BJP Meeting in Delhi: लगभग 3 घंटे चली, जहां पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया. उन्होंने कहा कि राज्य के अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर करने का लक्ष्य है.
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By : DB News Update | Edited By: Supriya
BJP Meeting in Delhi: लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी की यह मुख्यमंत्री परिषद की पहली बैठक है. राज्य के मुख्यमंत्री से कहा गया कि सरकार निरंतर काम कर रही है. चुनाव में आए नतीजे को लेकर हैरान न हो. बैठक में कहा गया कि सभी आंकड़े सरकार की बढ़त में है और चुनाव में सीट कम आने के बावजूद भी हम आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि हताश होने की जरूरत नहीं है बल्कि ज्यादा उत्साह के साथ काम करना है और जनता के विश्वास पर खरा उतरना होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भाजपा की दो दिवसीय मुख्यमंत्री परिषद की बैठक हुई, जहां सबको उनके राज्यों में सुशासन को लेकर मिशन मोड में काम करने के लिए कहा गया. ये बैठक दो दिनों तक चली, जिसमें पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व शर्मा भी शामिल हुए.
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर बोले सीएम योगी
मुख्यमंत्री परिषद की बैठक लगभग 3 घंटे चली, जहां पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने ग्राम सचिवालय डिजिटलाइजेशन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया. उन्होंने कहा कि राज्य के अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर करने का लक्ष्य है. वहीं असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने रोजगार को लेकर कहा. बिहार के उपमुख्यमंत्री की बात करें तो सम्राट चौधरी ने प्रदेश में अवैध खनन को लेकर प्रस्तुति दी. वहीं पर मानिक साहा, जो त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं ने ‘द्वार पर सरकार’ विषय पर अपनी बात कही.
दोनों डिप्टी सीएम से भी की बातचीत
बैठक में सभी मुख्यमंत्री से संगठन के साथ बेहतर तालमेल बनाकर रखने को कहा. इस बात पर भी जोर दिया गया की कार्यकर्ताओं के साथ सम्मान किया जाए. इसके साथ ही राज्य की फ्लैगशिप योजनाओं को लागू करने को कहा.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भी सामने आया कि इस बैठक के खत्म होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता ने यूपी के दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक के साथ बात की और प्रदेश में आने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर जोरदार तरीके से ताकत जुटाने को कहा.
1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिल गई थी बढ़त
बताया जा रहा है कि 1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने केंद्र में अपना दबदबे को बढ़ाया तो एक साल बाद ही पार्टी ने एक साथ 3 राज्यों में सरकार बना ली. 1990 में हुए विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, हिमाचल और राजस्थान में पहली बार कमल खिला. भैरो सिंह शेखावत ने 4 मार्च 1990 को राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. जबकि हिमाचल प्रदेश में शांता कुमार और मध्य प्रदेश में सुंदर लाल पटवा 5 मार्च 1990 को मुख्यमंत्री बने. वैसे तो तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक साथ जीत हासिल की थी लेकिन मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के लिहाज से राजस्थान वो पहला राज्य था जहां बीजेपी का कमल खिला और सरकार बनी.
4 दशक में शिखर पर पहुंच चुकी है बीजेपी
1989 के लोकसभा और 1990 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1996 तक आते-आते बीजेपी केंद्र में सरकार बनाने की स्थिति तक पहुंच गई. बीजेपी ने 161 सीटों के साथ पहली बार केंद्र में सरकार बनाई और अटल बिहारी वाजपेयी बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री बने लेकिन इस बार वो सिर्फ 13 दिन के पीएम ही बन पाए. 1998 में दोबारा चुनाव हुए और पार्टी 182 सीटें जीतकर फिर से केंद्र की सत्ता तक पहुंची, इस बार अटल बिहारी वाजपेयी 13 महीने की सरकार के प्रधानमंत्री बने.
1999 में भी बीजेपी ने 182 सीटें जीती थी
1999 में भी बीजेपी ने 182 सीटें जीती थी लेकिन इस बार अटल बिहारी वाजपेयी ने 26 दलों के साथ गठबंधन का ऐसा ताना-बाना बुना कि पूरे 5 साल चली उस सरकार की मिसाल आज भी सियासी गलियारों में दी जाती है. 2004 में बीजेपी को हार मिली और सत्ता फिर से कांग्रेस के पास आ गई, 2009 में भी लगातार दूसरी बार यूपीए की सरकार बनी और मनमोहन सिंह लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने.
