भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन को देशभर में जन्माष्टमी त्योहार को बड़े धूम-धाम के साथ मनाने की प्रथा है. 2026 में कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को है. जानें श्रीकृष्ण की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त.
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Janmashtami 2026: हिंदू धर्म को मानने वालों के लिए श्रद्धा के केन्द्र भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की तारीख नजदीक आ गई है. हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी देश भर के हिंदू धर्मावलंबियों में उत्साह, उमंग देखने को मिल रहा है. भगवान कृष्ण के द्वारा जन्म से लेकर महाभारत युध्य तक जितनी भी लीलाएं की गई हैं. उनका चित्रण शोभायात्रा निकालकर करने जेन-जेड की पीढ़ी को अवगत कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आज का GEN-Z भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के आशय को आसानी से समझ सके और भगवान श्रीकृष्ण को आदर्श के रूप मानते हुए अपने जीवन की कठिनाइयों से निकलकर आगे बढ़ सके. सनातन धर्म को मानने वाले धर्मावलंबी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने के पीछे आने वाली पीढ़ी को लेकर भी चिंतित नजर आ रहे हैं. इसी कारण जगह-जगह बैठकें आयोजित हो रही हैं. हिंदू धर्म के प्रत्येक मंदिर में सामूहिक रूप से बैठकें आयोजित की जा रही हैं और इस बात का भी चिंतन किया जा रहा है कि भगवान श्री कृष्ण को आज का युवा केवल मनोरंजन की दृष्टि से न देखे, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण को आत्मसात भी करे. भगवान श्रीकृष्ण महाभारतकाल में युध्य के दौरान श्रीमद् भगवत गीता के माध्यम से जिस प्रकार से अर्जुन के दिव्य चक्षु खोलकर उन्हें गीता का उपदेश दिया और अर्जुन का अज्ञान, मोह और भ्रम दूर किया. उसी प्रकार से जेन-जेड भी मायाजाल में दिग्भ्रमित न हो, अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता रहे. जिससे सफलता की उंचाई तक पहुंच सके. केवल इसी बात को लेकर चिंतन-मनन धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है. आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हम सब मिलकर कैसे मनाएं और जन्माष्टमी का व्रत रखने से किन मनोकामनाओं की पूर्ति होती है?
श्रीकृष्ण का 2026 में मनाया जाएगा 5253वां जन्मोत्सव
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 4 सितंबर 2026 को देश भर में मनाया जाएगा. 2026 में भगवान श्रीकृष्ण का यह 5253वां जन्मोत्सव है. जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धालुओं के लिए न केवल आस्था का पर्व है. प्रेम-सौहार्द का पर्व भी है. भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का प्रमुख त्योहार है.
2026 में कब है जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था. यह शुभ दिन 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:25 से प्रारंभ है और अगले दिन 5 सितंबर को सुबह 12:13 पर समाप्त होगी. भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने का यह समय शुभ है.
जन्माष्टमी पर निशिता पूजा का समय
4 सितंबर 2026 – रात 11:57 से 5 सितंबर-12:43 रात तक
जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का समय
4 सितंबर 2026 – सुबह 12:29 से 11:04 रात्रि
कृष्ण जन्माष्टमी व्रत पारण समय
5 सितंबर 2026- सुबह 06:01 के बाद
जन्माष्टमी व्रत की सही विधि
भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करके व्रत प्रारंभ करना चाहिए और जो भी भक्त एकादशी के दिन उपवास रखते हैं और एकादशी के दिन नियमों का पालन करते हैं. उन सभी नियमों का पालन जन्माष्टमी के उपवास के दौरान भी करना चाहिए. जन्माष्टमी के व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन स्नान के पश्चात पीले रंग का वस्त्र अवश्य पहनना चाहिए. जन्माष्टमी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद एक निश्चित समय पर तोड़ने का विधान है.
जन्माष्टी की रात क्या करें
- जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का अक्षत (चावल) और फूल से अर्चन करना चाहिए.
- श्रीकृष्ण की मूर्ति का रात 12 बजे के बाद दुग्धाभिषेक किया जाना चाहिए.
- श्रीकृष्ण का दूध, दही, शहद, घी और जल से स्नान कराना चाहिए.
- भगवान श्रीकृष्ण के अभिषेक के बाद शंख बजाने का प्रथा है.
- कृष्ण जन्म के समय घंटी-घड़ियाल बजाना चाहिए.
- ब्राह्मण पुरोहित से श्रीकृष्ण का वैदिक मंत्रोच्चारण से आवाहन किया जाना चाहिए.
- भगवान श्रीकृष्ण को भक्त के सामर्थ्य अनुसार श्रीकृष्ण को 56 अलग-अलग प्रकार का भोग अर्पित करना चाहिए.
- लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण को झूला झुलाया जाना चाहिए.
- इस मंत्र का जाप अवश्य करें- ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥
- मंत्र का जाप के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण का ढोल-नगाड़े बजाकर उत्सव मनाया जाता है.
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