मायावती ने जताई नाराजगी, हादसे को गंभीरता से नहीं लिया गया, मायावती ने भोले बाबा की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक विशेष जांच दल, हाथरस में सत्संग कर रहे भोले बाबा की भूमिका को लेकर भी चुप है।
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Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
उत्तर प्रदेश, लखनऊ. हाथरस हादसे की जांच रिपोर्ट को लेकर बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने हमला बोला है। मायावती ने सत्संग भगदड़ मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) पर आरोप लगया है। उन्होंने कहना कि एसआईटी की रिपोर्ट सत्संग के दौरान हुए हादसे की गंभीरता के हिसाब से नहीं बनाई गई है। रिपोर्ट राजनीति से प्रेरित ज्यादा नजर आती है।
मायावती ने भोले बाबा की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक विशेष जांच दल, हाथरस में सत्संग कर रहे भोले बाबा की भूमिका को लेकर भी चुप है। एसआईटी की चुप्पी चिंता को दर्शाती है। विदित हो कि एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर 6 अधिकारियों को स्सपेंड कर दिया गया है.
हाथरस मामले की जांच-पड़ताल के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। विशेष जांच दल की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि सत्संग भगदड़ के पीछे सबसे बड़ी गलती कार्यक्रम आयोजकों की है। आयोजकों ने सत्संग में आई भीड़ के लिए ठीक व्यवस्था नहीं की थी। रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों की इसी लापरवाही ने भीषण हादसे को अंजाम दिया। इसी के साथ एसआईटी ने स्थानीय प्रशासन को भी भगदड़ का जिम्मेदार माना है। जानकारी के मुताबिक रिपोर्ट में कहीं भी सत्संग वाचक भोले बाबा का नाम नहीं आया है।
मायावती का बयान
बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया। जिसमें उन्होंने एसआईटी पर निशाना साधा है। दरअसल हाथरस हादसे की जांच के लिए विशेष दल का गठन हुआ था।
मायावती ने SIT की हाथरस मामले की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक रिपोर्ट हाथरस मामले की गंभीरता के हिसाब से नहीं है। मायावत ने कहा,“यूपी के ज़िला हाथरस में सत्संग भगदड़ काण्ड में हुई 121 निर्दोष महिलाओं व बच्चों आदि की दर्दनाक मौत सरकारी लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है, लेकिन एसआईटी द्वारा सरकार को पेश रिपोर्ट घटना की गंभीरता के हिसाब से नहीं होकर राजनीति से प्रेरित ज्यादा लगती है, यह बहुत दुःखद है।
इसके बाद उन्होंने कहा, इस अति-जानलेवा घटना के मुख्य आयोजक भोले बाबा की भूमिका के सम्बंध में एसआईटी की खामोशी भी लोगों में चिन्ताओं का कारण है। उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के बजाय उसे क्लीनचिट देने का प्रयास खास चर्चा का विषय है। सरकार जरूर ध्यान दे ताकि ऐसी घटनाओं की फिर से न हो सके।”
बता दें कि हाथरस के सिकंदराराऊ में 2 जुलाई को सत्संग के दौरान घटित दुर्घटना के तत्काल बाद गठित एडीजी जोन आगरा और मंडलायुक्त अलीगढ़ की एसआईटी ने 2, 3 और 5 जुलाई को घटनास्थल का निरीक्षण किया था. जांच के दौरान कुल 125 लोगों का बयान लिया गया, जिसमें प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ आम जनता एवं प्रत्यक्षदर्शियों का बयान भी शामिल है.
पुलिस व प्रशासन को भी दोषी पाया
जांच समिति ने कार्यक्रम आयोजक और तहसील स्तरीय पुलिस व प्रशासन को भी दोषी पाया है. स्थानीय एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज अपने दायित्व का निर्वहन करने में लापरवाही के जिम्मेदार हैं. उप जिला मजिस्ट्रेट सिकंदराराऊ ने बिना कार्यक्रम स्थल का मुआयना किए ही आयोजन की अनुमति दी और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत भी नहीं कराया. इसी क्रम में, सिकंदराराऊ के उप जिला मजिस्ट्रेट, सिकंदराराऊ के पुलिस क्षेत्राधिकारी, सिकंदराराऊ के थानाध्यक्ष, सिकंदराराऊ के तहसीलदार, चौकी इंचार्ज कचौरा एवं चौकी इंचार्ज पोरा को निलंबित कर दिया गया है.
गैंगरेप के मामले को लेकर भी मुखर थीं मायावती
इससे पहले उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक दलित युवती के साथ गैंगरेप का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को भीम आर्मी ने लखनऊ में विधानसभा के सामने कूड़ा डालकर विरोध दर्ज कराया तो दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो मायावती ने फिर राज्य सरकार पर निशाना साधा। मायावती ने कहा कि मामले की जांच या तो सीबीआई से कराई जाए या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी पूरी जांच हो.
मायावती ने शनिवार को ट्वीट कर कहा- हाथरस केस को लेकर पूरे देश में जबरदस्त आक्रोश है। इसकी शुरूआती जांच रिपोर्ट से जनता संतुष्ट नहीं लगती है। मामले की CBI से या फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए.
दूसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा- देश के राष्ट्रपति यूपी से आते हैं। एक दलित होने के नाते भी इस केस में खासकर सरकार के अमानवीय रवैये को ध्यान में रखकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दखल देने की भी उनसे अपील है.
