बिहार के सासाराम में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में लालू यादव ने जोशीला भाषण दिया.
Source : MEDIA
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Rahul Gandhi Vote Adhikar Yatra: बिहार के सासाराम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरेजेडी नेता तेजस्वी यादव के ‘वोट अधिकार यात्रा’ में लालू यादव ने तकरीबन डेढ़ मिनट के भाषण दिया. उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ‘चोरों को हटाइए, बीजेपी को भगाइए. किसी भी कीमत पर भाजपा जो चोरी करता है आने नहीं दीजिए. सबलोग एक हो जाइए. एक होकर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव सभी मिलकर एकजुट होकर इसको उखाड़ फेंकिए. लोकतंत्र मजबूत होने दीजिए. लागल-लागल झुलनियां में धक्का, बलम कलकत्ता चला.’
पुराने अंदाज में बोले लालू
लालू ने जब माइक थामा तो जनता में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. राजनीति के मंच पर कई बार केवल शब्द नहीं, बल्कि उनका अंदाज असर करता है. और जब बात बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की हो तो उनकी भाषण शैली किसी चुनावी ‘टॉनिक’ से कम नहीं मानी जाती. सासाराम में आयोजित राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जिसने जनता के साथ-साथ मंच पर बैठे राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के चेहरे पर भी चमक ला दी.
1 सितंबर को होगा यात्रा का समापन
राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा से शुरू हो चुकी है. इस यात्रा की शुरुआत रोहतास (सासाराम) से हुई है, जबकि समापन पटना में 1 सितंबर को होगा. 16 दिन में राहुल गांधी 20 जिलों से गुजरते हुए 1300 किलोमीटर का सफर तय करेंगे. फिलहाल उनका काफिला औरंगाबाद में है.
हम सिर्फ चुनाव नहीं लोकतंत्र के लिए लड़ रहे- खरगे
इधर, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम लोग सिर्फ चुनाव के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं. संविधान बचाने के लिए लड़ रहे हैं. वोट की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं. ये वोट काट-काटकर अपनी हुकूमत चलाना चाहते हैं. ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकना है. उन्होंने उपस्थित लोगों से मजबूती के साथ गठबंधन के लोगों के साथ रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार जरूर बदलेगी.
खरगे ने चुनाव आयोग पर लगाया भाजपा का एजेंट होने का आरोप
खरगे ने चुनाव आयोग पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगाया. उन्होंने भाजपा-आरएसएस को गरीबों, युवाओं और महिलाओं के लिए बहुत खतरनाक बताते हुए कहा कि आरएसएस महिलाओं के लिए वोटिंग अधिकार नहीं चाहती थी. भाजपा के लोग हर बात पर तंग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आरएसएस वाले आजादी के खिलाफ थे. उन्होंने कहा कि बिहार के लोग पहले भी क्रांति करते रहे हैं. एक बार फिर उन्होंने लोगों से वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई लड़ने का आह्वान किया. आज बिहार के 65 लाख लोगों के वोट काट दिए गए.
सासाराम में व्यंगात्मक भाषण देकर छा गए लालू
सासराम में गर्मी और उमस के बीच हजारों की भीड़ को संबोधित करते हुए लालू यादव ने जब माइक संभाला तो वो वही पुराने लालू दिखे. चुटीले, व्यंग्यात्मक, जनभाषा में बोलते हुए और भीड़ की नब्ज़ को पहचानते हुए अपनी बात बोल दी. भीड़ में ठहाके गूंज उठे. भाषण के अंत तक लोग न सिर्फ उन्हें सुन रहे थे, बल्कि उनसे जुड़ भी चुके थे. यही लालू यादव की राजनीति की पहचान रही है. सासाराम की रैली महागठबंधन के लिए सिर्फ एक चुनावी सभा नहीं, बल्कि एकता और जोश का प्रदर्शन थी. राहुल गांधी, जो अक्सर गंभीर भाषण देने के लिए जाने जाते हैं, मंच पर लालू यादव की शैली देखकर बार-बार मुस्कराते रहे. उनके चेहरे की यह मुस्कान बताती थी कि उन्हें जनता के साथ यह जुड़ाव कितना उत्साहित कर रहा है.
वहीं तेजस्वी यादव के लिए यह पल भावनात्मक भी था. एक तरफ वह अपने पिता को राजनीतिक मंच पर उसी जोश के साथ देख रहे थे, दूसरी तरफ वे यह भी महसूस कर रहे थे कि जनता के बीच लालू की पकड़ अब भी मज़बूत है और यह आगामी चुनावों में आरजेडी के लिए एक बढ़त साबित हो सकती है. लालू यादव ने अपने भाषण में जहां सत्ता पक्ष पर तीखे हमले किए, वहीं उन्होंने आम जनता की भाषा और मनोविज्ञान का भी पूरा ध्यान रखा.
इस रैली ने यह साफ कर दिया कि भले ही बिहार की राजनीति में चेहरे बदल रहे हों, लेकिन लालू यादव जैसे नेता आज भी ‘भीड़ खींचने’ से कहीं ज़्यादा ‘भीड़ को दिशा देने’ में सक्षम हैं. सासाराम में जो हुआ, वह केवल एक भाषण नहीं था. वह एक संकेत था कि बिहार की राजनीति में लालू स्टाइल अभी ज़िंदा है और उसकी ज़रूरत अब भी महसूस की जा रही है.
