राहुल गांधी के आरोपों का जिक्र करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हम शांत नहीं रह सकते हैं.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
ECI Press Conference: चुनाव आयोग (EC) ने रविवार को नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. राहुल गांधी का नाम लिए बिना चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा- PPT प्रेजेंटेशन में दिखाया डेटा हमारा नहीं है. वोट चोरी के आरोपों पर हलफनामा दें या देश से माफी मांगे. 7 दिन में हलफनामा नहीं मिला तो आरोपों को निराधार समझा जाएगा.
हमारे लिए न कोई पक्ष और न विपक्ष है-CEC
एक पार्टी के साथ साठगांठ के आरोपों पर CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा- हमारे लिए न कोई पक्ष और न विपक्ष है. सभी राजनीतिक दल बराबर हैं. अगर सही समय पर त्रुटि हटाने का आवेदन न हो और फिर वोट चोरी जैसे गलत शब्दों का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह किया जाए तो ये लोकतंत्र का अपमान है.
बिना किसी सबूत के योग्य वोटर का नाम नहीं कटेगा-CEC
चुनाव आयोग ने रविवार (17 अगस्त 2025) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के वोट चोरी और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए गए आरोपों पर जवाब दे रहे थे. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “बिना किसी सबूत के योग्य वोटर का नाम नहीं कटेगा. चुनाव आयोग हर मतदाता के साथ चट्टान की तरह खड़ा है.”
‘हलफनामा देना होगा या देश से मांफी मांगनी होगी’
मुख्य चुनाव आयुक्त ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए दो टूक कहा, “हलफनामा देना होगा या देश से मांफी मांगनी होगी. तीसरा विकल्प नहीं है. अगर सात दिन में हलफनामा नहीं मिला तो इसका अर्थ ये होगी कि ये सारे आरोप निराधार है.”
बिना हलफनामे के नहीं करनी चाहिए बात- चुनाव आयोग
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि जरूरी विषयों पर चुनाव आयोग को बिना हलफनामे के काम नहीं करना चाहिए. यह संविधान और कानून दोनों के खिलाफ होगा. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा “मतदाता सूची को शुद्ध करना एक साझा ज़िम्मेदारी है, लेकिन बिहार में चूंकि हमारे बूथ लेवल अधिकारियों ने बूथ लेवल एजेंटों और राजनीतिक दलों के साथ मिलकर काम किया. शायद इसीलिए 1 अगस्त के बाद से किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है. इसके दो ही मतलब हो सकते हैं –
क्या मसौदा सूची पूरी तरह से सही है? जिसे चुनाव आयोग नहीं मानता, चुनाव आयोग कह रहा है कि इसमें गलतियां हो सकती हैं, इसे शुद्ध करते हैं, अभी 15 दिन बाकी हैं, अगर 1 सितंबर के बाद भी उसी तरह के आरोप लगने शुरू हुए, तो कौन जिम्मेदार है? हर मान्यता प्राप्त पार्टी के पास अभी 15 दिन बाकी है. मैं सभी राजनीतिक दलों से आह्वान करता हूं कि 1 सितंबर से पहले इसमें त्रुटियां बताएं चुनाव आयोग उन्हें सुधारने के लिए तैयार है.
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ये भी पूछा गया कि आखिरी एक घंटे में इतनी वोटिंग कैसे हुई? चुनाव आयोग ने जवाब दिया था कि अगर 10 घंटे मतदान होता है, तो औसत हर घंटे 10 प्रतिशत होता है… किसी भी बात को 10 बार, 20 बार कहने से वो सच नहीं हो जाता. सूरज सिर्फ़ पूर्व में उगता है. किसी के कहने से वो पश्चिम में नहीं उगता.
वोटर लिस्ट में सुधार आयोग की कानूनी जिम्मेदारी
उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में सुधार चुनाव से पहले होना चाहिए या बाद में? चुनाव आयोग ऐसा नहीं कह रहा है. जनप्रतिनिधित्व कानून कहता है कि आपको हर चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में सुधार करना होगा. यह चुनाव आयोग की कानूनी जिम्मेदारी है.
ज्ञानेश कुमार ने आगे कहा कि इसके बाद सवाल उठता है कि क्या चुनाव समिति बिहार के सात करोड़ से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंच पाएगी? सच तो यह है कि यह काम 24 जून को शुरू हुआ था. पूरी प्रक्रिया लगभग 20 जुलाई तक पूरी हो गई थी.
डुप्लीकेट EPIC को लेकर क्या बोले मुख्य चुनाव आयुक्त?
वहीं , डुप्लीकेट EPIC को लेकर मुख्य चुनाव ने कहा, “डुप्लीकेट EPIC दो तरह से हो सकता है. एक तो यह कि एक व्यक्ति जो पश्चिम बंगाल में है, उसके पास एक ईपीआईसी नंबर है और दूसरा व्यक्ति जो हरियाणा में है, उसके पास भी वही ईपीआईसी नंबर है. जब मार्च 2025 के आसपास यह सवाल आया, तो हमने इस पर चर्चा की और हमने पूरे देश में इसका समाधान किया.
जिनके ईपीआईसी नंबर एक जैसे थे, उनके ईपीआईसी नंबर बदल दिए
उन्होंने बताया कि करीब तीन लाख ऐसे लोग मिले, जिनके ईपीआईसी नंबर एक जैसे थे, इसलिए उनके ईपीआईसी नंबर बदल दिए गए. दूसरे तरह का डुप्लीकेशन तब आता है जब एक ही व्यक्ति का नाम एक से ज़्यादा जगहों पर वोटर लिस्ट में होता है और उसका ईपीआईसी नंबर अलग-अलग होता है.
किसी भी राजनीतिक दल ने आपत्ति दर्ज नहीं करवाई
चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने कहा, 1 अगस्त के बाद, जब से हमारे दैनिक बुलेटिन आने शुरू हुए हैं, किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है. इसलिए, इसका अर्थ है मसौदा सूची पूरी तरह से सही है. चुनाव आयोग कह रहा है कि हम 1 सितंबर तक का समय देंगे और इसे (मसौदा सूची) ठीक किया जा सकता है.
उन्होंने पूछा कि अगर 1 सितंबर के बाद भी इसी तरह के आरोप लगाए जाते हैं, तो कौन ज़िम्मेदार है? हर मान्यता प्राप्त दल के पास अभी भी पंद्रह दिन बाकी हैं. मैं आपके माध्यम से अपील करता हूं कि सभी बारह राजनीतिक दल, चाहे वे राष्ट्रीय दल हों या राज्य स्तरीय दल, 1 सितंबर से पहले (मसौदा सूची) में गलतियों को इंगित करें. चुनाव आयोग उन्हें ठीक करने के लिए तैयार है.
