भगवान शिवलिंग का अभिषेक-पूजा करने के नियम और ताली बजाने के महत्व की जानकारी होना बहुत जरूरी है. शिवलिंग के सामने तेज आवाज में ताली बजाएं या मधुर स्वर में बजाना चाहिए? जानें सही तरीका और धार्मिक महत्व.
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Clapping In Front Of Shivling: भगवान भोलेनाथ शिवशंकर का पवित्र माह सावन शुरु होने वाला है. इस दौरान कई सनातनी भगवान शिव का रुद्राभिषेक, पूजन और अर्चन करेंगे. भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वैदिक रीति-रिवाज और परंपरा के अनुसार ध्यान, पूजन करने में मनमुग्ध रहेंगे. लेकिन यह जानकारी बहुत कम लोगों को होगी कि भगवान शिव लिंग का अभिषेक करने के दौरान ताली बजाते हैं. आखिरकार ताली बजाने के पीछे का रहस्य क्या है? कभी किसी भक्त ने नहीं किया होगा. हलांकि भगवान शिव शंकर एक लोटा जल अर्पण करने से भी प्रसन्न हो जाते हैं. फिर भी उन्हें प्रसन्न करने के लिए ताली बजाकर भगवान को जगाने का क्यों प्रयास किया जाता है? इस बारे में कोई भी भक्त जानने का प्रयास नहीं किया होगा. यदि आप भी नहीं जानते हैं तो आइए हम बता रहे हैं. भगवान शिव के सामने किस ध्वनि में ताली बजाना चाहिए? क्या शिवलिंग के सामने ताली बजाना वास्तव में सही है या नहीं? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसका क्या महत्व है और इसके क्या लाभ या नुकसान हो सकते हैं.
ताली बजाने का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि जब भी मंदिर में प्रवेश करें तो ताली बजाएं या घंटा अवश्य बजाएं. भगवान के समक्ष अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराएं. भगवान के सामने किया गया यह कृत्य भक्त की उपस्थिति को दर्शाता है. लेकिन मंदिर में जाने का एक निश्चित समय निर्धारित होता है. उस निश्चित समय का विशेष ध्यान रखें. भगवान के जब शयन (आराम) का समय हो या फिर भगवान का भोग लग रहा हो, उस दौरान ताली बजाना या घंटा बजाना वर्जित है. लेकिन भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर के पट जब खुले हों, तब ताली और घंटा अवश्य बजाना चाहिए. शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि, ताली की ध्वनि से आसपास के वातावरण में मौजूद नकारात्मक शक्तियां और तामसिक ऊर्जा दूर भाग जाती है. इससे मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वहीं भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते समय मधुर ध्वनि में ताली बजाकर प्रसन्न करने की परंपरा है.
शिवलिंग के सामने 3 बार ताली बजाने का नियम
शिव पुराण में वर्णन मिलता है कि, शिवलिंग के पास मनमाने ढंग से ताली नहीं बजाना चाहिए. यदि आपको ताली बजाना ही है, तो ‘तीन ताली’ बजाने का नियम और महत्व बताया गया है. ऐसी मान्यता है कि, लंकापति रावण ने भी महादेव को प्रसन्न करने के लिए 3 बार ताली बजाकर स्तुति की थी, जिससे उसे लंका का राजपाठ और अपार शक्तियां प्राप्त हो गई थी. अक्सर जब भी भगवान शिव का रुद्राभिषेक, पूजन किया जाता है. उस दौरान वेदाचार्य चारों दिशाओं में चुटकी और ताली बजाने के लिए प्रेरित करते हैं. इसके पीछे भगवान भोले को प्रसन्न करने का रहस्य छिपा होता है.
तीन ताली बजाने का रहस्य और लाभ
- पहली ताली (उपस्थिति दर्ज कराना): पहली ताली इस बात का संकेत है कि आप भगवान शिव के दरबार में आ चुके हैं. इससे महादेव का ध्यान भक्त की ओर आकर्षित हो जाता है.
- दूसरी ताली (मनोकामना पूर्ति): दूसरी ताली बजाने का उद्देश्य अपनी इच्छा या मनोकामना को भोलेनाथ के समक्ष रखना है. ऐसी मान्यता है कि इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है.
- तीसरी ताली (शरण और सुरक्षा): तीसरी ताली इस बात का प्रतीक है कि भक्त स्वयं को पूरी तरह से महादेव के चरणों में समर्पित कर रहा है. ऐसा करने से शिव भक्त को जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है.
शिवलिंग के पास जोर से ताली बजाने का निषेध
एक तरफ जहां तीन बार नियमानुसार ताली बजाने के लाभ बताए गए हैं, वहीं दूसरी ओर पौराणिक कथाओं में वर्णन यह भी मिलता है कि शिवलिंग के बिल्कुल करीब जाकर जोर-जोर से ताली बजाकर शोर मचाना वर्जित है. इसके धार्मिक और व्यावहारिक कारण निम्नलिखित हैं-
महादेव की समाधि में विघ्न
भगवान शिव को तंत्र, मंत्र और ध्यान का देवता माना जाता है. वे अक्सर गहरी समाधि (ध्यान) में लीन रहते हैं. शिवलिंग के पास जाकर तेज आवाज में ताली बजाने या चिल्लाने से महादेव के ध्यान में विघ्न पड़ता है, जिसे शास्त्रों में अपराध माना गया है. ऐसा करने से भक्त पाप का भागी बनता है.
आरती के समय बजाएं ताली
शास्त्रों के अनुसार, जब मंदिर में सामूहिक आरती हो रही हो, तब ढोल-नगाड़ों और शंख की ध्वनि के साथ ताली बजाना शुभ माना गया है. लेकिन एकांत पूजा या जल चढ़ाते समय शांति बनाए रखना चाहिए.
भक्तों के लिए दी गई है चेतावनी
जो भी भक्त शिव मंदिर जाते हैं, तो वे इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भक्ति हमेशा शालीनता और मर्यादा में रहकर करना है. शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते समय पूरी तरह शांत रहें और मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप अवश्य करें.
यदि भक्त भगवान भोले को प्रसन्न करने के लिए ताली बजाना चाहते हैं, तो शिवलिंग से थोड़ी दूरी बनाकर, अत्यंत शालीनता के साथ केवल तीन बार ताली बजाएं. मंदिर की शांति को भंग न करें ताकि महादेव की कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहे.
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