Bhopal News : मंत्रि परिषद की बैठक में लिया गया है निर्णय, 1,320 करोड़ राशि की सिंचाई परियोजना भी स्वीकृत
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Bhopal. मध्य प्रदेश में जल्द साइबर तहसील में नई भर्ती के द्वार खुल सकते हैं. क्योंकि भोपाल में आयोजित कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में निर्णय लिया गया है कि जल्द साइबर तहसील का विस्तार किया जाएगा. इसके लिए पूरे प्रदेश में 619 नए पद भरे जाएंगे. तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सहायक ग्रेड-3 के कर्मचारियों का चयन किया जाना है. आज (20 अगस्त) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में आयोजित हुई, जिसमें सिंचाई परियोजना समेत कई महत्वपूर्ण कार्यों को स्वीकृति दी गई है.
1320 करोड़ से सिंगरौली में सिचाई परियोजना को मंजूरी
मंत्रि-परिषद द्वारा सिंगरौली जिले की चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिये 1320.14 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत परियोजना से सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील के 132 ग्राम एवं देवसर तहसील के 10 ग्राम लाभान्वित होंगे।
साइबर तहसील के लिए पद स्वीकृत
साइबर तहसील परियोजना के लिये पूरे प्रदेश में विस्तार के लिए तहसीलदार संवर्ग के जिलों हेतु स्वीकृत 619 पदों में से तहसीलदार के 10 पद, प्रतिनियुक्ति हेतु रक्षित नायब तहसीलदारों के 55 पदों में से 15 पद और 03 सहायक वर्ग-3 श्रेणी के कर्मचारियों को पद सहित प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में साइबर तहसील के लिए अंतरित करने की स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार 02 भृत्य को आउटसोर्स से नियुक्त किये जाने की स्वीकृति दी गई।
मिशन शक्ति अंतर्गत 364 पदों की स्वीकृति
प्रत्येक जिला हब में जिला मिशन समन्वयक-01, जेंडर स्पेशलिस्ट-02, वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ 01, एकाउंट असिस्टेंट-01, आईटी असिस्टेंट-01 तथा एम. टी.एस-01 के पदों की स्वीकृति दी गई। इस प्रकार प्रदेश के सभी जिला हब को मिलाकर कुल 364 पदों की स्वीकृति दी गयी। स्वीकृत पदों की पूर्ति निधारित प्रक्रिया अनुसार किये जाने हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग को अधिकृत किया गया है।
साइबर तहसील 2.0 का विस्तार
इसके तहत अब पूरी जमीन (सम्पूर्ण खसरा) के साथ-साथ आंशिक खसरा यानी भूमि के हिस्से की बिक्री से जुड़े नामांतरण मामलों को भी इस डिजिटल व्यवस्था में शामिल कर लिया गया है. इस आधुनिक डिजिटल प्रणाली से जमीन के अविवादित नामांतरण की प्रक्रिया तेज हुई है, जिससे काम अब मात्र 15 से 20 दिनों के भीतर पारदर्शी तरीके से पूरे हो रहे हैं. नागरिकों को अलग से आवेदन करने या तहसील कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होती है. अंतिम आदेश की प्रमाणित प्रति ईमेल या व्हाट्सएप के जरिए भेज दी जाती है. यह डिजिटल सेवा राज्य के सभी जिलों और तहसीलों में राजस्व अदालतों के साथ एकीकृत रूप से कार्य कर रही है, जिससे नागरिकों को घर बैठे सुगमता मिल रही है.
जहां केस नहीं चल रहे वहां पहले शुरू होगी प्रक्रिया
पहले चरण में यह प्रक्रिया केवल ऐसे मामलों में लागू की जाएगी जहां प्रॉपर्टी को लेकर कोई केस नहीं चल रहा और जहां बिक्री पूरे प्लॉट के लिए है।.बाद में, इसे सभी प्रकार के विवादित हस्तांतरणों और विभाजनों तक बढ़ाया जाएगा. साइबर तहसील प्रणाली के लागू होने से राज्य सरकार के कुशल और कागज रहित शासन के लक्ष्य को और आगे बढ़ावा मिलेगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा. अमित शाह ने सीएम मोहन यादव के नए साल को सेलिब्रेट करने के साथ ही साइबर तहसील को लॉन्च करने की रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लिया है.
कृषि के लिए पट्टे पर दी भूमि बेच सकेंगे
कृषि उपयोग के लिए पट्टे पर दी गई भूमि को अब बेचा जा सकेगा, भू-राजस्व संहिता के संशोधन में ये प्रस्तावित किया जा रहा है. ज्ञात हो कि पट्टा मिलने के दस साल बाद भूमिस्वामी अधिकार मिल जाता है. इस अवधि से पहले भूमि का अंतरण हो सकता है लेकिन पूर्व कलेक्टर की अनुमति से. हालांकि कुछ मामलों में प्रविधान के विपरीत जाकर भी भूमि का अंतरण हो चुका है. ऐसे में क्रेता से भूमि के बाजार मूल्य 5 प्रतिशत राशि को लेकर विधिमान्य किया जाएगा. इससे पट्टे की भूमि जिस पर भूस्वामी का अधिकार है उसके अंतरण का रास्ता भी खुल जाएगा.
रजिस्ट्री होते ही डाटा रेवेन्यू पोर्टल पर ट्रांसफर
रजिस्ट्री होने के तुरंत बाद रजिस्ट्री डाटा रेवेन्यू पोर्टल पर ट्रान्सफर कर दिया जाता है. इसके बाद क्रेता-विक्रेता को एस. एम. एस. से सूचना भेजने के साथ संबंधित ग्रामवासियों को एसएमएस से सूचना दी जाती है. पटवारी रिपोर्ट भी ऑनलाइन प्राप्त हो जाती है. इसके बाद केस फिट होने पर नामांतरण आदेश पारित कर दिया जाता है. आदेश पारित होने के तुरंत बाद भू-अभिलेख अद्यतन कर दिया जाता है और संबंधित को ई-मेल व्हाट्सएप पर नामांतरण आदेश भेज दिया जाता है.
