श्रीराम का सद्चरित्र और रावण के अहंकार की गाथा सजीव चित्रण देश भर आते हैं भक्त
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Ramlila Jabalpur News: श्रीराम का सद्चरित्र और रावण की निर्दयता की गाथा सुनने के लिए आज भी बड़ी संख्या में लोग रामलीला के मंचन कार्यक्रम में पहुंच रहे हैं. वर्षों पुरानी इस परंपरा में वेष-भूषा में कई बदलाव देखे गए. लेकिन मंचन के दौरान राम-लक्ष्मण, रावण के पात्र का डायलाग नहीं बदला. केवल समय के साथ किरदार बदल रहे हैं. प्रत्येक रामलीला समिति के आयोजक बदल रहे हैं. लेकिन रामलीला के मंचन में वही पुराने डायलाग ही सुनाई पड़ते हैं. मंचन के दौरान रावण की दहाड़ जब मंच से सामने बैठे लोगों को सुनाई पड़ती है तो आज भी लोग सहम जाते हैं और रावण के द्वारा किए गए अत्याचारों का वर्णन जिस तन्मयता के साथ गढ़ा और गोविंदगंज रामलीला के पात्र निभाते हैं. रामलीला के पात्र जो वर्षों पहले रावण ने किए होंगे. उसको जीवंत करते हुए उसके अत्याचारों को वर्तमान में दिखाने का प्रयास करते हैं. मध्य प्रदेश जबलपुर के कलाकारों की विशेषता रही है कि रामायण के पात्र में परिवर्तन करने के बाद भी श्रीराम की मर्यादा, सीता जी का सद्चरित्र और कैकेयी की कुटिलता का बखूबी निर्वहन आज भी गढ़ा और गोविंदगंज श्रीरामलीला के पात्रों में देखने को मिल रही है. वह आज भी जीवंत है.
गढ़ा रामलीला समिति चर्चित
जबलपुर गढ़ा क्षेत्र में श्रीरामलीला का मंचन वर्षों से किया जा रहा है. यहां की रामलीला शुरु होने पर संतों द्वारा मुकुट पूजन और श्रीराम की शोभायात्रा पूरे गढ़ा क्षेत्र में भ्रमण करती है. इसके अलावा राम-रावण का युध्य शोभायात्रा के बीच किया जाता है और अंत में रावण वध के साथ दशहरे के पावन पर्व पर इस रामलीला का समापन होता है.
आजादी के पहले से किया जा रहा रामलीला का मंचन
मध्य प्रदेश जबलपुर में गोविंदगंज रामलीला का मंचन सन् 1865 से किए जाने की जानकारी मिली है. इस रामलीला की शुरुआत उस दौर मे हुई जब शहर में लाइट भी नहीं हुआ करती थी. लोग चिमनी की रोशनी में पढ़ाई किया करते थे. करीब 160 वर्षों से इस रामलीला का मंचन किया जा रहा है. इसके कई पात्र बदल गए हैं. लेकिन परंपरा में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है.
मुकुट पूजन के साथ शुरु होता रामलीला का मंचन
गोविंदगंज रामलीला और गढ़ा रामलीला का मंचन मुकुट पूजन के साथ प्रारंभ होता है. वाद्ययंत्रों के माध्यम से श्रीरामचरित मानस के श्लोक का वाचन और राम-लक्ष्मण की मर्यादा, रावण का अहंकार, कैकेयी की कुटिलता, दशरथ के वियोग का मंचन ऐसे पात्रों द्वारा किया जाता है कि रामलीला का मंचन देखने वालों के सामने जीवंत झांकी दिखाई पड़ने लगती है.
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