जन्माष्टमी, राखी जैसे त्योहारों और शादियों के सीजन से ठीक पहले चीनी के दाम पर सबसे ज्यादा उछाल, कीमतों ने आम जनता की टेंशन में डाला.
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Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Sugar Crisis 2026: चीनी के दाम में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है. महज 7 दिनों के अंतराल में 40 रुपये किलो बिकने वाली चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलो पहुंच गए. जन्माष्टमी, राखी और शादी के सीजन से ठीक पहले बढ़ी कीमतों ने आम आदमी को टेंशन में डाल दिया है. देशभर में शक्कर की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. चीनी के दाम स्थानीय स्तर पर नहीं बढ़ रहे हैं. बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते जा रहे हैं. इसके पीछे बड़े व्यापारियों की मुनाफाखोरी छिपी है या फिर सरकार के हाथ से महंगाई पर नियंत्रण खोता जा रहा है? यह जांच का विषय बन गया है. क्योंकि देश भर में खाद्य सामग्री के रेट आउट ऑफ कन्ट्रोल होते जा रहे हैं.
देशभर में बढ़ते जा रहे चीनी के दाम
चीनी के दाम देशभर में बढ़ते जा रहे हैं. विगत एक सप्ताह से लगातार चीनी के दाम बढ़ रहे हैं. मध्य प्रदेश, पंजाब सहित देश के अनेक हिस्सों में चीनी के दामों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है. मीडिया रिपोर्ट से पता चल रहा है कि ओडिशा, असम, दिल्ली, गोवा, केरल, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भी चीनी की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो पहुंच चुके हैं.
यूपी में चीनी के रेट सबसे ज्यादा
मीडिया रिपोर्ट से पता चला है कि उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यहां मिलों से निकलने वाली चीनी का थोक भाव इतिहास के सबसे उच्चतम स्तर 5500-6000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है. इसके चलते खुदरा बाजारों में चीनी सीधे 65-68 रुपये प्रति किलो बिक रही है. वहीं, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में अच्छी क्वॉलिटी की चीनी 65-70 रुपये प्रति किलो में बिकने लगी है. महज एक महीने के भीतर इन शहरों में चीनी की कीमतों में 20-30 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
सबसे ज्यादा कहां पैदा होती है चीनी
महाराष्ट्र- चीनी उत्पादन के क्षेत्र में महाराष्ट्र सबसे ऊपर बताया जा रहा है. महाराष्ट्र में 200 से ज्यादा चीनी मिलें हैं, जिसने सरकार और उद्योगपतियों को कमाई हो रही है. महाराष्ट्र का एक बड़ा फायदा इसकी ट्रॉपिकल और समुद्री जलवायु है. सही तापमान और नमी का मेल गन्ने को समय से पहले सूखे बिना अच्छी तरह से बढ़ने में मदद करता है. राज्य में सर्दियों छोटी होती हैं और धूप अच्छी मिलती है. इससे गन्ने में सुक्रोज की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है. एक और बड़ी ताकत महाराष्ट्र का सहकारी चीनी मिल मॉडल है. इसमें किसान उद्योग के प्रबंधन में सीधी भूमिका निभाते हैं. प्रमुख चीनी उत्पादक केंद्रों में पुणे, सतारा, सोलापुर, अहमदनगर और कोल्हापुर शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश – यूपी को चीनी उद्योग के मामले में भारत का कटोरा कहा जाता है. यहां लगभग 8.92 मिलियन मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है. देश में गन्ने की खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र यहीं है. हालांकि कुछ सीजन में तैयार चीनी के उत्पादन में महाराष्ट्र आगे हो सकता है लेकिन खेती के क्षेत्र के हिसाब से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य बना हुआ है. राज्य के उपजाऊ गंगा यमुना के मैदान गन्ने की खेती और सिंचाई के लिए बेहतरीन स्थिति प्रदान करते हैं. हालांकि उत्तर प्रदेश की जलवायु सब-ट्रॉपिकल है. यहां गर्मियां काफी गर्म और सर्दियां ठंडी होती हैं. यह स्थितियां गन्ने के पकने की अवधि और चीनी रिकवरी दर को प्रभावित कर सकती हैं. प्रमुख प्रोडक्शन क्लस्टर में मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर और गोरखपुर शामिल हैं.
कर्नाटक – भारत के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कर्नाटक तीसरे स्थान पर आता है. यहां लगभग 4.71 मिलियन मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है. साथ ही देश के सबसे जरूरी शुगर हब में से एक है. गन्ने की खेती अलग-अलग मौसम और जलवायु वाले इलाकों में होती है. उत्तरी कर्नाटक, खासकर बेलगावी और बागलकोट जैसे इलाकों में पड़ोसी महाराष्ट्र जैसे ही जलवायु परिस्थितियों हैं. दक्षिणी इलाकों को कावेरी बेसिन से पानी की उपलब्धता का फायदा मिलता है. राज्य की चीनी मिलों ने तेजी से आधुनिक तकनीक अपनाई है. कई मिलें चीनी उत्पादन के साथ-साथ इथेनॉल बनाने और बिजली बनाने का काम भी करती हैं. इससे उन्हें गन्ने से अतिरिक्त कमाई होती है.
गुजरात – देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में चौथे स्थान पर गुजरात का नाम आता है. गुजरात में चीनी का उत्पादन लगभग 1.1 मिलियन मीट्रिक टन का होता है. राज्य का चीनी उद्योग खेती के व्यवस्थित तरीकों और सहकारी चीनी मिल के मजबूत नेटवर्क के लिए जाना जाता है. गन्ने का उत्पादन मुख्य रूप से दक्षिण गुजरात के मैदानी और तटीय इलाके में होता है. सहकारी संस्थाएं किसानों को चीनी मिलों से जोड़ने पर गन्ने की प्रोसेसिंग का प्रबंध करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं.
तमिलनाडु-भारत का दक्षिणी क्षेत्र तमिलनाडु का नाम भी उन शीर्ष 5 राज्यों की सूची में शामिल है. जहां लगभग 0.9 मिलियन मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है. राज्य की गर्म जलवायु की वजह से यहां साल के काफी लंबे समय तक गन्ने की खेती और पेराई का काम चलता रहता है. कई इलाकों में किसान पानी के बेहतर इस्तेमाल और गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए आधुनिक खेती के तरीकों और ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल करते हैं. इन तरीके से तमिलनाडु को भारत के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों की जगह बनाए रखने में मदद मिलती है.
