शुभेंदु अधिकारी ने कहा, सबका साथ, सबका विकास बंद करो. अल्पसंख्यक मोर्चे को भी बंद करो. हमें तय करेंगे कि जो हमारे साथ है, हम उसका साथ दें. उन्होंने कहा, हम हिंदुओं को बचाएंगे.
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By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: सुप्रिया
Suvendu Adhikari:पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने चौंकाने वाला बयान दिया है. इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे को भी बदलने की जरूरत बताई. शुभेंदु अधिकारी ने कहा, हमें सबका साथ, सबके विकास की बात करने की जरूरत नहीं है. हम तय करेंगे कि जो हमारे साथ है, हम उसका साथ दें. इतना ही नहीं शुभेंदु ने कहा, हम जीतेंगे और हिंदुओं को बचाएंगे. खास बात ये है कि शुभेंदु अधिकारी जिस सबका साथ, सबका विकास को बंद करने की बात कह रहे हैं, वह नारा सबसे पहले पीएम मोदी ने ही दिया था.
शुभेंदु अधिकारी ने एक कार्यक्रम में जय श्री राम का नारा लगाते हुए कहा, सबका साथ, सबका विकास बंद करो. इतना ही नहीं उन्होंने अल्पसंख्यक मोर्चे को भी बंद करने की बात कही. अधिकारी ने कहा, हम संविधान को बचाएंगे.
उपचुनाव में हार की बताई वजह
बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उपचुनाव में बीजेपी की हार की भी वजह बताई. उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव में हजारों लोग अपना वोट नहीं डाल सके. उन्होंने कहा, लोकसभा चुनाव में भी लाखों हिंदुओं को वोट डालने नहीं दिया गया. माना जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी ने अपने भाषण से साफ कर दिया कि बीजेपी बंगाल में हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की दिशा में काम करेगी. बंगाल बीजेपी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों ने एकजुट होकर टीएमसी को वोट दिया. जबकि हिंदू वोटर अलग अलग पार्टियों में बंट गए.
शुभेंदु ने पोर्टल किया लॉन्च
इस मौके पर शुभेंदु अधिकारी ने एक पोर्टल भी लॉन्च किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, जैसा मैंने वादा किया था, मैंने एक पोर्टल लॉन्च किया है, जहां वे मतदाता अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिन्हें वोट नहीं डालने दिया गया. ऐसे लोगों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
पीएम मोदी ने दिया था ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “सबका साथ, सबका विकास” का नारा 2014 के आम चुनाव अभियान के दौरान दिया था. ये नारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी अभियान का मुख्य नारा बन गया था और इसका उद्देश्य सभी भारतीयों के समावेशी और समग्र विकास को बढ़ावा देना था. यह नारा भारत के सभी नागरिकों, विशेष रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों के विकास और सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
बंगाल में मुस्लिम टीएमसी का कोर वोटर
पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों को तृणमूल कांग्रेस का कोर वोट माना जाता है. लेफ्ट-कांग्रेस की भी इस पर नजर रहती है. बीजेपी को भी इस समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटा देखा गया है. हालांकि, नतीजों ने निराश किया है. साल 2018 के बंगाल पंचायत चुनाव में मुस्लिम वोटों को लुभाने के लिए बीजेपी ने मुस्लिम सम्मेलन आयोजित किए थे. बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय से 850 से ज्यादा लोगों को टिकट दिए थे, जिसमें 27 को जीत मिली थी. 2016 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 6 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जो सूबे के 294 सीटों में से करीब-करीब 100 पर निर्णायक भूमिका में हैं. 2010 के बाद से बंगाल में मुस्लिम मतदाता टीएमसी का कोर वोटबैंक माना जाता है.
मेरी बात का PM के बयान से कोई लेना-देना नहीं-शुभेंदु
‘भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर मैंने बहुत दुख के साथ अपनी बात रखी कि भाजपा की राज्य इकाई को पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि उन लोगों के साथ जो भाजपा के साथ नहीं खड़े हैं। मैंने जो कहा- वो राजनीतिक बयान है और इसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे से कोई लेना-देना नहीं है.
‘जब मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाता हूं तो वहां विकास कार्यों से हिंदू और मुस्लिम दोनों को फायदा होता है। फिर भी हमें सुनने को मिलता है कि भाजपा एक हिंदू पार्टी है। हमें काले झंडे दिखाए जाते हैं और हमारी गाड़ियों पर पत्थर फेंके जाते हैं.
‘हमने अब तक जो कुछ भी किया है। वह देश के हर नागरिक के लिए है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। मेरे बयान निजी हैं और इसका पार्टी की सोच से कोई लेना-देना नहीं है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र में अल्पसंख्यक मोर्चा था। मैंने मिलन उत्सव में 700 लोगों के साथ ईद मनाई और भाजपा उम्मीदवार अभिजीत गांगुली को एक भी वोट नहीं मिला। सांप्रदायिक मतदान ने भाजपा को बहुत प्रभावित किया.
