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Religion

कब है पोंगल, क्यों मनाते हैं? जानें महत्व और पूजा विधि

DB News
Last updated: 23/03/2026 9:49 PM
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5 Min Read
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पोंगल का पर्व तमिलनाडु में नए साल का पहला दिन माना जाता है. 14 जनवरी को मनाए जाने वाले पोंगल का पर्व सूर्य से जुड़ा त्योहार है, जानें इसका महत्व और पर्व को मनाने की परंपरा.

Source : DB News Update  

Contents
पोंगल का पर्व तमिलनाडु में नए साल का पहला दिन माना जाता है. 14 जनवरी को मनाए जाने वाले पोंगल का पर्व सूर्य से जुड़ा त्योहार है, जानें इसका महत्व और पर्व को मनाने की परंपरा.क्यों मनाते हैं पोंगल?कैसे मनाते हैं पोंगलभोगी पोंगल –सूर्य पोंगल –मट्टू पोंगल –कानूम पोंगल-क्यों मनाया जाता है पोंगल?पोंगल त्योहार का अर्थ क्या है?धान की फसल का विशेष महत्व

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा  | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Pongal 2026: पोंगल का त्योहार प्रमुख रूप से तमिलनाडु में नए साल के रूप में मनाया जाता है. इसे साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. पोंगल 14 जनवरी से शुरू होकर 17 जनवरी 2026 तक चलेगा. इस अवधि के दौरान भगवान छह महीने की लंबी नींद के बाद नश्वर लोगों पर समृद्धि और धन की वर्षा करने के लिए जागते हैं. इस शुभ दिन पर सूर्य को समस्त सृष्टि के पीछे मौजूद जीवन शक्ति के रूप में पूजा जाता है. इस दौरान उत्तर भारत में मकर संक्रांति, पंजाब में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण जैसे प्रमुख त्योहार भी मनाए जाते हैं.

क्यों मनाते हैं पोंगल?

ऐसी मान्यता है कि यह पर्व प्रमुख रूप से नई फसल के आगमन और कटाई के मौसम के अंत का प्रतीक है, जो किसानों और उनकी मेहनत का सम्मान करता है. सूर्य देव, धरती माता और खेती में मदद करने वाले मवेशियों के प्रति धन्यवाद प्रेषित करने का प्रमुख पर्व है.

कैसे मनाते हैं पोंगल

भोगी पोंगल –

पोंगल के पहले दिन लोग ‘भोगी’ का त्योहार मनाते हैं. इस दौरान पूरे घर की सफाई की जाती है. इससे पर्यावरण स्वच्छ हो जाता है.

सूर्य पोंगल –

दूसरे दिन सूर्य पोंगल मनाया जाएगा. इस दिन सूर्य पूजन के बाद खेतों में नई फसल के पकने की खुशी में खीर जैसी मिठाई (पोंगल) बनाई जाती है.

मट्टू पोंगल –

ये पोंगल पर्व का तीसरा दिन है. यह दिन मवेशियों या खेत के कार्यों में काम आने वाले गाय-बैलों को समर्पित है. इस दिन इन मवेशियों की पूजा होती है और उन्हें विशेष भोजन खिलाया जाता है.

कानूम पोंगल-

पोंगल का आखिरी दिन कानूम पोंगल के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं और सामाजिक समारोहों का आयोजन करते हैं.

क्यों मनाया जाता है पोंगल?

पोंगल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का त्योहार है. “पोंगल” शब्द का शाब्दिक अर्थ है “उबलना” , जो असीम समृद्धि का प्रतीक है. किसान ऊर्जा के लिए सूर्य, पोषण के लिए धरती, जीवन के लिए वर्षा और श्रम के लिए पशुओं का आभार व्यक्त करते हैं. कृतज्ञता को प्राथमिकता देने वाला यह दर्शन बताता है कि भारत में पोंगल को केवल एक सांस्कृतिक आयोजन के बजाय एक पवित्र फसल उत्सव के रूप में क्यों मनाया जाता है.

पोंगल सादगी और संतुलन के मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है. घरों की शुद्धि की जाती है, पुरानी वस्तुओं को त्याग दिया जाता है और संकल्पों को नवीकृत किया जाता है. ये अनुष्ठान व्यावहारिक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक भी हैं; दैनिक जीवन से जुड़े हुए, ऋतुओं के अनुरूप और सामूहिक रूप से मनाए जाने वाले हैं.

पोंगल त्योहार का अर्थ क्या है?

हिंदू संस्कृति में पोंगल का महत्व कृषि से अविभाज्य रूप से जुड़ा हुआ है. यह फसल चक्र की सफल समाप्ति और आने वाले वर्ष के लिए जीविका की गारंटी का प्रतीक है. खुले आसमान के नीचे मौसम की पहली चावल की फसल पकाकर परिवार प्राकृतिक शक्तियों पर अपनी निर्भरता को स्वीकार करते हैं. चावल से लबालब भरा बर्तन केवल उत्सव का प्रतीक नहीं है; यह निरंतर समृद्धि के लिए प्रार्थना भी है.

पोंगल का महत्व खेतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक बंधनों से भी जुड़ा है. रिश्तेदार आपस में मिलते हैं, पड़ोसी एक-दूसरे को बधाई देते हैं, और समुदाय संगीत, कोलम और हंसी से जीवंत हो उठता है, जो सभी को याद दिलाता है कि समृद्धि साझा की जाती है. इस त्योहार को पारिवारिक माहौल में मनाया जाता है और पोंगल बनाकर बड़े चाव के साथ परिवार के सदस्य ग्रहण करते हैं.

धान की फसल का विशेष महत्व

किसानों के यहां जब भी धान की फसल होती है. किसान अपने घर में सबसे पहली धान की फसल का चावल निकालकर पोंगल घर पर बनवाता है और परिवार के सभी सदस्य उसे ग्रहण करते हैं.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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