मस्क-नेतन्याहू को पीछे छोड़ जगह पाई, यह उन्हें दूसरी बार यह सम्मान मिला है. ट्रंप ने कमला हैरिस को हराकर चुनाव जीते हैं.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Donald Trump Time Magazine: जिस टाइम मैगजीन का ट्रंप विरोध कर चुके हैं. वही टाइम मैगजीन ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को 2024 के लिए पर्सन ऑफ द ईयर चुना. ट्रम्प को 2016 में ये सम्मान मिल चुका है. पर्सन ऑफ द ईयर बनने के बाद अब ट्रम्प न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग डे की शुरुआती बेल बजाएंगे. इस साल खिताब के लिए ट्रम्प, कमला हैरिस, इलॉन मस्क, बेंजामिन नेतन्याहू और वेल्स की राजकुमारी केट मिडलटन के बीच मुकाबला था.
गांधी इकलौते भारतीय जिन्हें कवर पर जगह दी गई
साल 1930 में टाइम मैगजीन ने महात्मा गांधी को पर्सन ऑफ द ईयर चुना था. वे मैगजीन के कवर पर जगह पाने वाले इकलौते भारतीय हैं. पिछले साल, 2023 का ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ पॉप आइकन टेलर स्विफ्ट को दिया गया था. टाइम का मकसद हमेशा ऐसे शख्सियतों या समूहों को चुनना होता है जिन्होंने “अच्छे या बुरे तरीके से दुनिया को सबसे अधिक आकार दिया हो.” हालांकि कई राष्ट्रपति-निर्वाचित इस सम्मान के हकदार बने हैं. लेकिन इसके बावजूद किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि ट्रंप को यह सम्मान मिलेगा. हिलेरी क्लिंटन वोटिंग में दूसरे नंबर पर रहीं. टाइम मैगज़ीन की प्रबंध संपादक ने कहा कि ट्रंप को पसंद में जोड़ना ‘स्पष्ट’ था. मैगज़ीन ने पाठकों से वोटिंग के ज़रिए पूछा था कि किसे पर्सन ऑफ द ईयर का टाइटल मिलना चाहिए लेकिन आख़िरी फ़ैसला संपादकों को लेना था.
“तो इस साल क्या होगा
बेहतर या बदतर?” नैन्सी गिब्स ने टाइम पत्रिका में लिखा है. “डोनाल्ड ट्रम्प के लिए चुनौती यह है कि इस सवाल के जवाब पर देश में कितनी गहरी असहमति है.” टाइम मैगज़ीन के ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ को कुछ खोया हुआ सा महसूस हो रहा है. पिछले साल पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट पर्सन ऑफ द ईयर चुनी गई थीं. साल 2023 में पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट को पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया और उनकी तस्वीर टाइम मैगजीन में छापी गई.
दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेतृत्व को उलट दिया है
टाइम मैगज़ीन के ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ को कुछ खोया हुआ सा महसूस हो रहा है. ट्रम्प पर लिखे एक निबंध में टाइम पत्रिका लिखती है कि उन्होंने “दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेतृत्व को उलट दिया है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की राजनीतिक दिशा को प्रभावी ढंग से बदल दिया है.”
पत्रिका यह भी बताती है कि वह राष्ट्रपति-निर्वाचित व्यक्ति को पर्सन ऑफ द ईयर नामित करके हाल के चलन को जारी रख रही है. बराक ओबामा को 2012 और 2008 में यह उपाधि दी गई थी, और जॉर्ज डब्ल्यू बुश को 2004 और 2000 में यह उपाधि दी गई थी.
ट्रम्प कई बार टाइम मैगजीन की आलोचना कर चुके हैं
डोनाल्ड ट्रम्प और टाइम मैगजीन के बीच तल्खी भरे रिश्ते रहे हैं. ट्रम्प कई बार इसकी आलोचना कर चुके हैं. 2012 में उन्होंने कहा था कि टाइम मैगजीन ने उन्हें 100 सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल न करके सारी विश्वसनीयता खो दी है.
2015 में तत्कालीन जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के पर्सन ऑफ द ईयर बनने पर ट्रम्प ने ट्विटर (अब X) पर लिखा- मैंने आपको बताया था कि टाइम मैगजीन मुझे कभी भी पर्सन ऑफ द ईयर नहीं चुनेगी, भले ही मैं सबसे ज्यादा पसंदीदा हूं. उन्होंने ऐसे इंसान को चुना है जो जर्मनी को बर्बाद कर रहा है.
2016 में पर्सन ऑफ द ईयर बनने पर ट्रम्प ने इसे बड़ा सम्मान बताया था. इसके अगले साल ट्रम्प का कहना था कि अगर वो इंटरव्यू और फोटोशूट के लिए तैयार हो जाते तो उन्हें 2017 में भी यह खिताब दिया जाता. हालांकि टाइम मैगजीन ने इस दावे को खारिज कर दिया था.
गांधी इकलौते भारतीय जिन्हें कवर पर जगह मिली
साल 1930 में टाइम मैगजीन ने महात्मा गांधी को पर्सन ऑफ द ईयर चुना था. टाइम मैगजीन ने एडोल्फ हिटलर को भी पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया. 1938 में टाइम मैगजीन के कवर पेज पर हिटलर की तस्वीर के ऊपर लटकते शव दिखाए गए थे. पुतिन भी पर्सन ऑफ द ईयर बन चुके हैं. 2007 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन को पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया था.
