शेख हसीना के इस्तीफे का जश्न मनाने के दौरान होटल पर कर दिया हमला, डिप्टी कमिश्नर अबरारुल इस्लाम ने इस घटना की पुष्टि की. मृतकों में से दो लोगों की पहचान 20 वर्षीय चयन और 19 वर्षीय सेजन हुसैन के रूप में हुई.
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By : DB News Update | Edited By: Supriya
Bangladesh Government Crisis : बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद प्रदर्शनकारियों की तालिबानी करतूत सामने आई है. यहां जेसोर में सोमवार को एक होटल में आग लगा दी गई, जिसमें कम से कम 8 लोगों की जलकर मौत हो गई और 84 लोग घायल हो गए. होटल के मालिक जेसोर जिले के अवामी लीग के महासचिव शाहीन चकलादार थे.
शेख हसीना के इस्तीफे का जश्न मना रहे थे
डिप्टी कमिश्नर अबरारुल इस्लाम ने इस घटना की पुष्टि की. मृतकों में से दो लोगों की पहचान 20 वर्षीय चयन और 19 वर्षीय सेजन हुसैन के रूप में हुई. अस्पताल के एक कर्मचारी हारुन रशीद ने बताया कि कम से कम 84 लोग वहां इलाज करा रहे थे, जिनमें से अधिकांश छात्र हैं. शहर में विभिन्न स्थानों पर हजारों लोग प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे का जश्न मना रहे थे. जश्न के दौरान कुछ लोगों ने चित्तरमोर इलाके में जाबिर होटल में आग लगा दी और उसके फर्नीचर को तोड़ दिया. वहीं, जिला अवामी लीग कार्यालय और शरशा और बेनापोल क्षेत्रों में 3 और अवामी लीग नेताओं के घरों पर उपद्रवियों ने हमला किया.
व्यवस्था संभालने में जुट गए यूनुस
बांग्लादेश में बिगड़े हालात में प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में सत्ता संभालने के बाद अंतरिम सरकार ने क़ानून व्यवस्था संभालने की कोशिश शुरू की.
गृह मंत्रालय के तत्कालीन सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (रि य़र्ड) एम सखावत ने कई दौर की बैठकों के बाद पुलिस वालो की मांगें स्वीकार करने का भरोसा दिया. उन्होंने इसके साथ ही समय सीमा तय करते हुए कहा कि अगर 15 अगस्त के भीतर वे लोग काम पर नहीं लौटे, तो मान लिया जाएगा कि वो नौकरी करने के इच्छुक नहीं हैं. उसके बाद 11 अगस्त को हड़ताल वापस लेकर पुलिस वाले थाने में लौट आए.
सरकार बदलने से क्या बदला?
देश में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जगह प्रशासकों की नियुक्ति की गई है. बैंकिंग के क्षेत्र में सुधार के लिए एक अलग आयोग बनाने का भी फ़ैसला किया गया है.
इसके साथ ही अवैध तरीक़े और धोखाधड़ी से लिए गए क़र्ज़ और ग़ैरकानूनी तरीक़े से बाहर भेजे गए धन को देश में वापस लाने के लिए भी क़दम उठाए जा रहे हैं.
बांग्लादेश की पुलिस भी हमलों के डर से उबर कर दोबारा काम पर लौट आई है. नई सरकार ने ड्रेस और लोगो में बदलाव के ज़रिए पुलिस बल को दोस्ताना बनाने की बात कही है.
इस बीच, शेख़ हसीना के साथ ही अवामी लीग के सांसदों और मंत्रियों के ख़िलाफ़ हत्या समेत अलग-अलग आरोपों में मामले दर्ज करने का सिलसिला जारी है. अब तक कई लोगों को गिरफ़्तार भी किया जा चुका है.
इसके उलट सरकार के प्रमुख सलाहकार प्रोफेसर यूनुस और बीएनपी की अध्यक्ष ख़ालिदा जिया के ख़िलाफ़ कई मामलों में सज़ा रद्द कर दी गई है.
देश में बीएनपी और जमात के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल से रिहा किया गया है.
साथ ही चरमपंथी गतिविधियों और दूसरे गंभीर मामलों में सज़ायाफ़्ता मुजरिमों को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है, जिसकी आलोचना भी हो रही है.
पिछले दिनों क्या हुआ?
बीते पांच अगस्त को आवामी लीग सरकार के गिरने के बाद देश के विभिन्न इलाक़ों के पुलिस थानों में हमले की घटनाएँ हुई थी. बांग्लादेश पुलिस एसोसिएशन का कहना है कि उस दौरान देश के 639 में से कम से कम 450 थानों पर हमले किए गए थे.हमलों के दौरान थानों में तोड़फोड़, आगज़नी, हथियार, संपत्ति लूटने और पुलिस वालों की हत्या की घटनाएँ भी हुई थीं.अधिकारियों का कहना है कि हसीना सरकार के पतन से पहले और बाद में हुई हिंसा के दौरान देश भर में कम से कम 44 पुलिसवालों की मौत हो गई.उसके बाद कामकाज की जगह पर सुरक्षा, पुलिस वालों की हत्या के मामले में न्याय और मुआवज़े समेत विभिन्न मांगों के समर्थन में पुलिस के जवानों ने हड़ताल शुरू कर दी थी.इसकी वजह से चोरी-डकैती की घटनाएँ बढ़ जाने के साथ ही देश में क़ानून और व्यवस्था की स्थिति ख़राब हो गई थी.एक दौर में तो स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों ने रात भर मोहल्ले में पहरेदारी शुरू कर दी थी.
