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कांवड़ यात्रा के नियम, शास्त्रीय रहस्य जानें…

DB News
Last updated: 10/09/2026 11:54 AM
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6 Min Read
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कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है. ये केवल तीर्थ यात्रा नहीं, तपस्या है. इसे लेकर शास्त्रों में क्या नियम हैं? शिवपुराण प्रमाण, और प्रशासन के निर्देश क्या हैं, जानते हैं.

Source : DB News Update

Contents
कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है. ये केवल तीर्थ यात्रा नहीं, तपस्या है. इसे लेकर शास्त्रों में क्या नियम हैं? शिवपुराण प्रमाण, और प्रशासन के निर्देश क्या हैं, जानते हैं.By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थीकांवड़ केवल गंगाजल नहीं, एक तपस्या है!शास्त्रों में कांवड़ यात्रा का महत्व और नियमजिन नियमों का पालन न करना पाप माना गया है…1- कांवड़ को धरती पर न रखें2- अपवित्रता से बचे3- दाहिने हाथ से जल चढ़ाएं4- कोई दूसरे की कांवड़ को न छुएक्या करें?क्या न करें?वस्तु कारणक्या केवल जल चढ़ाना ही पर्याप्त है?

By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी

Kanwar Yatra 2025: कांवड़ यात्रा आधुनिक परंपरा का हिस्सा नहीं है, इस यात्रा का जिक्र स्कंद पुराण, शिव महापुराण और योगशास्त्रों में मिलता है. इस यात्रा के नियम, उद्देश्य और साधनाओं का उल्लेख इन पौराणिक ग्रंथों में मिलता है. कांवड़ यात्रा सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि संयम और साधना की महायात्रा है. सावन मास की प्रतिपदा जो पंचांग अनुसार 11 जुलाई 2025 को पड़ रही है, इस दिन से कांवड़ यात्रा का शुभारंभ होगा. कांवड़ यात्रा के नियम, प्रतीक और शास्त्रीय रहस्य क्या हैं, आइए जानते और समझते हैं.

कांवड़ केवल गंगाजल नहीं, एक तपस्या है!

श्रावण मास में जलाभिषेक के लिए हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और देवघर जैसे तीर्थों से जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाने की जो परंपरा है, उसे कांवड़ यात्रा कहा जाता है. यह यात्रा जितनी बाह्य रूप से कठिन है, उतनी ही आंतरिक रूप से संयम और पवित्रता की मांग करती है.

यही कारण है कि इस यात्रा को जो भी नियम पूर्वक, अनुशासन और पूर्ण भक्ति भाव से करता है भोलेनाथ उसके सभी कष्टों को दूर करते हैं, जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं.

शास्त्रों में कांवड़ यात्रा का महत्व और नियम

1. शिवपुराण की कथा

शिवपुराण, कोटिरुद्र संहिता के अनुसार श्रावण मासे नदीतटे स्नानं कृत्वा जलं गृहीत्वा शिवालयं यान्ति ये भक्ताः, ते भवबन्धनं त्यजन्ति.

अर्थ: श्रावण मास में पवित्र नदी से जल लेकर जो भक्त शिवालय जाते हैं, वे संसार के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं.

2. स्कंद पुराण में यात्रा का विधान

कृत्स्नं शरीरं शुद्धं कुर्यात्, अन्नं पवित्रं सेवेत

यानि यात्रा पर जाने वाले को शारीरिक और मानसिक पवित्रता, सात्विक आहार और नियमबद्ध आचरण का पालन करना चाहिए.

3. महाभारत में परिश्रम की महिमा

सर्वं तपःश्रमेण लभ्यते

इसका अर्थ है कि कांवड़ यात्रा में किया गया परिश्रम भी तप के समान माना गया है.

जिन नियमों का पालन न करना पाप माना गया है…

1- कांवड़ को धरती पर न रखें

यदि गलती से कांवड़ जमीन पर रख दी जाती है, तो संकल्प टूट जाता है. भक्त को गंगाजल वापस ले जाकर दोबारा भरना पड़ता है.

2- अपवित्रता से बचे

कांवड़ यात्रा के दौरान मांस, शराब, तंबाकू, भांग जैसे नशीले पदार्थों से पूर्ण रूप से बचना चाहिए.

चमड़े की वस्तुएं (बेल्ट, जूते) न पहनें.

3- दाहिने हाथ से जल चढ़ाएं

शिवपुराण के अनुसार दक्षिणहस्तेन अभिषेचनं श्रेष्ठम्.

4- कोई दूसरे की कांवड़ को न छुए

कांवड़ व्यक्तिगत संकल्प है. किसी और की कांवड़ छूना शास्त्रों के अनुसार अनुचित है.

क्या करें?

नित्य स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें

“बोल बम” के उच्चारण के साथ यात्रा करें

गंगाजल को दोनों कंधों पर संतुलित रखें

कांवड़ को हर समय ऊँचाई पर रखें (स्टैंड, रस्सी)

क्या न करें?

किसी के प्रति क्रोध, अभद्र व्यवहार या दिखावा

यात्रा के दौरान झूठ बोलना, चुगली करना

शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते समय कपड़े या अन्य वस्तुएं साथ चढ़ाना

शास्त्रसम्मत कांवड़ यात्रा में साथ ले जाने योग्य वस्तुएं

वस्तु कारण

लाल या केसरी वस्त्र वीरता और तपस्या का प्रतीक

त्रिशूल और रुद्राक्ष शिव का प्रतिनिधि

बेलपत्र, धतूरा शिव को प्रिय

गंगाजल पात्र जल चढ़ाने के लिए

हल्का भोजन व औषधियां ऊर्जा व स्वास्थ्य के लिए

क्या केवल जल चढ़ाना ही पर्याप्त है?

भोले को याद रखना चाहिए कांवड़ जल नहीं, भाव लेकर चलती है. ये शिव भक्ति की कठिन परीक्षा है, जिसे समर्पण और प्रेम भक्ति से पूर्ण किया जा सकता है.

यदि व्यक्ति यात्रा में केवल बाह्य आडंबर करता है और भीतर विकारों से भरा होता है, तो उसका पुण्य उलटा पाप बन सकता है. इस बात को नहीं भूलना चाहिए. ये यात्रा आदमी से इंसान बनने की दिशा में पहला कदम भी हो सकती है जो आपके भीतर पाप, विकारों का नष्ट करती है और आपको सच्चा और नेक इंसान बनाती है.

कांवड़ यात्रा सनातन परंपरा की विराटता को भी दर्शती है. इसे धूमिल नहीं करना चाहिए इसकी पवित्रता को कायम करते हुए इस यात्रा को पूर्ण करना चाहिए.

जो लोग फैशन या किसी अन्य मकसद से करते हैं उन्हें इस यात्रा का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है बल्कि पाप के भागी भी बनते हैं. समय आने पर कष्ट भी भोगने पड़ते हैं.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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