चरणामृत को जल, तुलसी और तांबे के लोटे में क्यों रखा जाता है?, जानिए पंचामृत बनाने के लिए किन तत्वों का होता है इस्तेमाल?
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Panchamrit aur Charnamrit: हिंदू धर्म के सभी मंदिरों में आरती-पूजा के बाद प्रसाद के रूप में चरणामृत देने का विधान है. इसके अलावा कई जगह चरणामृत और पंचामृत दोनों दिया जाता है. भक्त भावपूर्वक इनका सेवन तो कर लेते हैं. लेकिन इनके महत्व और फायदे के बारे में जानकारी नहीं रखते हैं. जबकि ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं और इन्हें बनाने की विधि भी अलग है. चरणामृत और पंचामृत से धर्म लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं. चरणामृत जल से बनता है और पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री या शक्कर मिलाकर बनाया जाता है.
चरणामृत क्या है?
चरणामृत का अर्थ है भगवान के चरणों का अमृत. पूजा करते समय भगवान के चरणों में तांबे के बर्तन से शुद्ध जल अर्पित किया जाता है. इस जल में तुलसी के पत्ते भी मिलाए जाते हैं. भगवान के चरणों पर अर्पित किया हुआ जल चरणामृत बन जाता है. श्रद्धा भाव से भक्त इसे पीते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में रखे तुलसी मिश्रित जल में औषधीय गुण आ जाते हैं. इस जल का नियमित रूप से लंबे समय तक सेवन करने से हमें स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं. तांबे के बर्तन में रखा जल स्वास्थ्य के लाभदायक माना जाता है. तुलसी के गुण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं.
कैसे बनाते हैं पंचामृत?
पंचामृत का अर्थ है- पंच अमृत यानी पांच प्रकार के अमृत. इसे दूध, दही, घी, शहद, मिश्री या शक्कर मिलाकर बनाया जाता है. पंचामृत से भगवान का अभिषेक भी किया जाता है, मूर्ति को स्नान कराया जाता है. कई लोग पंचामृत में तुलसी दल, केसर, इलायची, सूखे मेवे और गंगाजल भी मिला लेते हैं. पंचामृत से अभिषेक करने के लिए सबसे पहले अपने इष्टदेव के सामने दीपक और धूप जलाकर भगवान का ध्यान करें. पहले शुद्ध जल से भगवान की प्रतिमा को स्नान कराएं. जल के बाद धीरे-धीरे पंचामृत भगवान की मूर्ति या शिवलिंग पर अर्पित करें.
इस दौरान अपने इष्ट देव के मंत्र का जप करें. जैसे शिव जी के लिए- ॐ नमः शिवाय, विष्णु जी के लिए – ॐ नमो नारायणाय, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, गणेश जी के लिए- ॐ गं गणपतये नमः, श्रीकृष्ण के लिए – कृं कृष्णाय नम:, श्रीराम के लिए – रां रामाय नम:, हनुमान जी के लिए – ॐ रामदूताय नम: का जप कर सकते हैं. पंचामृत अभिषेक के बाद फिर से जल से भगवान को स्नान कराएं.
इसके बाद भगवान की प्रतिमा को स्वच्छ कपड़े से साफ करें. चंदन, हार-फूल, चावल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. मिठाई का भोग लगाएं, प्रसाद में चरणामृत और पंचामृत भी रखें. आरती करें. पूजा के बाद चरणामृत, पंचामृत, मिठाई प्रसाद के रूप में अन्य भक्तों को बांटें और खुद भी लें.
5 तत्वों से मिलकर बनता है पंचामृत
- पवित्रता, सात्विकता और मातृत्व का प्रतीक है- दूध
- समृद्धि, स्वास्थ्य और शक्ति का प्रतीक है- दही
- तेज, यज्ञ, ज्ञान और दिव्यता का प्रतीक है- घी
- मधुरता, एकता और सौहार्द का प्रतीक है- शहद
- आनंद, सुख और शुभ फल का प्रतीक है- मिश्री या शक्कर
चरणामृत और पंचामृत में अंतर
अधिकांश श्रद्धालु-भक्तों को चरणामृत और पंचामृत में अंतर ही नहीं मालूम होता है. दोनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है. पंचामृत वह मिश्रण है जो पांच पवित्र तत्व मिलाकर तैयार किया जाता है. मुख्य रूप से इसका इस्तेमाल देवताओं के अभिषेक के दौरान होता है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. चरणामृत वह पवित्र जल है जिसका भगवान के चरणों में स्पर्श या स्नान कराने के बाद तैयार किया जाता है. कई मंदिरों में अभिषेक के बाद प्राप्त पंचामृत ही चरणामृत बन जाता है, जबकि कई हिंदू धर्म स्थलों पर चरणामृत अलग से जल, तुलसी और अन्य पवित्र सामग्री मिलाकर तैयार किया जाता है. इसलिए हर पंचामृत चरणामृत नहीं होता, लेकिन अभिषेक के बाद पंचामृत को चरणामृत का स्वरूप माना गया है.
चरणामृत और पंचामृत पीने के धार्मिक लाभ
- मान्यता है कि पंचामृत का सेवन करने से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है.
- पूजा और व्रत का पूर्ण फल मिलता है.
- मन में शांति और सकारात्मकता आती है.
नोट- आयुर्वेद के अनुसार, पंचामृत में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें पौष्टिक मानी जाती हैं. दूध और दही कैल्शियम और प्रोटीन के स्रोत हैं. घी ऊर्जा और वसा प्रदान करता है. शहद में प्राकृतिक शर्करा होती है और मिश्री स्वाद के साथ ऊर्जा भी देती है. हालांकि, यह कोई औषधि नहीं है और इसके स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य स्थिति और सेवन की मात्रा पर निर्भर करते हैं.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

