चातुर्मास के 4 महीने शुभ कार्य वर्जित रहते हैं. ऐसे में चातुर्मास इस साल कब से शुरू हो रहा है इसके अलावा चातुर्मास के बाद शादी की शहनाई कब बजेगी.
Source : DB News Update
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shadi Muhurat 2025: देवशयनी एकादशी से चार माह तक शुभ कार्यों पर पाबंदी लग जाएगी. ये चार माह ही चातुर्मास के रूप में जाने जाते हैं, इस दौरान मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है. दरअसल ये देवताओं का शयनकाल समय होता है. इसी के चलते जगत के पालनहार पाताल में निवास करते हैं.
मान्यता है कि चातुर्मास के दिनों में अगर शुभ कार्यों को किया जाए तो सफलता हासिल नहीं होती है और जीवनभर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वर्ष 2025 में चातुर्मास कब खत्म हो रहा है. चातुर्मास के बाद विवाह के कितने और कब-कब मुहूर्त हैं? यह सब जानने के लिए पढ़े ये आलेख…
कब से शुरू हो रहा चातुर्मास 2025
इस साल चातुर्मास की शुरुआत 6 जुलाई से होगी, जिसके बाद चार महीने तक चातुर्मास ही रहेगा. फिर 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी पर चातुर्मास की समाप्ति के साथ सभी शुभ-मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे.
मांगलिक कार्य कब शुरू होंगे ?
चातुर्मास 1 नवंबर को समाप्त होंगे और इसके अगले दिन 2 नवंबर 2025 को तुलसी विवाह के दिन से शादी की शहनाई बजना शुरू हो जाएगी. तुलसी विवाह के दिन विवाह करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है.
चातुर्मास में क्यों नहीं करते विवाह ?
चातुर्मास में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश न होने के कई कारण है. दरअसल इस दौरान विष्णु जी योग निद्रा में रहकर विश्राम करते हैं. शुभ कार्य में जगत के पालनहार का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है. इसलिए चातुर्मास में शुभ काम करना अच्छा नहीं माना जाता. वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दौरान ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं रहती है. गुरु या शुक्र का अस्त काल रहता है. ये ग्रह वैवाहिक जीवन और सुख-समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं, इनके उदय के बिना विवाह करने पर वैवाहिक जीवन सफल नहीं होता.
नवंबर 2025 में विवाह मुहूर्त
नवंबर में 2, 3, 6, 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 नवंबर का दिन विवाह आदि कार्यों के लिए शुभ रहेगा.
दिसंबर 2025 के विवाह मुहूर्त
दिसंबर में 4, 5 और 6 दिसंबर को विवाह के लिए शुभ योग बन रहा है. इन दिनों को विवाह के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है.
चातुर्मास में आते हैं ये व्रत-त्योहार
चातुर्मास के दौरान पूजा-पाठ, जप, तप, दान, व्रत, कथा श्रवण और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है, इस समय विवाह जैसे मांगलिक संस्कारों से परहेज करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, मान्यता है कि भगवान विष्णु के पुनः जागृत होने के बाद ही शुभ कार्यों का आरंभ करना अधिक फलदायी माना जाता है, धर्मशास्त्रों के अनुसार चातुर्मास के चार महीने भगवान विष्णु की आराधना, आत्मचिंतन और संयम के लिए सबसे श्रेष्ठ माने जाते हैं, इस दौरान कई बड़े व्रत और पर्व भी आते हैं, जिनमें श्रावण मास, हरियाली तीज, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, पितृ पक्ष, शारदीय नवरात्र और दीपावली जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं,
व्यापार के लिए शुभ है समय
अक्सर देखा गया है कि चातुर्मास के दौरान खरीद-बिक्री पर काेई असर नहीं पड़ेगा. रवि पुष्य याेग पड़ रहा हैं. इसे खरीदारी के लिहाज से श्रेष्ठ माना गया है. चातुर्मास विशेष रूप से देवताओं का शयनकाल हाेता हैं. इसी के बीच जुलाई से सावन मास शुरू हाेगा. नवरात्रि और दीपावली जैसे कई महत्वपूर्ण त्याेहार भी इसी दाैरान पड़ेंगे. यह अवसर खरीददारी करने के लिए अच्छा है. यह समय व्यापारियों के लिए शुभ माना गया है.
शादी-विवाह के लिए ग्रह-नक्षत्र का अध्ययन
शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए ग्रह-नक्षत्रों और सितारों की स्थितियों का अध्ययन किया जाता है, विवाह और सभी शुभ कार्य में गुरु और शुक्र ग्रह की चाल की स्थिति का भी आकलन किया जाता है. तभी विवाह मुहूर्त निश्चित किए जाते हैं. शुक्र और गुरु ग्रह दोनों ही तारे अस्त हैं तो उस स्थिति में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं निकलता है, दोनों के उदय होने पर ही विवाह और शुभ कार्य जैसे मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं.
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