सनातन धर्म महासभा का गठन कर मंदिर के पदाधिकारियों को एक मंच पर लाया गया, नरसिंह मंदिर के महंत कर रहे शोभायात्रा का नेतृत्व
Source : DB News Update
By- DBnew update/edited by- Supriya
जबलपुर. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर हर साल विशाल शोभायात्रा निकाली जा रही है. यह शोभोयात्रा प्रभात फेरी से शुरू हुई थी, जिसे आज विशाल स्वरूप दे दिया गया है. जबलपुर शहरवासियों का सौभाग्य है कि यह शोभायात्रा निर्विवाद रूप से विगत 44 साल से निरंतर निकाली जा रही है, जिसका नेतृत्व नरसिंह मंदिर के महंत कर रहे हैं।
सन् 1980 में साकेतवासी स्वामी रामचन्द्र दास शास्त्री जी महाराज ने मंदिरों के पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर एक मत किया और उनका आदेश शहरभर के मंदिर पदाधिकारी मानते हुए शोभायात्रा निकालने का संकल्प ले लिया. उनका संकल्प आज फली भूत हो रहा है और शहर के हर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है.
नृसिंहपीठाधीश्वर द्वारा रखी गई आधारशिला हिली नहीं
सन् 1980 में साकेतवासी स्वामी रामचन्द्रदास शास्त्री जी महाराज द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा की रखी गई आधारशिला आज तक नहीं हिली. इस शोभायात्रा का नेतृत्व अपने जीवनकाल में श्रीनृसिंहपीठाधीश्वर स्वामी रामचन्द्रदास शास्त्री जी महाराज करते रहे. उनके देवलोक गमन के पश्चात श्रीनृसिंह पीठ की गद्दी पर अभिनव शुकदेव स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज विराजमान हुए, उन्होंने अपने जीवन काल तक इस शोभायात्रा का नेतृत्व करते रहे.
इसके बाद अभी वर्तमान में शोभायात्रा का नेतृत्व श्री नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ स्वामी नरसिंगदास जी महाराज कर रहे हैं. जिनके पावन सानिध्य एवं नगर के सभी मठ मंदिरों के संत-महंत उपस्थित हो रहे हैं और शोभायात्रा को गरिमा प्रदान कर रहे हैं.
इन मंदिरों का रहता है सहयोग
शोभायात्रा श्री सनातन धर्म तिराहा (पुराना मोटर स्टैंड) से निकाली जाती है. इस शोभायात्रा में श्रीकृष्ण मंदिर गोरखपुर, श्री राम मंदिर मदन महल, नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर, गीताधाम गौरीघाट, श्रीकृष्ण मंदिर छोटी ओमती, श्रीकृष्ण गोपाल मंदिर घमापुर, जय श्री कृष्णी महासभा बाई का बगीचा, श्री जगदीश मंदिर गढ़ा फाटक, श्री रामलीला समिति गढ़ा सहित अनेक धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाएं मनोहारी सजीव झांकियों के साथ सम्मिलित होती हैं.
ये रहता है शोभायात्रा रूट
शोभायात्रा श्री सनातन धर्म तिराहा (पुराना मोटर स्टैंड) से प्रारंभ होकर नगर निगम चौराहा, मालवीय चौक, सुपर मार्केट, लॉर्डगंज, बड़ा फुहारा से कोतवाली, मिलौनीगंज चौक, गोपाल लाल जी मंदिर हनुमानताल से घोड़ानक्कास बड़ी खेरमाई होते हुए भानतलैया स्थित शिवमंदिर में धर्मसभा के रूप में शोभायात्रा का समापन होता है.
आकर्षण का केन्द्र रहती हैं शोभायात्रा की झांकियां
शाेभायात्रा में प्रमुख रूप से सनातन श्रीकृष्ण मंदिर गोरखपुर, राम मंदिर मदन महल, जगदीश मंदिर गढ़ा, नरसिंह मंदिर-गीताधाम साहित संस्कारधानी की प्रमुख मंदिरों की झांकियां शामिल होती हैं और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म दिवस से लेकर महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा की गई लीलाओं का चित्रण करने का प्रयास किया जाता है. यह शोभायात्रा दिनों दिन लंबी होती जा रही है. संस्कारधानी जबलपुर के सभी प्रमुख धार्मिक स्थल जुड़ते जा रहे हैं.
सामाजिक-धार्मिक संस्थाएं करती हैं शोभायात्रा का स्वागत
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर निकाली जााने वाली शोभायात्रा का स्वागत शहर की प्रमुख धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं स्टॉल लगाकर स्वागत वंदन करती हैं. इस शोभायात्रा में शामिल संतों का स्वागत भी धार्मिक संगठनो क्षरा किया जााता है. शोभायात्रा में भगवाान के उन सभी रूपों का प्रदर्शन किया जाता है, जिससे लोगों को प्रेरणा मिले. नए लाोगों को धार्मिक और सामााजिक प्रतिष्ठा का एहसास हो सके.
खुद भक्तों से मिलने जाते हैं भगवान
ऐसी मान्यता है भगवान श्रीकृष्ण शोभायात्रा के माध्यम से भगवाान श्रीकृष्ण स्वायं आते हैं. माना जाता है कि भगवान मंदिर की चारदीवारी से बाहर निकलकर खुद अपने भक्तों के पास आते हैं ताकि जो लोग मंदिर नहीं आ पाते, वे भी सड़कों पर उनके दर्शन कर सकें. शोभायात्रा निकलने से पूरे नगर का वातावरण पवित्र, भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है.
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) या भगवत कथा के दौरान उनकी बाल-लीलाओं और संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए यह उत्सव मनाया जाता है. पुरी की प्रसिद्ध रथयात्रा माता सुभद्रा की द्वारका भ्रमण की इच्छा पूरी करने के लिए श्रीकृष्ण और बलराम द्वारा निकाले जाने की पुरानी परंपरा से जुड़ी है.
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