नहाए खाए के साथ छठ की शुरुआत हो चुकी है. आज 26 अक्टूबर 2025, रविवार को खरना है. खरना पर पंचांग क्या कहता है? इस दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाया जाता है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Chhath Puja 2025 Kharna: आज से नहाए खाए के साथ छठ की शुरुआत हो चुकी है. आज 26 अक्टूबर 2025, रविवार को खरना है. कल नहाए खाए था. हिंदू पंचांग के अनुसार आज कार्तिक शुक्ल पंचमी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र, बवकरण, शोभन योग के साथ वृश्चिक राशि में चंद्रमा विराजमान हैं. आज व्रती महिलाएं पूरे दिन उपवास में रहकर शाम के समय छठी मैया की पूजा करने के बाद गुड़ खीर और रोटी का भोज लगाएंगी.
महिलाओं के लिए कौन सा रंग होता है शुभ?
छठ पूजा में महिलाओं के लिए लाल रंग अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है. यह रंग सौभाग्य, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है. हिंदू परंपरा के अनुसार, व्रती महिलाएं लाल, केसरिया या नारंगी रंग की साड़ी पहनकर सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करती हैं, जिससे आशीर्वाद और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
खरना पूजा के लिए आज शुभ मुहूर्त
छठ महापर्व के दूसरे दिन आज खरना पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 41 मिनट से लेकर 7 बजे तक है. छठी मैया की पूजा और गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद अर्पण किया जाएगा, इसके लिए 1 घंटे 19 मिनट का समय बेहद शुभ है.
शुद्धता से बनाया जाता है खरना
रसिया को पूरी तरह से मिट्टी के नए चूल्हे पर या पूरी तरह से साफ-सुथरे चूल्हे पर बनाया जाता है. इसे बनाने में केवल आम की लकड़ी का ही इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जाता है. इसमें नए अरवा चावल, शुद्ध गुड़ और गाय के दूध का उपयोग होता है. चीनी की जगह गुड़ का उपयोग इसकी शुद्धता और सात्विकता को और बढ़ा देता है. खरना का प्रसाद ग्रहण करते समय पूरी तरह से सन्नाटा होना अनिवार्य माना जाता है. यदि प्रसाद खाते समय कोई बाहरी आवाज या शोर होता है, तो व्रती वहीं भोजन करना रोक देते हैं.
खरना का संपूर्ण महाप्रसाद
खरना पूजा के भोग में रसिया के अलावा मुख्य रूप से गेहूं के आटे से बनी बिना नमक की रोटियां (या सादी पूरियां) बनाई जाती हैं, जिन पर शुद्ध देसी घी लगाया जाता है. इन्हें रसिया के साथ ही खाया जाता है. खरना के प्रसाद में पके हुए केले का होना अनिवार्य माना जाता है. इसे छठी मैया और सूर्य देव को अर्पित करने के बाद व्रती ग्रहण करते हैं. ऋतु के अनुसार उपलब्ध फल जैसे सेब, संतरा, और पानी फल (सिंघाड़ा) भी थाली में सजाए जाते हैं. पूजा के दौरान देवी-देवताओं के आदर में पान के पत्ते और साबुत सुपारी चढ़ाई जाती है. पूजा के संकल्प और तिलक के लिए नए अरवा चावल (अक्षत) और शुद्ध चंदन का उपयोग होता है.
छठ मईया गीत (Chhati Maiya Geet):
ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
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