हारे का सहारा बाबा खाटू श्याम के प्रति लोगों की आस्था दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. जानें यहां भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए बाबा श्याम से कैसे अर्जी लगाते हैं.
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By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Khatu Shyam: खाटू वाले श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है, मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की झोली कभी खाली नहीं रहती है. खाटू श्याम जी में अरदास लगाने का तरीका भी अनोखा है. आखिर कैसे लगाई जाती है खाटू श्याम जी से अर्जी. राजस्थान में खाटू श्याम बाबा की महीमा अपरंपार है. बाबा श्याम के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं. कहते हैं ना भगवान इंसान के आडंबर नहीं बल्कि भाव के भूखे हैं. जो सच्चे मन से खाटू नरेश की पूजा करता है उनकी मनोकामना जल्द पूरी होने की मान्यता है.
खाटू श्याम जी से अर्जी कैसे लगाई जाती है ?
- खाटू श्याम जी में कोई शीश झुकाकर, कोई मन्नत का धागा बांधकर तो कोई अपनी मुराद पर्ची पर लिखकर यहां बाबा को चढ़ाता है. सबसे अनोखा तरीका है पर्ची वाला. बाबा श्याम के नाम भक्तों के पत्र बड़ी संख्या में यहां आते हैं.
- इसके लिए एक सफेद कोरा कागज लें. एक नए लाल रंग के पेन से श्रीश्याम लिखें और फिर नीचे अपनी अर्जी लिखें.
- अर्जी पर श्याम भक्त अपना नाम जरुर लिखें.
- अर्जी लिखने के बाद कलावा या मौली से इसे एक सूखे नारियल के साथ बांध दें. अब इस नारियल को खाटू श्याम के दरबार में चढ़ा दें.
- अगर आप किसी कारणवश मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो किसी दूसरे व्यक्ति से अर्जी भिजवा सकते हैं या फिर किसी श्याम मंदिर में चढ़ा दें.
खाटू श्याम जी को क्यों कहते हारे का सहारा
खाटू श्याम जी और कोई नहीं बल्कि भीम के पोते और घटोत्कच के बेटे हैं. इनका नाम बर्बरीक है. जो वीर योद्धा थे. महाभारत युद्ध के समय वो युद्ध में शामिल होना चाहते थे.बर्बरीक ने मां से कहा कि वे युद्ध में उसी का साथ देंगे जो लड़ाई हार रहा होगा. यही वजह है कि उन्हें हारे का सहारा कहा जाता है. श्रीकृष्ण जानते थे कि बर्बरीक जिस पक्ष से लड़ेंगे उसकी जीत जरूर होगी. ऐसे में कृष्ण भगवान ने उन्हें रोकने के लिए साधू का भेष बनाकर उनसे दान में उनका शीश लेने की बात कही. बर्बरीक ने उन्हें शीश दे दिया, जिसके बाद श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में तुम मेरे नाम से जाने और पूजे जाओगे.
खाटू श्याम जी में अरदास लगाने के मुख्य और अनोखे तरीके
बाबा के नाम चिट्ठी (खत लिखना) अनोखा तरीका:
यहाँ देश-विदेश से आने वाले भक्त अपनी परेशानियां, दुख या मनोकामनाएं एक कागज पर चिट्ठी के रूप में लिखते हैं.
खत लिखने की प्रक्रिया: इस पत्र को बाबा के चरणों में रख दिया जाता है या वहां बने अर्जी बॉक्स में डाल दिया जाता है. जो भक्त खाटू नहीं आ पाते, वे डाक (Post) या कूरियर द्वारा भी बाबा के नाम पत्र भेजते हैं, जिसे मंदिर के पुजारी बाबा के सम्मुख पढ़ते हैं. माना जाता है कि “हारे का सहारा” बाबा श्याम हर भक्त की चिट्ठी खुद पढ़ते हैं.
निशान (श्री श्याम ध्वज) चढ़ाना अनोखा तरीका
खाटू श्याम जी में अपनी हाजिरी लगाने और मन्नत मांगने का सबसे बड़ा तरीका निशान यात्रा है. यह नारियल, कलावे और मोरपंख से सजा एक पवित्र त्रिकोणीय झंडा (ध्वज) होता है.
इसकी प्रक्रिया
भक्त रिंगस (खाटू धाम से लगभग 18 से 20 किमी दूर) से नंगे पैर पैदल चलकर बाबा का जयकारा लगाते हुए खाटू धाम पहुंचते हैं और इस निशान को बाबा के मंदिर पर चढ़ाते हैं. यह अहंकार को त्यागकर खुद को बाबा के चरणों में सौंपने की अरदास है.
ताली बजाकर हाजिरी लगाना (ताली अर्जी) अनोखा तरीका
जब भक्त बाबा के मुख्य गर्भगृह के सामने पहुंचते हैं, तो वे वहां ताली बजाकर बाबा का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं. इसे ‘ताली अर्जी’ कहा जाता है, जिसका मतलब होता है कि “हे बाबा, मैं आपके दर पर आ गया हूँ, मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि डालिए.
कलावा (रक्षा सूत्र) बांधनाअनोखा तरीका
मंदिर परिसर में या श्याम कुंड के पास भक्त अपनी मन्नत बोलते हुए पवित्र धागा (कलावा) बांधते हैं. जब मन्नत पूरी हो जाती है, तो दोबारा आकर बाबा का शुक्रिया अदा करते हैं और धागा खोलते हैं या नया कलावा बांधते हैं.
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