Pandit Pradeep Mishra: पंडित प्रदीप मिश्रा ने जयपुर में कहा कि लड़कियों के पेट की नाभि ढकी रहेगी, तभी वह सुरक्षित रह सकती हैं.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Pandit Pradeep Mishra on Women Safety: मध्य प्रदेश सिहोर के चर्चित कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने महिलाओं की सुरक्षा को चिंता व्यक्त की है. राजस्थान की राजधानी जयपुर में पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा चल रही है, जहां उन्होंने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि, “लड़कियों के पेट की नाभि ढकी रहेगी, तभी वह सुरक्षित रह सकती हैं क्योंकि आज के समय में पहनावे की वजह से ही अपराध बढ़ रहे हैं.”
प्रदीप मिश्रा का कहना है कि अगर तुलसी के पौधे की जड़ दिखने लगे तो पौधा मर जाता है. ऐसे ही लड़कियों की नाभि भी उनके शरीर की जड़ है. उसे ढककर रखना चाहिए. जितना ढका रहेगा, महिलाएं उतनी सुरक्षित बनी रहेंगी. गौरतलब है कि पंडित प्रदीप मिश्रा जयपुर में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा सुना रहे हैं. कथा के दूसरे दिन, शनिवार (3 मई) को उन्होंने यह बयान दिया. इस बयान के बाद सोशल मीडिया में बवाल मच गया और कई संगठनों ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया. वहीं कुछ लोगाें ने प्रदीप मिश्रा का बचाव करते भी नजर आ रहे हैं. उनके बयान के आधार पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
बच्चों को अच्छे संस्कार देने की जरूरत
प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पहले जीवन में चार अवस्थाएं हुआ करती थीं- बचपन, जवानी, अधेड़ी और बुढ़ापा. अब सिर्फ दो रह गई हैं- बचपन और बुढ़ापा. आज के बच्चे मोबाइल चला-चलाकर जवानी में करने वाले कामों को बचपन में ही कर रहे है. इस वजह से लोग बचपन से सीधे बुढ़ापे में पहुंच रहे हैं.
पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपनी कथा के दौरान कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार अपराध रोक नहीं सकती, उसे केवल संस्कार ही रोक पाएंगे. प्रदीप मिश्रा ने चंचला देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह हमेशा अपने पति को यही समझाती थीं कि गलत काम मत करो, गलत नजर और गलत विचार मत रखो. आज के जमाने में हर महिला यही सीख दे रही है, लेकिन आज के जमाने में सबसे गलत स्त्रियों का पहनावा है. उन्होंने महिलाओं के पहनावे को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा, “आज की महिलाएं पुरुषों से कहती हैं कि वे उन्हें गलत नजर से न देखें, लेकिन खुद का पहनावा ही गलत है.”
र्तमान समय के बच्चों को लेकर भी चिंता जताई
मिश्रा ने वर्तमान समय के बच्चों को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि “अब उम्र की चार अवस्थाएं नहीं रहीं, केवल बचपन और बुढ़ापा बचा है. बच्चे मोबाइल देख-देखकर जवानी वाले काम बचपन में ही कर रहे हैं.” ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार दें.
प्रदीप मिश्रा का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे पीड़ित को दोषी ठहराने वाली मानसिकता का उदाहरण बता रहे हैं. कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके बयान की निंदा की है.
गवान चित्रगुप्त को लेकर भी हुआ विवाद
कथा के दौरान कथावाचक प्रदीप मिश्रा यमराज और चित्रगुप्त से जुड़े किसी प्रसंग पर चर्चा करते हुए बोलते हैं कि ” तु मुझे पहचानता नहीं, 7 दिन से पुराण कथा सुनी है. मेरा सबूत लेना हो, तो संत ज्ञानेश्वर बावली जी से ले लो. तेरे साथ तो नहीं जाऊंगा. यमराज घबराकर भागा. यमराज ने कहा किसको भेजूं, अगला संदेश चित्रगुप्त को भेजो तो कहा कि इस मुछंदर के साथ नहीं जाऊंगा. ये चित्रगुप्त फालतू की बात नहीं करना, सबका हिसाब रखना, मेरा हिसाब मत रखना.”
चित्रगुप्त पर टिप्पणी पर भड़क गए थे स्वामी सचिदानंद
इस टिप्पणी के बाद चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर ने वीडियो जारी कर प्रदीप मिश्रा को खरी खोटी सुनाई है और वह भी तमाम मर्यादाएं भूल गए. उन्होंने कहा है कि जिस प्रकार से भगवान चित्रगुप्त और भगवान यमराज पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, वह दर्शाता है कि यह व्यक्ति ना तो कथावाचक है और ना ही व्यास पीठ पर विराजमान होने लायक है. पहले उन्होंने राधारानी पर अभद्र टिप्पणी की. उन्होंने भगवान चित्रगुप्त पर जिस भाषा का प्रयोग किया है, अरे प्रदीप मिश्रा सुन तेरा अंत आ चुका है. तेरा काल तुझे पुकार रहा है. तेरे द्वारा दिए तथ्य और जिस भाषा शैली का तूने हमारे इष्ट देव पर प्रयोग किया है. उसका जवाब भी हम उसी भाषा में देंगे.
