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आखिर क्यों पड़ा जम्मू-कश्मीर की इस गुफा का नाम अमरनाथ?

DB News
Last updated: 12/03/2026 11:20 AM
DB News
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7 Min Read
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अमरनाथ यात्रा जून से शुरू होती है और सावन पूर्णिमा तक चलती है, जानें यहां की मान्यता, एक गड़रिये ने खोजी थी यह गुफा, कैसें पहुंचे अमरनाथ धाम

By- db news update | Edited By- प्रिंस अवस्थी

Contents
अमरनाथ यात्रा जून से शुरू होती है और सावन पूर्णिमा तक चलती है, जानें यहां की मान्यता, एक गड़रिये ने खोजी थी यह गुफा, कैसें पहुंचे अमरनाथ धामस्वयं निर्मित होते हैं शिवलिंगअमरकथा सुनते ही अमरत्व की प्राप्तिकबूतर का जोड़ा आज भी गुफा में मौजूद2 गज से ज्यादा होती है शिवलिंग की ऊंचाईगड़रिए ने की थी खोजकैसे करें ऑनलाइन पंजीकरण?ऑफ़लाइन पंजीकरणमहत्वपूर्ण सुझाव:पहलगाम मार्ग रूटबाल्टल मार्ग रूटयात्रा में स्वस्थ्य होना जरूरीअमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए अतिरिक्त सुझावअमरनाथ की यात्रा दर्शनीय स्थल

Source : DB News Update

Amarnath Yatra: जम्मू-कश्मीर स्थित भगवान भोेले का दर्शन करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. यहां हर साल लाखों की संख्या में बाबा बर्फानी के भक्त अमरनाथ यात्रा करने के लिए जाते हैं. अमरनाथ यात्रा के लिए जून, जुलाई और अगस्त के महीने सबसे अच्छे माने जाते हैं. बर्फ पिघल जाती है और हिमशिला पूरी तरह से बन जाती है. अमरनाथ जाने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि तब रास्ता आसान होता है. अमरनाथ तीर्थयात्री हमेशा अपने साथ गर्म कपड़े, रेनकोट, पानी और नाश्ता रखते हैं. कुछ लोग कहते हैं, “बारिश के बाद सूरज निकला. पहाड़ सुनहरे लग रहे थे. मुझे वहां होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.”

हर साल अमरनाथ यात्रा दो महीने तक चलती है. जून से अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है. यह यात्रा अगस्त सावन पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक चलती है. ये यात्रा महादेव के भक्तों के लिए बेहद खास मानी जाती है.

स्वयं निर्मित होते हैं शिवलिंग

अमनरनाथ धाम को शिव का सबसे पवित्र और चमत्कारी स्थल माना जाता है. यहां महादेव बाबा बर्फानी का स्वरूप अपने आप शिवलिंग के रूप में गुफा के अंदर विराजते हैं. ये लिंग हर साल स्वंय निर्मित होते है. जिनका दर्शन-पूजन करने श्रद्धालु पूरे देश भर से आते हैं.

अमरकथा सुनते ही अमरत्व की प्राप्ति

अमरनाथ की गुफा में ही भोलेनाथ ने माता पार्वती को अमर होने का रहस्य बताया था. शिव जी ने एकांत में देवी को रहस्य बताया था क्योंकि अगर कोई अमरकथा सुन लेता तो वह भी अमर हो जाता है.

कबूतर का जोड़ा आज भी गुफा में मौजूद

पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस समय भोलेनाथ देवी को अमरत्व की कथा सुना रहे थे, उस समय वहां दो कबूतर भी मौजूद थे. वो कबूतर का जोड़ा अमर हो गया है और श्रद्धालुओं ने उन्हें इस गुफा के अंदर देखने का दावा भी कर रहे हैं. अमर कथा की साक्षी होने के चलते इस गुफा को अमरनाथ गुफा कहा जाता है.

2 गज से ज्यादा होती है शिवलिंग की ऊंचाई

यहां गुफा में मौजूद बर्फ का छोटा सा शिवलिंग हर दिन थोड़ा थोड़ा बढ़ता है, जिसकी ऊंचाई 2 गज से ज्यादा हो जाती है. बताया तो यह भी जा रहा है कि चंद्रमा के साथ ये घटने भी लगता है.

गड़रिए ने की थी खोज

मान्यता है कि सबसे पहले इस गुफा की खोज एक गड़रिए बूटा मलिक ने की थी. उसके बाद से अमरनाथ भगवान की यात्रा प्रारंभ हुई. इस साल अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना हो चुका है.

कैसे करें ऑनलाइन पंजीकरण?

  • श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
  • अमरनाथ यात्रा के लिए अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरें
  • स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अपलोड करें (अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र)।
  • अपना मार्ग चुनें: पहलगाम या बाल्टल।
  • पंजीकरण शुल्क का भुगतान करें और अपनी पर्ची डाउनलोड करें.

ऑफ़लाइन पंजीकरण

श्रद्धालु जम्मू या श्रीनगर में कुछ बैंक शाखाओं में अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण भी करा सकते हैं. उन्हें अपना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और विवरण दें. फिर वे आपको आपका अमरनाथ यात्रा परमिट देंगे.

महत्वपूर्ण सुझाव:

केवल 13 से 70 वर्ष की आयु के लोग ही जा सकते हैं.
जल्दी पंजीकरण बेहतर है क्योंकि तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित है
अपना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र तैयार रखें, अन्यथा आपको प्रवेश नहीं दिया जाएगा.

पहलगाम मार्ग रूट

दूरी: लगभग 48 किमी
समय: 4-5 दिन
मार्ग: आसान से मध्यम
आपको क्या दिखाई देगा: हरे-भरे घास के मैदान, नदियाँ, छोटे गाँव
अमरनाथ जाने का यह रास्ता लंबा है लेकिन आसान है। चलते समय आप प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। जो लोग अमरनाथ की शांत यात्रा चाहते हैं, उन्हें यह रास्ता बहुत पसंद आता है.

बाल्टल मार्ग रूट

दूरी: लगभग 14 किमी
समय: 1-2 दिन
मार्ग: खड़ी और कठिन
आपको क्या दिखाई देगा: बर्फ से ढके पहाड़, झरने
यह मार्ग छोटा है लेकिन कठिन है. इसके लिए आपको शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त होना आवश्यक है. कई युवा तीर्थयात्री इसे पसंद करते हैं क्योंकि यह तेज़ और रोमांचक है. अमरनाथ के मार्गों पर हर जगह स्वयंसेवक और सहायक मौजूद रहते हैं. वे पानी, भोजन और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. तीर्थयात्री कभी-कभी एक-दूसरे की मदद भी करते हैं.

यात्रा में स्वस्थ्य होना जरूरी

स्वास्थ्य प्रमाण पत्र: अमरनाथ यात्रा से पहले इसे प्राप्त करना अनिवार्य है.
आयु सीमा: 13 से 70 वर्ष।
चिकित्सा जांच: डॉक्टर से जांच करवाएं.
ऊंचाई के अनुकूल होने के लिए समय लें: ऊंचाई के अभ्यस्त होने में समय लें.
आपातकालीन सहायता: रास्ते में चिकित्सा सहायता उपलब्ध है.
मौसम: गर्म और बारिश से बचाव वाले कपड़े साथ रखें.

अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए अतिरिक्त सुझाव

पानी पिएं और हल्का भोजन करें.
अकेले मत जाओ, हमेशा समूह में रहो.
दिशा-निर्देशों और अधिकारियों का पालन करें.
आपातकालीन संपर्क के फोन नंबर संभाल कर रखें.
कुछ तीर्थयात्री ऊँचाई वाले स्थानों पर अस्वस्थ महसूस करते हैं, उन्हें विश्राम कराएं और पानी पियें. स्वयंसेवकों से मार्गदर्शन लें. नियमों का पालन करें.

अमरनाथ की यात्रा दर्शनीय स्थल

चंदनवारी: हरे-भरे घास के मैदान और नदियाँ हैं. पहलगाम से प्रस्थान का स्थान.
शेषनाग झील: ऊंचाई पर शांत झील है. अमरनाथ यात्रियों के लिए विश्राम स्थल.
पंचतरणी: यहाँ पाँच नदियाँ मिलती हैं. अमरनाथ मार्ग पर तीर्थयात्री यहाँ ध्यान करते हैं और विश्राम करते हैं.
अरु घाटी: पहलगाम के पास स्थित है. फोटोग्राफी और सैर के लिए बेहद खूबसूरत जगह है.

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