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जानें जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़े हुए तथ्य और उड़ीसा में तैयारी

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Last updated: 19/03/2026 11:50 AM
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5 Min Read
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 जगन्नाथ रथ यात्रा की 7 जुलाई 2024 से शुरू होगी. मान्यता है कि यात्रा के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति के संकट दूर होते हैं. भव्य रथों पर सवार होकर भ्रमण करते हैं.

Source : DB News Update  

Contents
 जगन्नाथ रथ यात्रा की 7 जुलाई 2024 से शुरू होगी. मान्यता है कि यात्रा के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति के संकट दूर होते हैं. भव्य रथों पर सवार होकर भ्रमण करते हैं.यात्रा में 3 रथ शामिलरथ की ऊंचाई 13 मीटरसुभद्रा जी के रथ का रंग लाल और कालाजगन्नाथ रथ की खासियत क्या है?

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Jagannath Rath Yatra 2024: हर साल उड़ीसा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ यात्रा निकाली जाती है. जिसमें भगवान जगन्नाथ के रूप में श्रीकृष्ण, उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम भव्य रथों पर सवार होकर भ्रमण करते हैं.जगन्नाथ रथ यात्रा का ये उत्सव 10 दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से होती है समापन दशमी तिथि को होता है.

यात्रा में 3 रथ शामिल

इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 7 जुलाई 2024 को शुरू होगी और इसकी समाप्ति 16 जुलाई 2024 को होगी. जगन्नाथ यात्रा में 3 रथ शामिल होते है. तीनों देवी-देवता के लिए अलग-अलग रथों का निर्माण किया जाता है. इन रथों को बनाने की शुरुआत अक्षय तृतीया से होती है. रथों के निर्माण के लिए दारु नामक नीम की लड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है, ये बेहद पवित्र और हल्की होती हैं.

रथ की ऊंचाई 13 मीटर

रथ में कील या कांटों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, न ही कोई धातु उपयोग में लेते हैं. श्रीकृष्ण के रथ का रंग लाल और पीला होता है. इसकी ऊंचाई 13 मीटर होती है.

सुभद्रा जी के रथ का रंग लाल और काला

वहीं सुभद्रा जी के रथ का रंग लाल और काला होता है. इसकी ऊंचाई 12.9 मीटर होती है. इस पर देवी दुर्गा का प्रतीक होता है. साथ ही बलराम जी का रथ हरे-लाल रंग का होता है. इसकी ऊंचाई 13.2 मीट होती है.

जगन्नाथ रथ की खासियत क्या है?

  • भगवान जगन्नाथ के 45.6 फीट ऊंचे नंदीघोष रथ के निर्माण के लिए अलग-अलग तरह की लकड़ी के कम से कम 742 लट्ठों का इस्तेमाल किया गया है. भगवान बलराम के 45 फीट ऊंचे तालध्वज रथ के लिए 731 लट्ठों का इस्तेमाल किया गया है और देवी सुभद्रा के 44.6 फीट ऊंचे दर्पदलन रथ के लिए 711 लट्ठों का इस्तेमाल किया गया है.
  • रथ यात्रा में इस्तेमाल किए गए तीनों रथों में से प्रत्येक की अलग-अलग विशेषताएं और आयाम हैं.
  • भगवान जगन्नाथ का रथ, नंदीघोष, 18 पहियों के साथ 45 फीट की प्रभावशाली ऊंचाई का होता है, जो हिंदू महाकाव्य, भगवद गीता के 18 अध्यायों का प्रतीक है.
  • बलदेव के रथ, तलध्वज में 16 पहिए होते हैं और यह लगभग 44 फीट ऊंचा होता है.
  • वहीं देवी सुभद्रा का रथ, देवदलन, 14 पहियों के साथ लगभग 43 फीट ऊंचा होता है.
  • तीनों रथों को जटिल नक्काशी, चमकीले रंगों और सजावटी रूपांकनों से शानदार ढंग से सजाया जाता है, जो देवताओं की दिव्य यात्रा का प्रतीक है.
  • मंदिर के एक अधिकारी ने बताया, “हमें वन विभाग से आवश्यक लकड़ी का बड़ा हिस्सा प्राप्त हुआ था. इन सभी रथों का निर्माण किए जाने से पहले एक औपचारिक पूजा भी की गई थी.”
  • इस शुभ दिन से जगन्नाथ मंदिर की 42 दिवसीय चंदन यात्रा की भी शुरू हो जाती है. चंदन यात्रा 42 दिनों तक दो भागों में मनाई जाती है. इनमें से एक बहरा (बाहरी) चंदन होता है और दूसार भीतरा (आंतरिक) चंदन होता है और दोनों 21 दिनों का होता है.
  • पहले 21 दिनों में, जगन्नाथ मंदिर के मुख्य देवताओं – मदनमोहन, राम, कृष्ण, लक्ष्मी और सरस्वती – की प्रतिनिधि मूर्तियों को गर्मियों की शाम के दौरान जल क्रीड़ा का आनंद लेने के लिए मंदिर से नरेन्द्र तालाब तक जुलूस के रूप में ले जाया जाता है.
  • पांच शिव जिन्हें पंच पांडव के नाम से जाना जाता है, अर्थात् लोकनाथ, यमेश्वर, मार्कंडेय, कपाल मोचन और नीलकंठ, भी मदनमोहन के साथ नरेंद्र तालाब तक जाते हैं. मदनमोहन, लक्ष्मी और सरस्वती को एक नाव में और राम, कृष्ण और पंच पांडवों को दूसरी नाव में रखा जाता है ताकि देवता संगीत और नृत्य के साथ तालाब में शाम की सैर का आनंद ले सकें. वहीं चंदन यात्रा के अंतिम 21 दिन मंदिर के अंदर मनाए जाते हैं.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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