ज्यादा मजबूती से विरोध भी करना चाहिए?
कुल मिलाकर, एक्स का नया कदम सोशल मीडिया पर सरकारी सेंसरशिप और फ्री स्पीच की बहस को और तेज कर सकता है. अब यूजर्स के सामने यह ज्यादा साफ हो सकेगा कि उनकी स्क्रीन से कोई कंटेंट गायब होने के पीछे प्लेटफॉर्म की नीति है या किसी सरकार का आदेश.
