शारदेय नवरात्रि पर मैहर धाम बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु, प्रशासनिक और पुलिस अधकारियों ने करके रखा है व्यापक इंतजाम
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shardiya Navratri Wishes: शारदीय नवरात्र पर देश भर में मातारानी की भक्ति में भक्त डूबे हुए हैं. वर्षों से देवी शक्ति की पूजा की परंपरा देश भी की देवी मंदिरों में देखने को मिल रही है. इस परंपरा से मध्य प्रदेश का मैहर जिला कैसे अछूता रह सकता है. यहां विराजमान भवानी शारदा का दर्शन और पूजन करने वालों की लंबी कतार देखने को मिल रही है. मैहर स्थित मां शारदा मंदिर में शारदेय नवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती जा रही है. मंदिर प्रबंधन द्वारा मीडिया को जानकारी दी जा रही है कि अब तक के नवरात्रि पर्व में सर्वाधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए है. मंदिर प्रबंधन और प्रशासन द्वारा की गई श्रद्धालुओं की संख्या का ध्यान रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं. जिसका लाभ भक्तों को सरलता से मिल रहा है और वे दर्शन लाभ प्राप्त कर रहे हैं.
पुलिस प्रशासन की सक्रियता आ रही काम
मैहर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद दिखाई पड़ रहा है. शारदीय नवरात्र मेले में मातारानी के दर्शन करने आ रहे श्रद्धालुओं से कई बच्चे बिछड़ गए थे, उन बिछड़े 160 से अधिक बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को पुलिस ने अपने उनके परिजनों से मिलवा चुका है. वहीं, खोया-पाया केंद्र की व्यवस्था भी कारगर साबित हो रही है.
पांचवें दिन सवा लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन किए
मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन तक कुल 1,26,438 श्रद्धालुओं ने मातारानी शारदा के दर्शन कर लिए थे. शारदा मंदिर पहुंचने के लिए कई श्रद्धालु सीढ़ी का उपयोग भी कर रहे हैं. सीढ़ी से दर्शन करने वालों की संख्या 1 लाख 21 हजार 538, रोपवे से 6 हजार 250 और वैन से 1 हजार 650 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं.
प्रशासनिक व्यवस्था की हो रही तारीफ
सोशल मीडिया में इस बात की जानकारी दी जा रही है कि शारदीय नवरात्र पर पूरे मेला क्षेत्र में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी और मेहनत से श्रद्धालुओं को हर वह सुविधा मिल रही है, जिससे भक्त लाभान्वित हो रहे हैं. भक्तों ने प्रशासन और पुलिस की व्यवस्था की सराहना कर रहे हैं.
शारदा के दरबार में हर मनोकामना की पूर्ति
ऐसी मान्यता है कि मां शारदा के दरबार में हर उस मनोकामना की पूर्ति होती है, जो भी भक्त अपने मन की पीड़ा लिए मातारानी के दर पर पहुंचता है. इतना ही नहीं श्रद्ध-भक्ति के साथ जो भी मातारानी की पूजा-अर्चना करता है. उन सभी भक्तों को अर्थ, कर्म, काम और मोक्ष चार फलों की प्राप्ति होती है.
इन दिनों के मुख्य आकर्षण
नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाती है. कई जगहों पर नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है.
इन नौ दिनों में मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक माता के अलग-अलग नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा होती है.
संध्या आरती, भजन-कीर्तन और पारंपरिक गरबा-डांडिया उत्सव का विशेष माहौल रहता है.
अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है, जिसके बाद विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाता है.
नवरात्रि में 9 दिनों तक मातारानी के प्रिय रंग
- नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा होती है. पर्वत राज हिमालय की पुत्री होने की वजह से उनका वर्ण सफेद है और उनको नारंगी और श्वेत रंग सबसे प्रिय है. इसलिए नवरात्रि के पहले दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनकर मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए.
- नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. मां ब्रह्मचर्य का पालन करने वाली देवी है. इनके स्वभाव के अनुरूप सफेद रंग सबसे उत्तम माना जाता है. इसलिए नवरात्रि के दूसरे दिन सभी को सफेद रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए.
- नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघण्टा की पूजा होती है और इस दिन का लकी कलर लाल माना गया है. मां दुर्गा सदैव लाल जोड़े में भक्तों को दर्शन देती हैं. लाल रंग वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. इस रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से आपके घर में समृद्धि बढ़ती है. लाल रंग शक्ति और प्रेम का प्रतीक भी होता है.
- नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है. इस दिन गहरे नीले रंग या फिर बैंगनी रंग के वस्त्र पहनकर मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करें तो आपको मां का संपूर्ण आशीर्वाद मिलता है. इससे आपके घर में समृद्धि बढ़ती है.
- नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है. मां दुर्गा का यह रूप प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना गया है. मां की गोद में स्वामी कार्तिकेय जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है. विराजमान हैं. मां के इस रूप की पूजा पीले या फिर सफेद वस्त्र पहनकर करनी चाहिए.
- नवरात्रि की षष्ठी तिथि का महत्व सबसे अधिक माना गया है. बंगाली समाज के लोग इस दिन से ही मां दुर्गा की पूजा आरंभ करते हैं. मां का यह रूप कात्यायनी देवी का माना गया है. कहते हैं कि इस दिन कुंवारी कन्याएं गुलाबी वस्त्र पहनकर मां दुर्गा की पूजा करें तो उन्हें शीघ्र ही सुयोग्य वर मिलता है.
- नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा होती है. मां का यह रूप प्रचंड और तेजमयी माना गया है. मां कालरात्रि के भय से दुष्ट दैत्य थरथर कांपते थे. मां दुर्गा का यह स्वरूप बुराइयों का अंत करने वाला माना गया है. इस दिन स्लेटी या फिर कत्थई रंग के वस्त्र पहनकर मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए.
- नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी माता की पूजा करने का विधान है. महागौरी माता गाय की सवारी करती हैं और इनका वर्ण श्वेत माना जाता है. इस दिन आपको सफेद और बैंगनी रंग के वस्त्र पहनकर मां की पूजा करनी चाहिए.
- नवरात्रि का नवां और आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है. इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से आपकी पूजा सफल होती है और आपको मां का आशीर्वाद मिलता है.
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