गर्भगृह पर भगवान शंकर का आवाहन करने के पश्चात शिव स्वरूप और चरण पादुका पालकी में देंगे दर्शन
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur News : संस्कारधानी जाबालिपुरम् का भ्रमण करने के लिए श्रीरामेश्वरम के उपलिंग गुप्तेश्वर महादेव निकलेंगे. गुप्तेश्वर महादेव से जुड़े भक्त और संत-महात्मा गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में एकत्रित होंगे और भगवान शंकर का आवाहन करेंगे. उन्हें पालकी में बैठाकर भ्रमण कराया जाएगा. भगवान भोलेनाथ शहरवासियों को दर्शन देंगे.
श्रद्धालु-भक्तों का भोनेनाथ भी हालचाल जानेंगे. इसी तर्ज पर उज्जैन महाकाल की सवारी हर साल निकाली जाती है. जो अब परंपरा बन चुकी है. गुप्तेश्वर महादेव भी जबलपुर के भक्तों को दर्शन देने के लिए आज 21 जुलाई 2025 को दोपहर 1 बजे निकलेंगे.
गर्भगृह से पालकी में बैठेंगे गुप्तेश्वर महादेव
गुप्तेश्वर महादेव को गर्भगृह से पालकी में बैठने का आवाहन किया जाएगा. जिनकी पूजा अर्चना विद्वत पण्डित-पुरोहितों द्वारा किया जाएगा. भगवान शंकर का स्वरूप और उनकी चरण पादुका पालकी में रखी जाएगी. जिनका दर्शन और पूजन करने का सौभाग्य शहरवासियों को मिलेगा.
संतों के भी होंगे दर्शन
महादेव की शाही सवारी में शहर के संतों-महंतों के भी दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा. गुप्तेश्वरपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी मुकुंददास जी महाराज ने बताया कि शहर के जितने भी साधु-संत हैं, उन्हें शाही सवारी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. शाही सवारी में प्रमुख रूप से जगद्गुरु श्रीरामरंगी द्वाराचार्य श्रीनृसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज, जगद्गुरु स्वामी राघवदेवाचार्य जी महाराज, स्वामी कालिकानंद जी महाराज, स्वामी चैतन्यानंद जी महाराज सहित अन्य संत शामिल रहेंगे.
प्राचीन हैं उपलिंग गुप्तेश्वर महादेव
संस्कारधानी जबलपुर मां नर्मदा की गोद में बसा है. यहां का हर कंकड़ को शंकर माना जाता है. माता रेवा के प्रति अटूट श्रद्धा भगवान श्रीराम में भी थी. तभी तो महर्षि जाबालि की तलाश करते हुए संस्कारधानी आए थे और उन्होंने यहां आकर शिवार्चन किया था. ऐसी मान्यता है कि अपने आराध्य भगवान शिव के पूजन के लिए रेवा तट की रेत से ही शिवलिंग निर्मित कर स्थापित किया था. यही शिवलिंग वर्तमान में गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाने जाते हैं. शिवरात्रि पर इस सिद्ध गुप्तेश्वर शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मन्दिर में श्रद्धालुओं का मेला लगता है.
संस्कारधानी के ये शिव मंदिर भी विख्यात
उपनगरी गढ़ा के देवताल में लघुकाशी के नाम से प्रख्यात एक अनूठा शिवालय है. इसे ऐसे विशिष्ट कोण में बनाया गया है कि सूर्य की प्रथम व अंतिम किरण इस पर अठखेलिया करती हैं. भीतर तांबे का 6 फिट का शिवलिंग स्थापित है. सबसे नीचे द्वादश ज्योर्तिलिंग उसके बाद एकादश रुद्र, नौ देवियां, एक हजार शिवलिंग और शिखर पर अर्द्धनारीश्वर विराजमान हैं. दावा है कि यहां शिवमंत्रोच्चार से रोग दूर करने की अद्भुत क्षमता है.
कुंभेश्वरनाथ भगवान शिव का एक नर्मदा तट पर मंदिर है. जहां एक जिलहरी यानी जलाधारी में दो शिवलिंग विराजमान हैं. यह विश्व में एकमात्र ऐसा शिवालय है. ये शिवलिंग रामेश्वरम-लक्ष्मणेश्वरम के नाम से जाना जाता है. नर्मदापुराण में उल्लेख है कि कुंभेश्वरनाथ में राम, लक्ष्मण से पहले हनुमान ने भगवान शिव की आराधना कर यहां पर प्रकृति का संवर्धन व संरक्षण किया था. यह शिवलिंग स्वयं नर्मदा के अंदर से प्रकट हुआ था.
देवताल तालाब के चारों ओर निर्मित प्राचीन शिव मंदिर जबलपुर शहर के प्रमुख शिवालयों में शुमार हैं. इन शिवालयों की वजह से यह जगह इतनी प्रसिद्ध है कि स्थानीय ही नही बाहरी लोग भी यहां पर आते हैं. यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पूर्व तालाब एवं मंदिरों का निर्माण की जानकारी मिलती है.
बीटी तिराहा, गढ़ा स्थित पचमठा मंदिर है. इस शिवालय में गौरीशंकर-पार्वती की प्राचीन व आकर्षक प्रतिमा के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग भी विराजमान हैं. बताया जा रहा है कि परिसर में कल्चुरीकालीन शिलालेख हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि मन्दिर की कुछ प्रतिमाएं 15वीं और 16 वीं शताब्दी की हैं.
गढ़ा बाजार- देवताल मार्ग पर 150 साल पुराना शिव मंदिर है. संस्कारधानी जबलपुर का यह एक ऐसा शिवालय है, जिसका निर्माण सिर्फ पुष्य नक्षत्र में किया गया था. बताया जाता है कि साल में केवल 12 दिनों के कुछ घंटों में ही निर्माण कार्य होता था. इसके निर्माण में 50 साल का समय लग गया. मंदिर के गर्भगृह में भोलेनाथ अपने गणों के साथ, गणपति रिद्धि सिद्धि के साथ, दक्षिणमुखी हनुमान, मां नर्मदा व भैरव बाबा की मूर्ति है.
भरतीपुर में एक शिव मंदिर है. यहां विशालकाय शिवलिंग विराजमान हैं. यहां 51 फिट का शिवलिंग विराजमान है. बताया जाता है कि 1948 में इस मन्दिर का निर्माण हुआ. 25 वर्ष पूर्व यह शिवलिंग स्थापित किया गया. शुरुआत में यहां शिव-पार्वती की प्रतिमा ही थी. बाद में अन्य प्रतिमाएं विराजित की गईं.
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना संस्कारधानी का यह शिवालय सबसे ज्यादा चर्चित है. यहां हर वक्त श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. जबकि यह मंदिर महज 15 वर्ष पूर्व ही बना है. विजयनगर में एक बिल्डर द्वारा बनाया गया कचनार सिटी कॉलोनी के अंदर 76 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा है. प्रतिमा के अंदर बनी गुफा में 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना कराई गई है, जो आकर्षण का केन्द्र है.
