मशहूर अंतरिक्ष यात्री विलियम एंडर्स विमान हादसे में मारे गए हैं. उड़ान भरते ही जहाज का बैलेंस बिगड़ा और जहाज पलटियां खाते हुए समुद्र में गिर गया. वह 1968 के ऐतिहासिक अपोलो 8 (Apollo 8) अंतरिक्ष मिशन के क्रू मेंबर थे.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
दुनिया के मशहूर अंतरिक्ष यात्री विलियम एंडर्स विमान हादसे में मारे गए हैं। उड़ान भरते ही जहाज का बैलेंस बिगड़ा और जहाज पलटियां खाते हुए समुद्र में गिर गया। जहाज में धमाके के साथ ब्लास्ट भी हुआ। 90 साल के रिटायर्ड मेजर जनरल विलियम एंडर्स अपोलो 8 के पूर्व अंतरिक्ष यात्री थे और हादसे के समय विंटेज एयर फोर्स T-34 मेंटर को अकेले उड़ा रहे थे। विलियम के बेटे रिटायर्ड वायु सेना लेफ्टिनेंट कर्नल ग्रेग एंडर्स ने हादसे की पुष्टि की और पिता की मौत होने की भी पुष्टि की। हादसा सैन जुआन द्वीप पर जोन्स द्वीप के उत्तरी छोर पर हुआ। सैन जुआन काउंटी के शेरिफ एरिक पीटर ने बताया कि विमान हादसा भारतीय समयानुसार बीते दिन सुबह करीब 11 बजे हुआ।
फैन्स ने पोस्ट करके दी श्रद्धांजलि
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विमान हादसे में विलियम की मौत होने से अंतरिक्ष यात्रियों में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करके विलियम को श्रद्धांजलि दी जा रही है। एक यूजर ने विलियम की तस्वीर शेयर करके लिखा कि अपोलो-8 के अंतरिक्ष यात्री विलियम एंडर्स को भगवान शांति प्रदान करें। एक और यूजर ने लिखा कि विलियम परिवार के प्रति संवेदाएं। एक और यूजर ने लिखा कि जिसने लोगों को दुनिया के दर्शन कराए, उसे आज हमने खो दिया, भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। एक यूजर ने लिखा कि उनके द्वार खींची गई पृथ्वी की खूबसूरत तस्वीर उन्हें इस दुनिया में जीवित रखेगी।
खींची थी धरती की खूबसूरत तस्वीर
बता दें कि रिटायर्ड मेजर जनरल विलियम एंडर्स ने 24 दिसंबर 1968 को धरती की पहली खूबसूरत तस्वीर क्लिक की थी। छायादार नीले संगमरमर जैसी दिखने वाली धरती की पहली ‘अर्थराइज’ दुनिया को दिखाई थी। बता दें कि विलियम 17 अक्टूबर 1933 को हांगकांग में जन्मे थे। 1964 में नासा के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए उनका सेलेक्शन हुआ। विलियम एंडर्स अमेरिकी नौसेना में कार्यरत थे। एयरफोर्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी उन्होंने काम किया। उन्होंने जेमिनी XI और अपोलो 11 अंतरिक्ष प्रोजेक्ट में बतौर बैकअप पायलट काम किया। अपोलो 8 प्रोजेक्ट में 6000 घंटे से अधिक स्पेस में रहने का रिकॉर्ड उनके नाम है।
चांद से पृथ्वी की पहली रंगीन तस्वीर
एंडर्स द्वारा अंतरिक्ष से ली गई पृथ्वी की पहली रंगीन तस्वीर आधुनिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीरों में से एक है, क्योंकि इसने इस गृह (पृथ्वी) के प्रति मनुष्य के नजरिए को बदल दिया। इस तस्वीर को वैश्विक पर्यावरण आंदोलन को बढ़ावा देने का श्रेय दिया जाता है। तस्वीर ने दिखाया कि अंतरिक्ष से पृथ्वी कितनी नाजुक और अलग-थलग दिखाई देती है.
एंडर्स ने चंद्रमा की चौथी परिक्रमा के दौरान मशहूर तस्वीर को खींचा था, जब वह ब्लैक एंड व्हाइट से कलर पर स्विच कर रही थी। एंडर्स ने कहा, ‘ओह गॉड, वहां उस तस्वीर को देखो। धरती ऊपर आ रही है। वाह, क्या खूबसूरती है!’ अपोलो 8 मिशन दिसम्बर 1968 में पृथ्वी की निचली कक्षा से निकलकर चंद्रमा की यात्रा करने और वापस आने वाला पहला मानव अंतरिक्ष यान था। ये नासा की अब तक की सबसे साहसिक और शायद सबसे खतरनाक यात्रा था। इसने सात महीने बाद अपोलो की चांद पर पहली लैंडिंग के लिए मंच तैयार किया.
अपोलो 8 मिशन को लेकर साझा किए अनुभव
विलियम एंडर्स ने 1997 में नासा के एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि अपोलो 8 मिशन आसान है। लेकिन मैंने राष्ट्र, देशभक्ति को ध्यान में रखते हुए अपने मिशन को पूरा किया। उन्होंने मिशन शुरू होने से पहले अनुमान लगाया था कि लगभग तीन में से एक प्रतिशत मौका हो सकता है कि हमें इसमें पूरी तरह सफल न हो। लेकिन ये सब अच्छे से हो गया। उन्होंने बताया कि उस वक्त हमने महसूस किया पृथ्वी कितनी नाजुक दिखती थी.
फैक्ट फाइल
वह 1968 के ऐतिहासिक अपोलो 8 (Apollo 8) अंतरिक्ष मिशन के क्रू मेंबर थे। यह चांद की कक्षा में चक्कर लगाने वाला पहला मानवयुक्त मिशन था।
उन्हें दुनिया की सबसे प्रसिद्ध तस्वीरों में से एक, अंतरिक्ष से ली गई ‘अर्थराइज’ (Earthrise) तस्वीर खींचने के लिए हमेशा याद किया जाता है।
