भारत अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने का निरंतर प्रयास कर रहा है. इसी बीच एक क्रूज मिसाइल का पहला टेस्ट सफल हुआ है. डीआरडीओ ने यह परीक्षण ओडिशा के तट पर चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर से किया. परीक्षण के दौरान सभी सबसिस्टम उम्मीद के अनुसार काम करते रहे और अपने टारगेट को पूरा किया.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
DRDO Successful Trial of LRLACM : भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार कामयाबी हासिल कर रहा है. मंगलवार (12 नवंबर) को भी देश ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है. भारत की इस सफलता से दुश्मनों के पसीने छूटने वाले हैं. दरअसल, मंगलवार को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपलेंट ऑर्गनाईजेशन (DRDO) ने लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का पहला परीक्षण किया है. डीआरडीओ ने यह परीक्षण ओडिशा के तट पर चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर से किया. परीक्षण के दौरान सभी सबसिस्टम उम्मीद के अनुसार काम करते रहे और अपने टारगेट को पूरा किया.
LRLACM के प्रदर्शन पर DRDO की नजर
लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) के परीक्षण पर नजर रखने के लिए आईटीआर की ओर से अलग-अलग स्थानों पर रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टीकल ट्रैकिंग सिस्टम (EOTS) और टेलीमेट्री जैसे कई रेंज सेंसर लगाए गए थे ताकि मिसाइल के उड़ान के रास्ते को पूरी तरह से कवर किया जा सके.
स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई मिसाइल
एलआरएलएसीएम पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइल है, जिसकी सभी उप-प्रणालियां डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों द्वारा विकसित की गई हैं. बेंगलुरु स्थित वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान इस परियोजना की नोडल प्रयोगशाला है. परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
रक्षा मंत्री ने दी डीआरडीओ टीम को बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एलआरएलएसीएम के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ की टीम और उद्योग भागीदारों को बधाई दी. रक्षा सचिव तथा रक्षा विभाग (अनुसंधान एवं विकास) के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण से जुड़ी सभी गतिविधियों की निगरानी की. उन्होंने सफल परीक्षण में शामिल वैज्ञानिकों और टीम के सभी सदस्यों की सराहना की.
हाल ही में कई महत्वपूर्ण तकनीकों का हुआ प्रदर्शन
इससे पहले 13 जून को डीआरडीओ ने देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई महत्वपूर्ण तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया था. इन परीक्षणों का उद्देश्य विभिन्न प्रकार के मिसाइल और समुद्री खतरों के खिलाफ भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना था.
बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली का सफल परीक्षण
मिली जानकारी के अनुसार 10 और 11 जून 2026 को लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमताओं के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस का प्रदर्शन करने के लिए लगातार तीन उड़ान परीक्षण किए गए. इन परीक्षणों में मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) प्रणाली ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेद दिया.
आईसीबीएम को रोकने की क्षमता वाले देशों में शामिल हुआ भारत
डीआरडीओ के अनुसार, इन परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) तक को रोकने की क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली उपलब्ध है. इन प्रणालियों को मिसाइल संबंधी नए और उभरते खतरों का सामना करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों के साथ विकसित किया गया है.
एंटी-शिप मिसाइल का भी सफल परीक्षण
नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (एनएसएम-एमआर) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया. इन सभी परीक्षणों का अवलोकन डीआरडीओ और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ को बधाई दी और इसे देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम उपलब्धि बताया.
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( DRDO ) ने हर भारतीय को उस पर गर्व करने की एक और वजह दे दी है. संस्थान ने ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की जमीनी आक्रमण क्रूज मिसाइल (एलआरएलएसीएम) का सफल परीक्षण कर लिया है.
जानें, कहां किया गया ये परीक्षण
ओडिशा के चांदीपुर में स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में तैनात अलग-अलग ट्रैकिंग उपकरणों के जरिए इस टेस्ट का परीक्षण किया गया, जिसमें सभी उद्देश्य सिद्ध हुए। बता दें कि एलआरएलएसीएम स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइल है, जिसके सभी उप-प्रणालियां डीआरडीओ की अलग-अलग प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों ने विकसित की हैं.
