RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी
Source : DB News Update
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Mohan Bhagwat on Retirement Speculation: RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया. सम्मेलन आज आखिरी दिन था. इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के बाद उनके राजनीति से संन्यास लेने की अटकलों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने खारिज कर दिया. कहा जा रहा था कि बीजेपी और संघ की परंपरा के मुताबिक 75 साल की उम्र पूरी होने पर नेता सक्रिय राजनीति से अलग हो जाते हैं.
मोहन भागवत ने गुरुवार (28 अगस्त) आज शाम पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ‘मैंने कभी नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या कोई और 75 साल की उम्र में रिटायर होना चाहिए… हम वही करेंगे जो संघ कहेगा.’
किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं- भागवत
’75 साल के बाद क्या राजनीति से रिटायर हो जाना चाहिए’ सवाल के जवाब में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “मैंने ये बात मोरोपंत के बयान का हवाला देते हुए उनके विचार रखे थे…मैंने ये नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए… हम जिंदगी में किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं और संघ हमसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, हम संघ के लिए उस समय तक काम करने के लिए भी तैयार हैं.”
बंगाल में RSS की विस्तार योजना
RSS अपने शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक विस्तार पर जोर दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, संगठन अक्टूबर तक देशभर में एक लाख शाखाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जिनमें से 2,018 शाखाएं पश्चिम बंगाल में होंगी। बंगाल को RSS ने प्राथमिकता वाला राज्य बताया, लेकिन साथ ही इसे चुनौतीपूर्ण भी माना, क्योंकि वहां बार-बार होने वाली राजनीतिक हिंसा संगठन के लिए बाधा बन रही है। RSS ने ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि वह मोहन भागवत के सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति देने में आनाकानी करती है। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, हमें भागवत जी की सभा के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ा.
बंगाल में ‘राजधर्म’ की कमी पर चिंता
RSS ने पश्चिम बंगाल में ‘राजधर्म’ की कमी पर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे की दुश्मन नहीं हैं, लेकिन लोगों के स्वतंत्र जीवन का अधिकार सुनिश्चित करना जरूरी है। RSS ने बंगाल में राजनीतिक संरक्षण के कारण होने वाली हिंसा पर सवाल उठाया और कहा कि जनता को इस पर विचार करना चाहिए। संगठन ने यह भी जोर दिया कि बंगाल में उसका विस्तार राष्ट्रीय एकता और हिंदू संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए है.
राष्ट्रीय मुद्दों पर RSS का रुख
RSS ने राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। संगठन ने सभी भारतीयों के लिए एक समान जनसंख्या नीति की वकालत की, न कि केवल जनसंख्या नियंत्रण पर जोर दिया। इसके अलावा, अल्पसंख्यक संस्थानों से संबंधित अनुच्छेद 30 में संशोधन की मांग की। भाषा के मुद्दे पर RSS ने कहा कि एक संपर्क भाषा हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय भाषाएं अनेक हो सकती हैं। विदेश नीति पर संगठन का कहना है कि भारत को सभी देशों, जिसमें चीन भी शामिल है, के साथ संबंध रखने चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय प्रभुता सर्वोपरि है.
मोदी के नेतृत्व पर भरोसा
RSS ने स्पष्ट किया कि वह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का समर्थन करता है। संगठन के सूत्रों ने कहा कि मोदी 2029 तक देश का नेतृत्व करेंगे, जैसा कि गृह मंत्री अमित शाह पहले कह चुके हैं। यह बयान उन अटकलों को खारिज करता है, जो विपक्षी नेताओं जैसे संजय राउत और अरविंद केजरीवाल ने उठाई थीं। RSS का यह रुख बिहार में हाल ही में शुरू की गई 13,000 करोड़ की परियोजनाओं और बंगाल में संगठन की विस्तार योजनाओं के साथ मिलकर देश में मजबूत नेतृत्व और विकास की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
