कांग्रेस नेता राहुल आज रविवार से बिहार में ‘वोट अधिकार यात्रा’ शुरू करेंगे. यह यात्रा 25 जिलों से होकर गुजरेगी और 1 सितंबर को पटना में रैली के साथ खत्म होगी.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Rahul Gandhi Vote Adhikar yatra: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज रविवार से बिहार में ‘वोट अधिकार यात्रा’ की शुरुआत कने जा रहे हैं. इस यात्रा का उद्देश्य राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से लोगों के मताधिकार पर हो रहे कथित हमलों को उजागर करना है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह यात्रा न केवल चुनावी अधिकारों की रक्षा का संदेश देगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए जनसमर्थन जुटाने में भी अहम भूमिका निभाएगी. इस यात्रा की शुरुआत के दौरान आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी साथ रहेंगे.
यात्रा की शुरुआत और समापन
कांग्रेस की बिहार इकाई के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी कि राहुल गांधी इस यात्रा की शुरुआत सासाराम से करेंगे. यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना में एक बड़ी रैली के साथ होगा. इस दौरान राहुल गांधी करीब 15 दिनों तक बिहार में रहेंगे.
23 जिलों से होकर गुजरेगी यात्रा
‘वोट अधिकार यात्रा’ बिहार के 23 जिलों से होकर गुजरेगी. इसमें 20, 25 और 31 अगस्त को अवकाश रहेगा. कांग्रेस का मानना है कि यह यात्रा न केवल मताधिकार से जुड़े मुद्दों को लोगों तक पहुंचाएगी, बल्कि विपक्षी गठबंधन को मजबूत करेगी.
राहुल गांधी इस वोटर अधिकार यात्रा कार्यक्रम के तहत बिहार में 15 दिन रहे. राज्य के 25 ज़िले में 1300 किलोमीटर की यात्रा उन्होंने अपने महागठबंधन के सहयोगियों के साथ की.
इस पूरी यात्रा में उनके साथ खुली जीप में राजद नेता तेजस्वी यादव, भाकपा माले के दीपांकर भट्टाचार्य और वीआईपी के मुकेश सहनी रहे. पटना सिटी से आईं नसरीन बानो कहती हैं, “वोट चोर, गद्दी छोड़ तो आप सुन ही रही हैं. हमारे वोट के अधिकार की ही लड़ाई चल रही है. उसी के लिए हम लोग यहां आए हैं. गर्मी बहुत है लेकिन अभी आफ़त वोट पर है.” इन यात्राओं में सभी दल एक तरह से अपनी ताक़त का प्रदर्शन भी कर रहे हैं. राजद, कांग्रेस, वीआईपी, भाकपा माले, सीपीआई, सीपीएम के साथ साथ कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के झंडे इस पूरी यात्रा में दिखे.
कांग्रेस के लिए संजीवनी?
इस पूरी यात्रा में फ्रंट सीट पर राहुल गांधी रहे लेकिन इसके चलते महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में किसी तरह की दरार नहीं दिखी. बल्कि नेतृत्व के स्तर पर भी बेहतर तालमेल दिखा. तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी को बहुत सहजता से स्पेस दिया और कन्हैया-पप्पू यादव के साथ सहज दिखे. इसी के चलते लोजपा (आर) प्रमुख चिराग पासवान ने तेजस्वी को ‘कांग्रेस का पिछलग्गू’ कहा.
राजनीतिक विश्लेषक पुष्पेंद्र कहते हैं, “चूंकि महागठबंधन के भीतर एक चीज़ तय है कि अगर उसकी जीत हुई तो तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री बनेंगे. इसलिए महागठबंधन के सबसे बड़े दल राजद और उसके नेता तेजस्वी को कांग्रेस में कोई ख़तरा महसूस नहीं होता.” उन्होंने कहा, “ये भी ध्यान रखना होगा कि चुनाव आयोग जो एसआईआर कर रही है उसमें 1 फ़ीसदी वोटरों के नाम हटाए जाने का मतलब महागठबंधन के 3 से 4 फ़ीसदी वोटर्स का नुकसान है.”
“इसलिए महागठबंधन के दलों के भीतर भी वोट ट्रांसफ़र एक ज़रूरी प्रक्रिया है और इसके लिए ज़रूरी है कि उनमें एकता दिखे.” इस यात्रा से कांग्रेस कार्यकर्ता उत्साह से लबरेज़ हैं. सुपौल से आए कांग्रेसी कार्यकर्ता महेश मिश्र कहते हैं, “कुछ लोगों को भ्रम था कि कांग्रेस की ज़मीन गिरवी हो गई है. लेकिन इस यात्रा ने दिखा दिया कि कांग्रेस का ज़मीन और ज़मीर लौट चुका है.”
किसने क्या प्रतिक्रिया दी
“हम लोकतंत्र को खत्म नहीं होने देंगे. हमने लोकतंत्र को बचाने के लिए कई बलिदान दिए हैं. हम आगे भी ऐसा करते रहेंगे. हम इसे खत्म नहीं होने देंगे.”
लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख
“राहुल गांधी 10,000 किलोमीटर पैदल चलकर भारत की जनता की आवाज बने हैं, वो युवाओं की बात करते हैं. राहुल गांधी राजनीतिक लाभ-हानि के लिए नहीं, बल्कि संविधान की रक्षा के लिए निकले हैं. राहुल गांधी नफरत मिटाने, चुनाव आयोग की लूट रोकने, किसानों के कल्याण और युवाओं के रोज़गार के लिए निकले हैं.”
पप्पू यादव, पूर्णिया से निर्दलीय सांसद
“…भाजपा लोकतंत्र की धरती बिहार से लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रही है. हम ऐसा नहीं होने देंगे…हमने यह यात्रा इसलिए आयोजित की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर बिहारी अपना वोट डाल सके…ये लोग न सिर्फ अपने अधिकारों को मिटाना चाहते हैं, बल्कि उनके अस्तित्व को भी मिटाना चाहते हैं.”
तेजस्वी यादव, राजद नेता
“ये लोग कंस के रास्ते पर चल रहे हैं. जन्माष्टमी के मौके पर मैं कहूंगा कि कृष्ण ने कंस का नाश किया. यहां भी कुछ कंस हैं और जन्माष्टमी के मौके पर उनका नाश निश्चित है.”
गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री
