दावा: अगले हफ्ते संसद में पेश हो सकता है बिल, लोकसभा, राज्य विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने का प्रस्ताव
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Delhi News .केंद्रीय कैबिनेट ने वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को मंजूरी दी है. सरकार इस बिल पर आम सहमति बनाना चाहती है, लिहाजा संसद से बिल को चर्चा के लिए जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) के पास भेजा जाएगा. जेपीसी इस बिल पर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी.
सितंबर में सरकार ने इसके लिए बनाई गई हाईलेवल कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी दी थी, जिसमें लोकसभा, राज्य विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को चरणबद्ध तरीके से एक साथ कराने का प्रस्ताव था.
सूत्रों के मुताबिक, इसे अगले हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है. इसके बाद बिल चर्चा के लिए जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के पास भेजा जाएगा, ताकि इस पर आम सहमति बन सके. बिल में लोकसभा, राज्य विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने का प्रस्ताव है. ये पास हुआ तो 2029 तक देशभर में एक साथ चुनाव होंगे.
क्या ये देश में पहली बार होगा
नहीं, आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं. इसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई. इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई.
क्या है वन नेशन वन इलेक्शन
राज्यों के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं. वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब है कि पूरे देश में एकसाथ ही लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव हों. यानी मतदाता लोकसभा और राज्य के विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय पर या चरणबद्ध तरीके से अपना वोट डालेंगे.
विपक्ष ने बिल का विरोध किया
पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने कहा, ‘हमारे सांसद इस क्रूर कानून का पूरी ताकत से विरोध करेंगे, बंगाल कभी भी दिल्ली की तानाशाही सनक के आगे नहीं झुकेगा.’ वहीं सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा, ‘एक देश- एक चुनाव’ लोकतंत्र के खिलाफ बहुत बड़ा षड्यंत्र है. सत्ता पक्ष एक साथ पूरे देश पर कब्जा करना चाहता है.’
2029 तक लागू हो सकता है वन नेशन-वन इलेक्शन
कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक देश-एक चुनाव लागू करने के लिए कई राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल घटेगा. जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के आखिर में हुए हैं, उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है. विधि आयोग के प्रस्ताव पर सभी दल सहमत हुए तो यह 2029 से ही लागू हो सकता है. इसके लिए दिसंबर 2026 तक 25 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने होंगे.
शाह ने सरकार के 100 दिन पूरे होने पर दिए थे संकेत
मोदी सरकार पिछले कार्यकाल से ही एक देश एक चुनाव को लेकर गंभीर थी. पीएम मोदी ने कई मौकों पर और चुनावी जनसभाओं में भी वन नेशन वन इलेक्शन की बात कही थी. हाल ही में एनडीए सरकार के 100 दिन पूरे होने पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वन नेशन वन इलेक्शन के एनडीए के संकल्प को दोहराया था. अब संसद के शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव पर विधेयक पेश किया जाएगा.
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने किया था जिक्र
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से दिए गए भाषण में वन नेशन-वन इलेक्शन का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि बार-बार चुनाव देश की प्रगति में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं. एक देश एक चुनाव के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने इसी साल 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. वन नेशन वन इलेक्शन की यह रिपोर्ट 18 हजार 626 पेज की है.
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद पैनल के सुझाव
सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 तक बढ़ाया जाए.
हंग असेंबली (किसी को बहुमत नहीं), नो कॉन्फिडेंस मोशन होने पर बाकी के कार्यकाल के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं.
पहले फेज में लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं, उसके बाद दूसरे फेज में 100 दिनों के भीतर लोकल बॉडी के इलेक्शन कराए जा सकते हैं.
चुनाव आयोग लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से सिंगल वोटर लिस्ट और वोटर आईडी कार्ड तैयार करेगा.
कोविंद पैनल ने एक साथ चुनाव कराने के लिए उपकरणों, जनशक्ति और सुरक्षा बलों की एडवांस प्लानिंग की सिफारिश की है.
