काल भैरव भगवान शिव का रौद्र अवतार माने गए हैं. तंत्र विद्या में काल भैरव की पूजा अचूक है लेकिन गृहस्थ जीवन वाले भी इनकी उपासना कर सकते हैं लेकिन इसके कुछ नियम हैं.
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By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Kaal Bhairav Puja: हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी मनाई जाती है, क्योंकि इसी तिथि पर काल भैरव प्रकट हुए थे. इस दिन काल भैरव की पूजा अचूक मानी जाती है. खासकर मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर काल भैरव की पूजा जरुर करनी चाहिए, इस दिन काल भैरव जयंती मनाई जाती है. इस साल काल भैरव जयंती 22 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी.
काल भैरव को भगवान शिव का उग्र स्वरूप माना गया है. भैरव का अर्थ है भय को हरने या जीतने वाला.इसलिए काल भैरव रूप की पूजा से मृत्यु और हर तरह के संकट का डर दूर हो जाता है.
कब करनी चाहिए काल भैरव की पूजा ?
शिव पुराण के अनुसार माना जाता है कि जब दिन और रात का मिलन होता है. यानी शाम को प्रदोष काल में शिव के रौद्र रूप से भैरव प्रकट हुए थे. इस समय काल भैरव की पूजा करने से वह प्रसन्न होते हैं. वहीं तांत्रिक पूजा चूंकि रात्रि काल में की जाती है इसलिए सिद्धियां प्राप्त करने वालों को (अघोरी, तंत्र-मंत्र करने वाले) काल भैरव की उपासना निशिता काल मुहूर्त में करना चाहिए. इसके लिए शनिवार और रविवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है.
बाबा भैरव के कितने रूप ?
स्कंद पुराण के अवंति खंड के अनुसार भगवान भैरव के 8 रूप हैं. इनमें से काल भैरव तीसरा है. भैरव से ही बाकी 7 और प्रकट हुए जिन्हें अपने रूप और काम के हिसाब से नाम दिए हैं. उनके नाम, रुरु भैरव, संहार भैरव, काल भैरव, असित भैरव, क्रोध भैरव, भीषण भैरव, महा भैरव और खटवांग भैरव.
भैरव से जुड़ी दो सिद्धियां होती हैं
काल भैरव की पूजा दो तरह से की जाती है. राजसिक सिद्धि और तामसिक सिद्धि. दोनों के लिए अलग-अलग विधि अपनानी होती है. तामसिक में मंत्रों, हवन आदि के जरिए करते हैं ऐसे में इस दौरान भूत, प्रेत और पिशाच भी शरीर के साथ जुड़ जाते हैं. इसलिए आपको इष्ट मंत्र की साधना अलग से करनी होती है, नहीं तो ऐसी शक्तियां शरीर को अपने लोक में खींच लेती हैं. यही कारण है कि गृहस्थ जीवन वालों को काल भैरव की सामान्य रूप से पूजा करनी चाहिए.
कैसे करें काल भैरव को प्रसन्न
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और व्रत व पूजा का संकल्प लें.
- भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, व फूल अर्पित करें, जिससे भैरव बाबा प्रसन्न होते हैं.
- काल भैरव की सामान्य रूप से पूजा में उनके मंत्रों का जाप करें, भैरवाष्टक का पाठ करना शुभ होता है.
- शनिवार के दिन उड़द के पकौड़े कड़वे तेल में बनाकर कुत्ते को खिलाएं. इससे बाबा भैरव प्रसन्न होते हैं.
- काल भैरव को जलेबी, इमरती, मालपुए का भोग लगाएं. रविवार या शनिवार को गुग्गल की धूप जलाएं और पूरे घर में इसका धुआं घुमाएं.
- मंदिर जाकर या घर पर काल भैरव चालीसा का पाठ करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- बाबा को जलेबी, इमति, उड़द, नारियल, और मीठे पुए (गुलगुले) का भोग लगाएं.
- काले कुत्ते को काल भैरव की सवारी माना जाता है, इसलिए उन्हें मीठी रोटी या दूध-चावल खिलाएं.
- ‘ॐ काल भैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें.
- अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को काले कपड़े, कंबल या अन्न का दान करें.
सबसे शक्तिशाली भैरव मंत्र
ऐसी मान्यता है कि भगवान काल भैरव का सबसे शक्तिशाली और प्रसिद्ध मंत्र “ॐ ह्रीं बटुकाय आपद उद्धारनाय कुरु कुरु भैरवाय नमः” माना जाता है. इसे आपद उद्धारण मंत्र भी कहते हैं, जो सभी प्रकार के संकटों, बाधाओं और भय को दूर करने में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है.
पूजा का समय और नियम
काल भैरव तंत्र और शिव के उग्र रूप हैं, इसलिए इनकी विशेष पूजा रात के समय लगभग 11:00 बजे से 1:00 बजे के बीच अत्यंत फलदायी माना गया है. सामान्य दिनों में आप सुबह स्नान करके सूर्योदय के बाद भी भगवान शिव के साथ काल भैरव का स्मरण और पूजा कर सकते हैं.
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