सीएम मोहन यादव ने बताया कि 6941.40 करोड़ की भोपाल मेट्रो परियोजना प्रगति पर है, जिसका लक्ष्य अक्टूबर 2025 तक प्रायोरिटी कॉरिडोर शुरू करना और 2030 से पहले दोनों लाइनों को चालू करना है.
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By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Bhopal Metro Project : MP के भोपाल में सुभाष नगर स्टेशन से एम्स स्टेशन तक अनुमानित 2225 करोड़ की लागत से प्रायोरिटी कॉरिडोर बनाया जा रहा है. इसका कार्य अंतिम चरण में है. अक्टूबर 2025 तक इस प्रायोरिटी कॉरीडोर में मेट्रो ट्रेन का संचालन शुरू कर देने का सरकार ने लक्ष्य रखा है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरकेएमपी स्टेशन पर भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल मेट्रो मध्य प्रदेश की प्रगति का प्रतीक है. इस परियोजना को कुल 6941.40 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है.
भोपाल मेट्रो के दोनों कॉरिडोर्स (ऑरेंज और ब्लू लाइन) साल 2030 से पहले पूर्ण रूप से चालू कर देने का हमारा रोडमैप तैयार है.
ऐसी है भोपाल मेट्रो की डिजाइन
भोपाल में चलने वाली मेट्रो की स्पीड 90 किमी प्रति घंटा होगी. इसकी ऑपरेशनल स्पीड 40-60 किमी घंटा होगी. हर मेट्रो स्टेशन के बीच मात्र 2 मिनट का समय लगेगा. मेट्रो में यात्रियों के लिए एस्केलेटर, लिफ्ट, ब्रेल साईनेज, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय और त्वरित सूचनाएं देने की सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं होंगी.
मेट्रो से कंट्रोल होगा प्रदूषण
भोपाल मेट्रो ट्रेन परियोजना के लिए कुल 27 अत्याधुनिक मेट्रो ट्रेन सेट होंगे. इनमें से 7 ट्रेन सेट भोपाल पहुंच चुके हैं. मेट्रो से न केवल सुविधाजनक यात्रा ही संभव होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी इसकी प्रभावी भूमिका होगी.
औपचारिक मेट्रो रेल संचालन दिसंबर 2025 में हुआ शुरू
भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरीडोर पर औपचारिक तौर पर रेल संचालन 21 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था. उस समय इस ट्रेक पर सिग्नल का काम पूरा नहीं हो पाया था. इसकी वजह से इसे एक ही ट्रेक पर अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया जाता रहा है. दोनों ट्रैक पर सिग्नल लगाने का काम पूरा हो जाने के बाद सीएमआरएस का निरीक्षण शुरू हुआ. सीएमआरएस की टीम ने सबसे पहले सुभाष नगर मेट्रो डिपो के कंट्रोल और कमांड सेंटर में सिग्नलिंग सिस्टम के सभी तकनीकी पहलुओं को समझा.
सुरक्षा को देखते हुए बारीकी से देखे जा रहे सिग्नलिंग सिस्टम
मेट्रो टीम द्वारा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. मॉनिटर के जरिए सुरक्षा मानकों को देखते हुए फील्ड पर उतरा गया. जांच टीम एमपी नगर मेट्रो स्टेशन पहुंची, जहां आधुनिक पाइंट मशीन डिटेक्शन के जरिए सिग्नलिंग सिस्टम का बारीकी से टेस्ट किया. यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि पटरियों के बदलने और ट्रेनों के रूट निर्धारण की प्रक्रिया सटीक हो. इसी दौरान टीम ने ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति को नियंत्रित करने वाले आटोमेटेड सिस्टम को भी परखा.
75 मिनट तक इंतजार करते हैं यात्री
बताया जा रहा है कि भोपाल मेट्रो में अब तक सिग्नल सिस्टम पूरी तरह चालू नहीं होने के कारण केवल डाउन ट्रैक पर ट्रेन चल रही थी. यानी जो ट्रेन सुभाष नगर से एम्स जाती है, वह उसी ट्रैक से वापस लौटती है. इसके कारण ट्रेन के दो फेरों के बीच 75 मिनट का अंतर था. इस अवधि में यात्रियों को इंतजार करना पड़ रहा है.
मेट्रो की निर्धारित होगी नई समय सारिणी
भोपाल मेट्रो कई दिनों बंद रही. केवल करीब 6.2 किमी लंबे प्रायोरिटी कॉरीडोर पर भोपाल में मेट्रो रेल का संचालन सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक ही होता है. यह ट्रेन इन घंटों में पांच फेरे ही लगा पाती है.
इसकी वजह से यात्रियों की संख्या भी बेहद कम है. बताया जा रहा है कि सीएमआरएस की एनओसी मिलने के बाद मेट्रो रेल कार्पोरेशन इनके फेरे बढ़ाने पर विचार कर रहा है. संभावना है कि जुलाई के दूसरे सप्ताह तक नई समय सारिणी जारी हो जाएगी.
शिवराज ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक दौड़ाई थी मेट्रो
मीडिया रिपोर्ट से पता चला है कि सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक काम पूरा हो गया है. इसके आगे अलकापुरी, एम्स और डीआरएम मेट्रो स्टेशन तक ट्रैक का काम हो चुका है और मेट्रो यहां तक पहुंच चुकी है. वहीं, दोनों स्टील ब्रिज की लोड टेस्टिंग भी की जा चुकी है. तीन अक्टूबर 2023 को भोपाल में पहली बार मेट्रो ट्रैक पर दौड़ी थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाषनगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था. इसके बाद से ही लगातार परीक्षण किया जा रहा है.
