तुलसी विवाह के दिन विधि-विधान से भगवान शालिग्राम और माता तुलसी की पूजा करने से जीवन में खुशहाली व सुख-समृद्धि होती है
By : DB News Update | Edited By : सुप्रिया
Tulsi Vivah 2024 Upay : विष्णु भगवान चार माह योग निद्रा के बाद जागते हैं. इस दिन पावन दिन पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की आराधना की जाती है. तुलसी विवाह का पर्व 13 नवंबर 2024, बुधवार के दिन पड़ रहा है. इस दिन लक्ष्मी जी के स्वरुप तुलसी जी का विवाह विष्णु जी के स्वरुप शालिग्राम भगवान के साथ किया जाता है. आइए जानते हैं पंडित प्रदीप मिश्रा से तुलसी विवाह और उनके पुण्य प्रताप के बारे में…
तुलसी माता को अपनी बेटी मान कर कन्या दान करें
हिंदू धर्म में कन्या दान को महा दान माना गया है. तुलसी विवाह के दिन जिन दंपती की बेटी नहीं है या बेटी की कामना रखने वाले लोग तुलसी विवाह के दिन तुलसी माता को अपनी बेटी मान कर उनका कन्या दान करें. इस दिन कन्या दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. इस दिन वस्त्र और आभूषण का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है इस दिन इनका दान करने से व्यक्ति को दोगुना लाभ मिलता है.
स्नान -दान से शुभ फल और पुण्य की प्राप्ति
तुलसी विवाह का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है.इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान से शुभ फल और पुण्य की प्राप्ति होती है. तुलसी विवाह के दिन विधि-विधान से भगवान शालिग्राम व माता तुलसी की पूजा करने से जीवन में खुशहाली व सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
तुलसी विवाह का महत्व
तुलसी विवाह को हिंदू धर्म के अनुसार अधिक महत्व दिया जाता है। तुलसी विवाह के दिन शालिग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है और माता तुलसी के साथ विवाह किया जाता है। पुराणों के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु अपनी चार माह की नींद पूरी करके उठते हैं। जिसके बाद से ही सभी शुभ कामों की शुरुआत हो जाती है। तुलसी के पौधे की पूजा प्रत्येक घर में होती है। हिंदू धर्म के अनुसार तुलसी पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इसलिए प्रत्येक घर में तुलसी विवाह को अधिक महत्व दिया जाता है।तुलसी विवाह को शालिग्राम से सनातन धर्म के अनुसार पूरे विधि – विधान से कराया जाता है। तुलसी विवाह के दिन कन्या दान भी किया जाता है।क्योंकि कन्या दान को सबसे बड़ा दान माना जाता है.
तुलसी विवाह पूजा विधि
तुलसी विवाह के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठें। इसके बाद स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे को लाल चुनरी ओढ़ाएं.
इसके बाद तुलसी के पौधे पर श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं।इसके बाद पत्थर रूपी शालिग्राम को तुलसी के पौधे के साथ स्थापित करें.
शालिग्राम को स्थापित करने के बाद तुलसी के पौधे का विधिवत की पंडित जी से विवाह कराएं.
तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे और शालिग्राम की सात परिक्रमा कराएं और अंत में तुलसी जी की आरती गाएं.
तुलसी विवाह व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राक्षस कुल में एक अत्यंत ही सुदंर कन्या का जन्म हुआ। जिसका नाम वृंदा रखा गया। वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु की पूजा करती थी और उनकी बहुत बड़ी भक्त भी थी। वह कन्या जैसे ही बड़ी हुई उसका एक असुर जलंधर से विवाह हो गया। वृंदा की भक्ति के कारण जलंधर को और भी ज्यादा शक्तियां प्राप्त हो गई। जलंधर वृंदा की भक्ति के कारण इतना शक्तिशाली हो गया था कि वह न केवल मनुष्य और देवताओं पर बल्कि राक्षसों पर भी अत्याचार करने लगा था। वह इतना बलशाली हो गया था कि उसे हरा पाना किसी के भी वश में नहीं था। सभी देवी- देवता इस समस्या के निदान के लिए भगवान विष्णु की शरण मे गए और मदद मांगने लगे। देवाताओं को इस समस्या से निकालने के लिए भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर लिया और वृंदा का पतिव्रता धर्म नष्ट कर दिया। जिसकी वजह से जलंधर की शक्तियां कम हो गई और वह युद्ध में मारा गया। जिसके बाद वृंदा ने भगवान विष्णु के इस छल के कारण उन्हें पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया। जिसके बाद सभी देवी- देवताओं ने वृंदा से अपना श्राप वापस लेने का आग्रह किया। वृंदा ने अपना श्राप तो वापस ले लिया। लेकिन खुद को अग्नि में भस्म कर लिया। भगवान विष्णु ने वृंदा की राख से एक पौधा लगाया और उसे तुलसी नाम दे दिया और यह भी कहा कि मेरी पूजा के साथ के पृथ्वीं के अंत तक तुलसी की भी पूजा होगी.
कन्यादान का फल देता है तुलसी विवाह
तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के दिन पड़ता है। तुलसी विवाह के दिन तुलसी के पौधे का विवाह शालिग्राम के साथ किया जाता है। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष फलदायी होता है। जिनके घर में बेटियां नही होती।माता-पिता विवाह के समय कन्यादान करते हैं। जिसे सबसे बड़ा दान भी माना जाता है। लेकिन जिनके घर में कन्याएं नहीं होती। वह इस दिन विधि पूर्वक तुलसी का विवाह कर सकते हैं और कन्यादान का पुण्य कमा सकते हैं। इसी कारण तुलसी विवाह को अत्याधिक महत्व दिया जाता है.
