अमेरिका और चीन के बीच जारी टैरिफ वॉर एक खतरनाक मोड़ पर आ गया है. हाल ही में अमेरिकी रक्षा सचिव ने चीन को धमकी दी है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
US-China Tariff War: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अमेरिका पर वार किया है, जिस पर अमेरिका रक्षा सचिव ने भी पलटवार किया है. बताया जा रहा है कि अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक बयान में कहा है कि अमेरिका चीन के साथ टैरिफ की धमकियों और व्यापार युद्ध को लेकर पूरी तरह से तैयार है. उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को और भी बढ़ा दिया है, जो पिछले कुछ समय से चल रहा है.
टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर संघर्ष जारी
Fox news की रिपोर्ट के मुताबिक हेगसेथ ने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग शांति चाहते हैं, उन्हें युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए. यह बयान व्यापारिक विवादों के बीच आया है. जहां चीन और अमेरिका के बीच टैरिफ की धमकियां और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर संघर्ष जारी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति के अनुसार, अमेरिका शांति और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन आवश्यक होने पर अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए तैयार रहेगा.
चीन ईरान को डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा
ट्रंप ने यह धमकी सिर्फ चीन को नहीं सभी देशों को दी है. वह सीएनएन से बातचीत कर रहे थे. एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन अगले हफ्तों के भीतर ईरान को डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है. इस रिपोर्ट में तीन अनाम सूत्रों का भी हवाला दिया गया है.
इनमें कहा गया है कि ट्रंप ने चीन को कच्चा तेल बेचने की पेशकश की. यह तेल अमेरिका से भी और वेनेजुएला से भी बेचा जा सकता है. वेनेजुएला का फिलहाल प्रशासन अमेरिका के हाथ में है. साल के शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया था.
उन्होंने कहा कि चीन अपने जहाज हमारे पास भेज सकता है. वेनेजुएला भेज सकता है. हमारे पास तेल बहुत ज्यादा है. यह ओवर कैपिसिटी में है. शायद तेल ईरान तुलना में और भी कम कीमत पर बेचेंगे.
क्या है ट्रंप का टैरिफ वॉर?
ट्रंप ने टैरिफ का इस्तेमाल भारत, ब्राजील, और चीन जैसे देशों पर किया था. जो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से बेहद ही गलत था. इसे रद्द कर दिया गया था.ऐसे में चीन के मामले में फरवरी 2026 को यह शुल्क 30 प्रतिशत पर पहुंच गया था. जब दोनों देशों में बातचीत हुई तो इसे घटाकर 30 प्रतिशत पर कर दिया गया. इसके बाद एक अलग इंटरनेशनल बिजनेस कानून के तहत एक अस्थायी टैरिफ को लागू कर दिया गया. इस वजह से वर्तमान शुल्क 10 से 15 प्रतिशत है.
ईरान और अमेरिका का युद्ध रुक गया है
इधर बीजिंग ने दावा किया है, उसने सीजफायर करवाने में भूमिका निभाई है. इसी वजह से ईरान और अमेरिका का युद्ध रुक गया है. वहीं अमेरिकी इंटेलिजेंस का आशंका है कि ईरान इस सीजफायर का इस्तेमाल हथियार भंडार भरने में कर सकता है. बिजिंग से हथियारों की खेप भेजी जा रही है. वह तीसरे देश के सहारे इसे ईरान तक पहुंचा रहा है. चीन जिन हथियारों को भेज रहा है, वो कंधे से दागी जाने वाली एंटी एयर मिसाइलें हैं. इन्हें मैनपेड कहा जाता है. यह अमेरिका के उड़ने वाले विमानों के लिए खतरा मानी जाती रही है.
अमेरिका के दावे को ट्रंप ने पूरी तरह नकारा
जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर चीन ऐसा करता है, तो उसे बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. वहीं चीनी दूतावास ने इस तरह के आरोपों को सिरे से नकार दिया है. कहा है कि यह जानकारी पूरी तरह से गलत है.
ट्रंप ने क्या संकेत दिया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को लेकर “बहुत खुश” थे और वह चीन में होने वाली अपनी मुलाकात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल-ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो गई है. यह संकट 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए.
फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह से संघर्ष विराम लागू है, फिर भी इस मार्ग से आवाजाही सीमित बनी हुई है. यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने पर चीन की सकारात्मक प्रतिक्रिया का संकेत दिया है.
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए कहा, “चीन बहुत खुश है कि मैं होर्मुज स्ट्रेट को स्थायी रूप से खोल रहा हूं. मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूं और दुनिया के लिए भी. ऐसी स्थिति फिर कभी नहीं आएगी. उन्होंने ईरान को हथियार न भेजने पर सहमति जताई है.”
