पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत और अमेरिका का संयुक्त बयान जारी हुआ है.
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By : DB News Update | Edited By: Prince Awasthi
India-US Joint Statement: पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज सुबह (अमेरिकी समयानुसार गुरुवार रात) हुई द्विपक्षीय बैठक हुई. जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. इय दौरान पाकिस्तान सरकार को हिदायत दी गई कि वह अफनी सरज़मीं का इस्तेमाल सीमा पार आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए न होने दें. दोनों नेताओं ने पाकिस्तान की धरती से संचालित हो रहे आतंकी समूहों के खिलाफ अपने अभियान तेज करने पर जोर दिया.
खबरों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए उन्हें एक असाधारण नेता बताया और उनके नेतृत्व में वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव का ज़िक्र किया. बयान के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गैर-ज़रूरी विवादों से दूर रहते हैं और उनमें ऐसी खूबियां हैं जो उन्हें एक अनोखा राजनीतिक व्यक्तित्व बनाती हैं. उन्होंने आगे कहा कि अगर कभी मोदी के जीवन पर कोई फ़िल्म बनती है, तो ऐसा हॉलीवुड अभिनेता मिलना मुश्किल होगा जो उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व शैली को पूरी तरह से पर्दे पर उतार सके. ट्रंप ने यह भी कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी भारत का नेतृत्व करते रहेंगे, तब तक देश वैश्विक मामलों में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिका निभाता रहेगा. ऐसी टिप्पणियां दोनों नेताओं के बीच रहे करीबी राजनयिक संबंधों और भारत व अमेरिका के बीच व्यापक रणनीतिक रिश्तों को दर्शाती हैं.
प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक अक्सर भारत की आर्थिक वृद्धि, बुनियादी ढांचे के विस्तार, राजनयिक पहुंच और बढ़ते वैश्विक प्रभाव को उनके नेतृत्व के सबूत के तौर पर पेश करते हैं. वहीं, आलोचकों की राय उनकी नीतियों और कामकाज के तरीके को लेकर अलग हो सकती है. ज़्यादातर राजनीतिक तारीफ़ों की तरह, ट्रंप की ये बातें निष्पक्ष मूल्यांकन के बजाय उनकी निजी राय और नज़रिए को दिखाती हैं. इसके बावजूद, इन टिप्पणियों ने लोगों का ध्यान खींचा है क्योंकि ये एक प्रमुख वैश्विक नेता की ओर से आई हैं और आज की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत के महत्व को रेखांकित करती हैं.
अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दे
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा दोनों देशों का संयुक्त बयान जारी किया गया. इस बयान में पाकिस्तान का नाम साफ तौर पर आतंकवाद से जोड़ कर लिखा गया. बयान में लिखा गया है, ‘दोनों नेताओं (मोदी और ट्रंप) ने पाकिस्तान से 26/11 मुंबई और पठानकोट हमले के अपराधियों को जल्द से जल्द सजा देने के लिए कहा. पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि उसकी सरज़मीं का उपयोग सीमा पार आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए न किया जाए.’
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में पीएम मोदी ने ट्रंप को बताया
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में पीएम मोदी ने मिस्टर ट्रंप को बताया कि भारत की प्रतिक्रिया नपी-तुली और तनाव न बढ़ाने वाली थी और भारत ने सिर्फ़ पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया था.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चर्चा नहीं हुई
मिस्त्री ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को साफ़ तौर पर बताया कि इन घटनाओं के दौरान किसी भी स्तर पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील या भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई. सैन्य कार्रवाई रोकने पर चर्चा सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों सेनाओं के मौजूदा कम्युनिकेशन चैनलों के ज़रिए हुई और इसकी शुरुआत पाकिस्तान के अनुरोध पर हुई थी.
उन्होंने आगे कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी ने मज़बूती से कहा कि भारत मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता और न ही कभी करेगा. इस मामले पर भारत में पूरी राजनीतिक सहमति है.
हालांकि, बाद में दिन में पत्रकारों से बात करते हुए – व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ अपनी बैठक से कुछ घंटे पहले – मिस्टर ट्रंप ने दावा करना जारी रखा कि उन्होंने युद्ध रुकवाया था और साथ ही यह भी कहा कि पीएम मोदी “बहुत प्रभावशाली” रहे हैं.
भारतीय समकक्ष से पाकिस्तान ने बात करने की इच्छा जताई थी
भारत ने कई बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि पाकिस्तान के साथ सैन्य कार्रवाई रोकने के फ़ैसले में न तो अमेरिका और न ही किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका थी. नई दिल्ली का कहना है कि पाकिस्तान के ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशन्स’ ने 10 मई को अपने भारतीय समकक्ष से बात करने की इच्छा जताई थी. यह बात तब हुई जब भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमले किए थे, जिनमें महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस भी शामिल था.
