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जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले पुरी में निभाई जाती है अनोखी परंपरा

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Last updated: 25/03/2026 11:43 PM
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जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले कुछ खास अनुष्ठान किए जाते हैं जिसमें से एक है जगन्नाथ जी का सहस्त्रस्नान, क्या है अनुष्ठान, क्यों इसके बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं जानें वजह…

By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी

Contents
जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले कुछ खास अनुष्ठान किए जाते हैं जिसमें से एक है जगन्नाथ जी का सहस्त्रस्नान, क्या है अनुष्ठान, क्यों इसके बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं जानें वजह…आज 11 जून को स्नान पूर्णिमावर्गाकार में बना है कुआंक्यों एकांतवास करते हैं भगवान जगन्नाथ?2025 में जगन्नाथ रथ यात्रा की तिथिभगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में एक ऐसा भी है रहस्यरहस्यों को जानने के लिए पुरी आते हैं श्रद्धालुअदृश्य दिव्य शक्तियाँ भी इस यात्रा में शामिल होती हैंअब जानिए यह ‘अधारा पान’ होता क्या है?

Jagannath Rath Yatra 2025: आपको जानकार हैरानी होगी कि जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले पुरी में कुछ खास अनुष्ठान किए जाते हैं. जिसमें से एक है जगन्नाथ जी का सहस्त्रस्नान, क्या है अनुष्ठान, क्यों इसके बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं, यहां की यह अनोखी परंपरा है. इस वर्ष जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से होती है लेकिन इससे पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा से अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं. पूर्णिमा के दिन जगन्नाथ जी, बलभद्र, सुभद्रा माता का सहस्त्रस्नान होता है.

आज 11 जून को स्नान पूर्णिमा

ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में आज 11 जून को स्नान पूर्णिमा मनेगी. आज के दिन मंदिर में भक्तों के समक्ष जगन्नाथ जी को सहस्त्रस्नान यानी 108 घड़ों के जल से स्नान कराया जाएगा. स्नान के लिए सोने के 108 घड़ों में पानी भरा जाता है, उनमें कस्तूरी, केसर, चंदन और कई तरह की औषधियां मिलाएंगे.
पूरे साल में सिर्फ इसी दिन भगवान जगन्नाथ को मंदिर में ही बने सोने के कुंए के पानी से नहलाया जाता है, इसलिए इसे स्नान पूर्णिमा कहते हैं. मंदिर के पुजारियों का कहना है कि इस इस कुएं में कई तीर्थों का जल है.

वर्गाकार में बना है कुआं

ये कुंआ 4-5 फीट चौड़ा वर्गाकार कुआं है. ये जगन्नाथ मंदिर प्रांगण में ही देवी शीतला और उनके वाहन सिंह की मूर्ति के ठीक बीच में बना है. इसमें नीचे की तरफ दीवारों पर पांड्य राजा इंद्रद्युम्न ने सोने की ईंटें लगवाईं थीं.

क्यों एकांतवास करते हैं भगवान जगन्नाथ?

परंपरा के मुताबिक देवस्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को बुखार आ जाता है, इसलिए वो यात्रा से दो पहले तक एकांतवास में रहते हैं. 11 से 25 जून तक किसी को दर्शन नहीं देंगे.

2025 में जगन्नाथ रथ यात्रा की तिथि

इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून 2025 को निकलेगी इसका 10 जुलाई को समापन होगा. जगन्‍नाथ रथ यात्रा में विश्वभर से लोग आते हैं. मान्यता है इसके अद्भुत पुण्य प्राप्त होता है.

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में एक ऐसा भी है रहस्य

बताया जा रहा है कि “भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में एक ऐसा रहस्य छिपा है, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे…एक ऐसा पवित्र पेय जिसे भगवान के होंठों से लगाया जाता है, पर भक्त उसे छू भी नहीं सकते हैं. आखिर क्यों फेंका जाता है यह प्रसाद? सच जानने से पहले खुद को संभाल लीजिए!” ऐसा प्रतीत होता है कि  भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में भगवान खुद आम लोगों के बीच उतर आए हों.

रहस्यों को जानने के लिए पुरी आते हैं श्रद्धालु

पुरी की परंपरा वर्ष में सिर्फ एक बार देखने को मिलती है. इस यात्रा की एक-एक परंपरा इतनी अनोखी है कि आज भी उसके रहस्यों को जानने लोग पुरी आते हैं. इन्हीं परंपराओं में सबसे रहस्यमयी रस्म है – ‘अधारा पान’. यह एक ऐसा पवित्र पेय है, जिसे पहले भगवान के होंठों से लगाया जाता है और फिर फेंक दिया जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे कोई खा भी नहीं सकता और छू भी नहीं सकता.

अदृश्य दिव्य शक्तियाँ भी इस यात्रा में शामिल होती हैं

भगवान को अर्पित किया गया पेय प्रसाद बनकर भक्तों तक नहीं आता है? दरअसल, अधारा पान कोई साधारण प्रसाद नहीं, बल्कि एक गूढ़ परंपरा का हिस्सा है. मान्यता है कि जब भगवान रथ पर विराजमान होते हैं, तब कुछ अदृश्य दिव्य शक्तियाँ भी इस यात्रा में शामिल होती हैं. अधारा पान उन्हीं शक्तियों के लिए होता है, जिनकी ऊर्जा सामान्य मनुष्य संभाल ही नहीं सकता है. इसी वजह से इस पेय को किसी को खाने नहीं दिया जाता है. क्योंकि यह सामान्य भक्तों के लिए बना ही नहीं है.

अब जानिए यह ‘अधारा पान’ होता क्या है?

यह दूध से बना एक पेय पदार्थ है, जिसमें चीनी, केला, तुलसी, कपूर, काली मिर्च, दालचीनी और कई तरह की जड़ी-बूटियाँ मिलाई जाती हैं. सफेद रंग का, खीर जैसा दिखने वाला यह पेय मिट्टी के बर्तन में तैयार किया जाता है. जब भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा रथ पर चढ़ते हैं, तो इस पेय को उनके होंठों पर लगाया जाता है. इसके बाद वही मिट्टी का बर्तन रथ पर ही तोड़ दिया जाता है और इसका सारा पेय सड़क पर फैलाकर एक प्राचीन अनुष्ठान पूरा किया जाता है.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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