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निर्जला एकादशी 2026 कब है? नोट कर लें डेट

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Last updated: 22/05/2026 11:52 AM
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6 Min Read
निर्जला एकादशी करने का विधान
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ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है. सबसे बलवान भीम से क्यों जुड़ा है यह व्रत? जानें…

Source : DB News Update  

Contents
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है. सबसे बलवान भीम से क्यों जुड़ा है यह व्रत? जानें…निर्जला एकादशी व्रत की पूजा विधिनिर्जला एकादशी को क्यों कहा जाता है भीमसेनी एकादशी?निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्तनिर्जला एकादशी व्रत पारण समयक्यों है साल की सबसे बड़ी एकादशीकठिन लेकिन सबसे प्रभावशाली व्रत

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा  | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, अनुष्ठान आदि को लेकर अनेक उपाय बताए गए हैं. लेकिन ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है. इस एकादशी के दिन निर्जला व्रत करने का विधान है. इस एकादशी का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है. इस एकादशी के दिन व्रत करने वाले जातक को साल की सभी एकादशी करने के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं. व्रतधारी के सारे रोग, दोष, दरिद्रता मिट जाते हैं. इस साल निर्जला एकादशी 29 जून 2026 को है. इस दिन एकादशी तिथि कब से शुरू हो रही है, पूजा का मुहूर्त क्या है और व्रत पारण कितने बजे किया जाएगा? इस लेख में यह सब जानकारी जान लें.

निर्जला एकादशी व्रत की पूजा विधि

  • निर्जला एकादशी का व्रत रखने के लिए साधक को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान कर लेना चाहिए.
  • तन और मन से पवित्र होने के बाद साधक को अन्न और जल ग्रहन न करने का संकल्प लेना चाहिए.
  • निर्जला एकादशी वाले दिन यदि संभव हो तो व्यक्ति को पीले वस्त्र धारण करना चाहिए.
  • भगवान श्री हरि की पीले पुष्प, पीले वस्त्र, चंदन, केसर, धूप, दीप, पीले फल, पीले रंग की मिठाई, तुलसी दल आदि अर्पित करें.
  • निर्जला एकादशी व्रत की कथा सुनें और भगवान विष्णु के मंत्र का  ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का अधिक से अधिक जप करें.
  • अगले दिन शुभ मुहूर्त में इस व्रत का पारण करने के बाद ही अन्न ग्रहण करना चाहिए.
  • शारीरिक क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार आप बगैर जल, फल आदि के नहीं रह सकते तो आप सामान्य रूप से इस व्रत को रखते हुए भगवान विष्णु की पूजा करें.
  • निर्जला एकादशी व्रत की पूजा के अंत में भगवान लक्ष्मीनारायण की आरती जरूर करें.
  • निर्जला एकादशी व्रत का पुण्यफल पाने के लिए इस दिन पानी से भरा कलश, मौसमी फल, पंखा, वस्त्र एवं धन आदि का दान करना चाहिए.
  • भूखे ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिये. तत्पश्चात् स्वयं भोजन करना चाहिये.

निर्जला एकादशी को क्यों कहा जाता है भीमसेनी एकादशी?

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि निर्जला एकादशी को सबसे ज्यादा इसलिए पुण्यदायी है. क्योंकि भीमसेनी एकादशी महाभारत की एक कथा जुड़ी हुई है. ऐसी मान्यता है कि महाभारतकाल में 5 पांडवों में भीम ही मात्र एक ऐसे महाबली थे, जिन्हें भूख बहुत ज्यादा लगती थी. वे अपनी भूख को बर्दाश्त नहीं कर पाते थे. ऐसे में भीम के लिए किसी देवी- देवता के लिए व्रत रखना बहुत कठिन था.

एक बार उन्होंने अपनी आस्था से जुड़ी यह समस्या महर्षि वेदव्यास से बताई तो उन्होंने उन्हें ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी. जब भीम को पता चला कि सिर्फ निर्जला एकादशी व्रत करने मात्र से ही उन्हें साल की 24 एकादशी व्रत का पुण्यफल प्राप्त हो जाएगा तो उन्होंने इस व्रत को विधि-विधान से किया. मान्यता है कि तभी से इस व्रत को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाने लगा.

निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्त

तिथि – ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी की तिथि 24 जून 2026 को शाम 6.12 पर शुरू होगी और अगले दिन 25 जून 2026 को रात 8 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी.

पूजा समय – निर्जला एकादशी के दिन श्रीहरि की पूजा का समय सुबह 10.39 से दोपहर 2.09 मिनट तक रहेगा.

निर्जला एकादशी व्रत पारण समय

निर्जला एकादशी का व्रत पारण 26 जून 2026 को सुबह 5.25 से सुबह 8.13 तक किया जाएगा. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय रात 10.22 तक है.

क्यों है साल की सबसे बड़ी एकादशी

साल की सभी चौबीस एकादशियों में भीमसेनी एकादशी सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशी है. जो विष्णु भक्त 24 एकादशी का उपवास करने में सक्षम नहीं है उन्हें केवल निर्जला एकादशी उपवास करना चाहिए क्योंकि निर्जला एकादशी उपवास करने से दूसरी अन्य सभी एकादशी व्रत का लाभ मिल जाता हैं. निर्जला एकादशी के बारे में ग्रंथों का कहना है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने वालों की उम्र बढ़ती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

कठिन लेकिन सबसे प्रभावशाली व्रत

एकादशी व्रतों में निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन व्रत माना गया है. निर्जला एकादशी व्रत को करते समय श्रद्धालु-भक्त भोजन ही नहीं बल्कि पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं. इस एकादशी के व्रत में स्नान एवं आचमन करते समय यदि मुख में जल चला जाये तो इसका कोई दोष नहीं है, लेकिन आचमन में 6 माशे से अधिक जल नहीं लेना चाहिये. इस आचमन से शरीर की शुद्धि हो जाती है. आचमन में 6 माशे से अधिक जल मद्यपान के समान है.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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