मध्य प्रदेश जबलपुर का एक ऐसा मंदिर है जिसकी स्थापना अंग्रेजों के शासन काल में हुआ था, अब पाटबाबा के नाम से विख्यात है यह मंदिर
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Paat Baba Mandir Jabalpur: हिंदू परंपरा से जुड़े लोगों में भगवान के प्रति अगाध प्रेम होता है, जिसके कारण पत्थर की मूर्ति में भगवान के भाव प्रकट होते हैं. लेकिन आपने कभी यह कल्पना नहीं की होगी कि अंग्रेजों को हनुमान जी महाराज ने सपने में दर्शन दिया था. ऐसा ही आश्चर्य चकित करने वाली घटना आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे. दरअसल हमारे भारत देश में अंग्रेजों का 200 साल तक शासन रहा. अंग्रेज हिंदू धर्म के देवी-देवताओं से नफरत करते थे. क्योंकि अंग्रेज क्रिश्चन धर्म को मानने वाले थे. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश जबलपुर में अंग्रेज ने हनुमान जी महाराज के मंदिर का निर्माण कराया था और वह स्थान देश भर में पाटबाबा मंदिर के नाम से विख्यात हो गया है. यह मंदिर मध्य प्रदेश जबलपुर में गन गैरिज फैक्ट्री के पास स्थित है, उसकी स्थापना अंग्रेजी शासन काल 1903 में कराया गया था.
इस कारण मंदिर की हुई स्थापना
बताया जा रहा है कि भारत के स्टेट मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में पाटबाबा मंदिर की नीव अंग्रेजी शासन काल में रखी गई थी. इसका निर्माण 12 अगस्त 1903 को अंग्रेज शासन के एक अिधकारी ने शुरू कराया था. ऐसी मान्यता है कि भगवान हनुमान जी महाराज आज भी गन गैरिज फैक्ट्री की रक्षा कर रहे हैं. इस मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना करने पहुंच रहे हैं और अपनी ईच्छा पूर्ति की कामना कर रहे हैं.
ऐसा है घटनाक्रम
जबलपुर पाट बाबा मंदिर की स्थापना के पीछे एक रहस्य छिपा है. बताया जाता है कि जब गन गैरिज फैक्ट्री के निर्माण हो रहा था, उस समय आए दिन कोई न कोई समस्या बनी रहती थी, उन समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से पाटबाबा मंदिर की नीव रखी गई थी. बताया जा रहा है कि हनुमान जी महाराज ने ही गन गैरिज फैक्ट्री के निर्माण में मदद की थी. दरअसल अंग्रेज अधिकारी स्मिथ एमपी के जबलपुर में बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन करना चाहता था और इसके लिए एक कारखाना बनाना चाहता था. लेकिन जब कारखाने का निर्माण शुरू हुआ और कारखाने की दीवार बनना प्रारंभ हुईं तो दिन में जितनी दीवार बनाई जाती थी, वह रात को अपने अाप गिर जाया करती थी. यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा. इस घटना से स्मिथ परेशान हो गया. इसी दाैरान एक रात अंग्रेज स्मिथ को गहरी नींद में सपना आया और सपने में हनुमान जी महाराज ने बतया कि कारखाने के पास एक मूर्ति है. जो जमीन के नीचे दबी हुई है. अगले दिन अंग्रेज स्मिथ ने कारखाने के चारों तरफ खुदाई कराई. खुदाई के दौरान उसे हनुमान जी को वह मूर्ति मिल गई. उसी समय हनुमानजी की मूर्ति को लाल कपड़े में लपेट दिया गया और स्मिथ के द्वारा 1903 में उस मूर्ति स्थापना के लिए मंदिर का निर्माण शुरू कराया गया. अंतत: हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना हुई और वह स्थान अब पाटबाबा के नाम से देश भर में प्रसिद्ध हो गया है. मूर्ति स्थापना के साथ ही कारखाने का निर्माण भी निर्बाध रूप से संपन्न हो गया. वही कारखाना आज गन गैरिज फैक्ट्री के नाम से जाना जाता है.
पाटबाबा के नाम से क्यों प्रसिद्ध हुआ स्थान
बताया जाता है कि हनुमानजी महाराज को अंग्रेज स्मिथ ने लाल कपड़े में लपेट दिया था. जिसके कारण पुजारी को लंका दहन का दृश्य स्मरण में आ गया. क्योंकि हनुमानजी की पूँछ पर राक्षसों ने कपड़ा बांधकर तेल और घी डालकर आग लगा दी थी. इसका वर्णन रामचरित मानस में भी है. जिसमें उल्लेख है कि-
“कपि के ममता पूँछ पर, सबहि कहउँ समुझाई’ -रावण के दरबार में जब हनुमान जी की पूंछ पर आग लगाने का निर्णय हुआ, तब एक राक्षस ने कहा, “देखो! वानरों को अपनी पूंछ से बहुत लगाव होता है.’
“तेल बोरि पट बाँधि पुनि, पावक देहु लगाई’- इसलिए सब लोग मिलकर इनकी पूंछ को तेल में डुबोकर, कपड़े से लपेटकर इसमें आग लगा दो.
जब राक्षसों ने ऐसा किया, तो हनुमान जी ने अपनी पूँछ को इतना लंबा कर लिया कि लंका में कपड़े और घी-तेल की कमी पड़ गई. इसके बाद, हनुमान जी ने उसी जलती हुई पूंछ से पूरी लंका को जलाकर भस्म कर दिया.
इसी दृश्य को याद करते हुए हनुमानजी महाराज के इस स्थान का नाम पाटबाबा रखा गया.
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