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रक्षाबंधन 2026 में कब? जानें तरीख और शुभ मुहूर्त

DB News
Last updated: 09/09/2026 11:30 AM
DB News
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7 Min Read
रक्षाबंधन का त्योहार कब है
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भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रमुख त्योहार रक्षाबंधन का बेसब्री से इंतजार रहता है. यह त्योहार न केवल परिवार के रिश्ते  मजबूत करता है. बल्कि परिवार के बीच खुशी और समय व्यतीत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है.

Source : DB News Update  

Contents
भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रमुख त्योहार रक्षाबंधन का बेसब्री से इंतजार रहता है. यह त्योहार न केवल परिवार के रिश्ते  मजबूत करता है. बल्कि परिवार के बीच खुशी और समय व्यतीत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है.रक्षाबंधन 2026 में कब ?2026 में राखी बांधने का शुभ मुहूर्तइंद्र देव और श्रीकृष्ण से क्या है राखी का संबंधरक्षाबंधन के दिन मंत्रोच्चारण से राखी बांधने का महत्वरक्षा बंधन क्या है?धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वविधि और परंपराएंरक्षा बंधन पर लगने वाली पूजन सामग्री

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा  | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Raksha Bandhan 2026: हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में रक्षाबंधन एक ऐसा पवित्र त्योहार है, जिसमें भाई-बहन का अनसुलझा प्यार छिपा होता है. धागे की एक डोर में बंधे इस बंधन को निभाने की जिम्मेदारी छिपी रहती है. जिसका निर्वहन भाई मरते दम तक करता है. बहन को सुरक्षा का भाव केवल भाई के प्रेम में दिखाई पड़ता है. आज जब रिश्ते कलंकित हो रहे हैं. समाज में वैमनस्यता का भाव है. रिश्ते-नातों में विश्वसनीयता नहीं है. ऐसी परिस्थिति में केवल भाई-बहन का रिश्ता ही बचा है, जो भाई के प्रति बहन और बहन के प्रति भाई के बीच अटूट बंधन को बनाए हुए है और इन दोनों के बीच प्रेम और स्नेह का भाव आज भी कायम है. यह त्योहार न केवल भाई-बहन के रिश्तों में मजबूती लाता है. बल्कि परिवार के सभी सदस्यों को भी साथ-साथ लाता है. इस कारण हर वर्ष रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर परिवार में उत्सुकता बनी रहती है और लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं. आइए जानते हैं 2026 में रक्षाबंधन कब मनाया जाएगा और इस पवित्र त्योहार को मनाने की विधि क्या है?

रक्षाबंधन 2026 में कब ?

रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस साल भद्रा का साया नहीं रहेगा. बहने पूरे दिन राखी बांध सकती हैं. सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026 को सुबह 9.08 पर होगी और अगले दिन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9.48 पर समाप्त होगी.

2026 में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह 5.57 से सुबह 9.48 तक शुभ मुहूर्त है. बहनों को राखी बांधने के लिए 3 घंटे 51 मिनट का शुभ मुहूर्त रहेगा.

इंद्र देव और श्रीकृष्ण से क्या है राखी का संबंध

मान्यता है कि रक्षाबंधन का प्रारंभ देवी इन्द्राणी के द्वारा अपने भाई के हाथ में एक धागा बांधा गया था. कथा में वर्णन मिलता है कि इन्द्र देव को जब धागा बांधा गया था. उसके बाद ही उन्हें राक्षसों पर विजय प्राप्त हुई थी.

वहीं एक कथा और आती है कि महाभारत में, भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को युद्ध के दौरान रक्षा और विजय के लिये राखी बांधने का सुझाव दिया था. उसी महाकाव्य में एक प्रसंग मिलता है कि भगवान श्री कृष्ण की उंगली से जब खून बह रहा था तब द्रौपदी ने हाथ में वस्त्र की एक पट्टी बांध दी थी जिसके लिये द्रौपदी को भगवान श्री कृष्ण ने दिव्य सुरक्षा प्रदान की थी.

रक्षाबंधन के दिन मंत्रोच्चारण से राखी बांधने का महत्व

रक्षा सूत्र मंत्र एक वैदिक प्रार्थना है. इसे आमतौर पर पुजारी या बहन राखी बांधते समय बोलती है.

ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

अर्थ- जिस तरह महान शक्तिशाली राजा बलि को रक्षा के बंधन में बांधा गया था, उसी प्रकार यह रक्षा-सूत्र आपकी भी रक्षा करेगा। एक ऐसा बंधन जो भौतिक सीमाओं से परे है.

रक्षा बंधन को भले ही बहन और भाई के बीच का भावनात्मक त्योहार कहा जाता हो, लेकिन मंत्रों का उच्चारण इसे एक विशेष अर्थ प्रदान करता है. यह केवल प्रेम का प्रतीक धागा ही नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक मंत्रों की ध्वनि से परिपूर्ण एक दैवीय शक्ति से युक्त कवच है. यह राखी को सही मायने में रक्षा सूत्र, एक सुरक्षात्मक धागा बना देता है.

रक्षा बंधन क्या है?

श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षाबंधन पवित्र हिंदू त्योहार है, जो भाई-बहन के आजीवन स्नेह और विश्वास का प्रतीक है. बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके मंगल की प्रार्थना करती हैं और भाई स्नेह, सम्मान तथा सहयोग का संकल्प लेता है.

समय के साथ यह पर्व केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विश्वास, जिम्मेदारी और भावनात्मक सुरक्षा के व्यापक संबंधों का भी प्रतीक बन गया है. परिवार के चचेरे भाई-बहन और निकट संबंधी भी इस त्योहार में शामिल होते हैं. इस दिन पूजा, पारिवारिक मिलन, मिठाइयां और आशीर्वाद का विशेष महत्व होता है.

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

  • रक्षा बंधन परस्पर संरक्षण और दायित्व का संदेश देता है. यह पर्व केवल भाई की रक्षा प्रतिज्ञा नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच सम्मान, सहयोग और आत्मीयता का उत्सव है.
  • हिंदू परंपरा में रक्षासूत्र को शुभ संरक्षण, पवित्र संकल्प और कल्याणकारी ऊर्जा का प्रतीक माना गया है.
  • सांस्कृतिक रूप से यह पर्व दूरियों के बावजूद परिवार को जोड़ता है और कृतज्ञता, मेल-मिलाप तथा संबंधों के नवीकरण का अवसर देता है.

विधि और परंपराएं

  • प्रात:काल स्नान के बाद पूजन स्थान तैयार कर लें और थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक व मिठाई रख लें.
  • बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती करें, राखी बांधें और भाई के स्वास्थ्य, आयु व सुख की प्रार्थना करें.
  • भाई अपनी बहन को कोई उपहार देकर बहन का आशीर्वाद प्राप्त करे और उसके सम्मान व सहयोग का संकल्प दोहराए.
  • राखी बांधने के बाद मिठाई और प्रसाद बांटकर परिवार सहित भोजन करें.
  • परिवार से दूर रहने वाले भाई-बहन डाक या ऑनलाइन माध्यम से राखी और शुभकामनाएं साझा कर सकते हैं.

रक्षा बंधन पर लगने वाली पूजन सामग्री

  • अपनी मनपसंद की राखी
  • रोली, अक्षत, कुमकुम और दीपक
  • लड्डू, बर्फी और घर की पारंपरिक मिठाइयां
  • फल, नारियल और सूखे मेवे का प्रसाद
  • उपहार या दक्षिणा

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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