इंदौर के एमवाय अस्पताल में चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है, जहां दो नवजात शिशुओं की चूहों के काटने से मौत हो गई.
Source : DB News Update
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Indore Rat Bite News: मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जिन अस्पतालों में जिंदगी बचाने की पूरी संभावना रहती है, वहीं हैरान व परेशान करने वाली घटनाओं का पर्दाफाश हो रहा है. दरअसल महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल (MYH) के आईसीयू में भर्ती 2 नवजात शिशुओं को चूहों ने कुतर दिया, जिससे दोनों की मौत हो गई. इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे हैं. इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है.
प्रशासन ने लिया सख्त एक्शन
इस घटना को लेकर प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. अस्पताल के विभागाध्यक्ष और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप तय करते हुए नोटिस जारी किया गया है. पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. ब्रजेश लाहोटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.
सहायक अधीक्षक एवं भवन प्रभारी डॉ. मुकेश जायसवाल को निलंबित कर दिया गया. नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती प्रवीणा सिंह को भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया.
डीन ने दिए निर्देश, पेस्ट कंट्रोल कंपनी पर जुर्माना
मामला सामने आते ही अस्पताल के डीन ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की. ड्यूटी पर मौजूद नर्स और नर्सिंग अधीक्षक को सस्पेंड किया गया, जबकि विभागाध्यक्ष और अधीक्षक पर ‘शो कॉज़’ नोटिस जारी किया गया. साथ ही, अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी पर भारी जुर्माना ठोका गया. प्रशासन ने कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
जांच कमेटी गठित, जिम्मेदारी तय होगी
सरकारी प्रेस नोट के माध्यम से माीडिया को जानकारी दी गई है कि 1 सितंबर की रात को एनआईसीयू और पीआईसीयू में यह घटना हुई, जो गंभीर लापरवाही का मामला है. इस पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की गई. वहीं, घटना की तह तक जाने और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए 5 डॉक्टरों की एक विशेष जांच टीम बनाई गई है. यह टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच कर जल्द ही रिपोर्ट सौंपेगी.
घटना और लापरवाही के मामले में अस्पताल का तर्क
हालांकि अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि बच्चों की मौत चूहों के काटने से नहीं, बल्कि उनके कम वजन और जन्मजात गंभीर बीमारियों (जैसे सेप्टीसीमिया) की वजह से हुई है. लेकिन उन्होंने वॉर्ड में चूहे घुसने और लापरवाही की बात को स्वीकार किया है.
प्रशासन द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई
वॉर्ड के दो नर्सिंग ऑफिसर्स को सस्पेंड कर दिया गया और नर्सिंग सुपरिटेंडेंट को पद से हटा दिया गया.
बाल रोग सर्जरी विभाग (Paediatric Surgery) के प्रमुख डॉ. ब्रजेश लाहोटी को पद से हटा दिया गया और उनकी अनुपस्थिति में प्रभार संभाल रहे डॉ. मनोज जोशी को निलंबित कर दिया गया है.
अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल (चूहे व कीड़े भगाने) का जिम्मा संभालने वाली प्राइवेट एजेंसी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का नोटिस जारी किया गया है.
मुख्यमंत्री ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए, साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी सरकार से इस पर रिपोर्ट तलब की थी.
वार्ड में कैसे पहुंचे चूहे?
पेस्ट कंट्रोल और चूहे रोकने के कड़े इंतजाम (Strict Pest Control Measures)प्रवेश द्वारों की री-इंजीनियरिंग की गई है. प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि भारी बारिश के कारण चूहे ड्रेनेज और पाइपलाइनों के जरिए वॉर्डों में घुसे थे. इसके बाद, जहाँ से चूहों के अंदर आने की आशंका थी, उन सभी रास्तों, बिलों और पाइपों को चिन्हित करके पूरी तरह से ब्लॉक (सील) कर दिया गया है.
अब गाइड लाइन के तहत संचालित होगा एनआईसीयू
अस्पताल में लंबे समय से पेस्ट कंट्रोल नहीं हुआ था. अब नई गाइडलाइन के तहत एनआईसीयू (NICU), पीआईसीयू (PICU) और बच्चों के संवेदनशील वॉर्डों में लगातार और अनिवार्य रूप से पेस्ट कंट्रोल करने की व्यवस्था शुरू की गई है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वॉर्डों में मरीजों के परिजनों द्वारा खाने-पीने का सामान ले जाने के कारण चूहों की संख्या बढ़ी थी. अब आईसीयू और बच्चों के वॉर्डों के भीतर बाहरी भोजन और खाद्य सामग्री ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है, ताकि चूहे आकर्षित न हों.
सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों से मॉनिटरिंग
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के बाद संवेदनशील वॉर्डों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है. इसके जरिए ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और वॉर्ड की गतिविधियों पर लाइव नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या जीव के दिखने पर तुरंत एक्शन लिया जा सके. साथ ही वॉर्ड बॉयज और सुरक्षा गार्डों की राउंड-द-क्लॉक (24 घंटे) रोटेशनल ड्यूटी को अनिवार्य किया गया है, ताकि कोई भी बच्चा वॉर्ड में अकेला या असुरक्षित न रहे.
