आरबीआई के आंकड़े के अनुसार मध्य प्रदेश का कर्ज के मामले में नौवां स्थान है. बजट अनुमान के हिसाब से मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज 4,80,976 करोड़ रुपए का हो जाएगा
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DB news updates/edited by –prince awasthi
MP Debt In Country: भोपाल. मध्य प्रदेश पर देश के कुल कर्ज का पांच प्रतिशत से ज्यादा है. मार्च के अंत तक (बजट अनुमान 2025) RBI के अनुसार, भारत में राज्य सरकारों का कुल बकाया कर्ज 93,93,317.5 करोड़ रुपए था. इसमें से मध्य प्रदेश का हिस्सा 4,80,976.0 करोड़ रुपए है.
राज्य सरकार लगातार कर्ज ले रही है, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं. सरकार का कहना है कि यह कर्ज राज्य के विकास के लिए लिया जा रहा है. इस महीने सरकार ने 5000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है और महीने के अंत तक 5000 करोड़ रुपए का और कर्ज लेगी.
यह देश के कुल कर्ज का पांच प्रतिशत
नवंबर में बनी नई सरकार को 3.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज विरासत में मिला था. वित्तीय तंगी के बावजूद, सरकार ने 230 करोड़ रुपए का विमान, मंत्रियों के लिए नई गाड़ियां और उनके बंगलों के नवीनीकरण पर खर्च किया है. इस बीच मध्य प्रदेश के बढ़ते कर्ज पर चिंता जताई जा रही है. RBI के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक राज्य का कुल कर्ज 4,80,976.0 करोड़ रुपए हो गया है. यह देश के कुल कर्ज का पांच प्रतिशत से अधिक है.
इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए लिया जा रहा कर्ज
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्षी कांग्रेस ने सरकार को कर्ज लेने पर घेरा. सरकार का तर्क है कि कर्ज राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लिया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि हर कर्ज के लिए केंद्र सरकार की सहमति ली जाती है. कर्ज का इस्तेमाल राज्य में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए किया जाता है. यह मुख्य रूप से विकास योजनाओं की लागत वहन करता है.
भारत सरकार और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋणों का उपयोग मुख्य रूप से राज्य के विकास और सिंचाई बांधों के निर्माण, परिवहन सेवाओं में सुधार, किसानों, स्थानीय निकायों जैसे तीसरे पक्षों को ऋण देने, बिजली उत्पादन को ऋण, बिजली पारेषण आदि जैसी लाभकारी संपत्तियों के निर्माण के लिए किया गया था.
2026 में फिर लिया 5200 करोड़ का कर्ज
प्रदेश सरकार ने केंद्रीय बजट आने के दो दिन बाद चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने 5200 करोड़ रुपए के कर्ज फिर से लिए हैं. बताया जा रहा है कि यह कर्ज एमपी सरकार को तीन किस्तों में जारी किया जाएगा. इसके बदले में राज्य को अपनी वित्तीय स्वायत्तता में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. इस नए कर्ज के साथ मध्य प्रदेश का कुल कर्ज अब लगभग 4.75 लाख करोड़ का हो जाएगा, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 4.2 लाख करोड़ रुपए के बजट से लगभग 55,000 करोड़ रुपए अधिक है.
सरकार ठहरा रही है सही
वहीं, राज्य सरकर अपने बढ़ते कर्ज के बोझ को सही ठहरा रही है. सरकार का कहना है कि अपने बड़े विकास लक्ष्यों के अनुरूप सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए धन की आवश्यकता होती है. विकास कार्यों के लिए सरकार भविष्य में भी कर्ज लेती रहेगी.
कांग्रेस नेता ने कसा तंज
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर तंज कसा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा है कि- मध्यप्रदेश सरकार फिर ₹3,000 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है! वही पुराना तर्क दोहरा रही है, “यह कर्ज पूंजीगत खर्च के लिए है!”
इसीलिए, पुराना सवाल ही दोहरा रहा हूं, “कर्ज बढ़ता जा रहा है, तो विकास की रफ्तार और रोजगार की बहार कहां गुम हो गई है?”
सच यह है, भविष्य गिरवी रखकर भला करने का “झूठा भरोसा” भाजपा की फ़ितरत है! इसी की आड़ में मिशन करप्शन/कमीशन चल रहा है!
2025 से अब तक कितनी बार लिया गया कर्ज?
कर्ज लेने की तारीख कर्ज की राशि
3 सितंबर 2025 1500 करोड़
3 सितंबर 2025 1000 करोड़
22 अगस्त 2025 2300 करोड़
22 अगस्त 2025 2500 करोड़
01 अगस्त 2025 1600 करोड़
01 अगस्त 2025 1400 करोड़
25 जुलाई 2025 1000 करोड़
25 जुलाई 2025 2000 करोड़
4 जुलाई 2025 2500 करोड़
4 जुलाई 2025 2300 करोड़
3 सितंबर 2025 1500 करोड़
19 सितंबर 2025 1500 करोड़
19 सितंबर 2025 1500 करोड़
26 सितंबर 2025 1500 करोड़
26 सितंबर 2025 1500 करोड़
24 अक्टूबर 2025 2500 करोड़
24 अक्टूबर 2025 2700 करोड़
7 नवंबर 2025 4000 करोड़
2 दिसंबर 2025 3000 करोड़
2 जनवरी 2026 4000 करोड़
30 जनवरी 2026 5200 करोड़
नोट- यह जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के आधार पर है.
